Ratlam News: पंचकल्याणक महोत्सव: राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मंत्री चैतन्य काश्यप ने दी धर्म और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा  

रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: सागोद रोड स्थित ऋषभधाम में श्री आदिनाथ कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन मंदिर परमार्थिक समिति द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के जन्म कल्याणक महोत्सव में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और कैबिनेट मंत्री  चैतन्य काश्यप ने शिरकत की। इस मौके पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजकुमार अजमेरा, सचिव जिनेंद्र जैन, सुशील अजमेरा, गौरव अजमेरा, मुकेश मोठिया, कीर्ति बड़जात्या, और महेंद्र अजमेरा ने राज्यपाल और मंत्री का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।    राज्यपाल गहलोत ने धर्म और मोक्ष का संदेश दिया   कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल गहलोत ने कहा, “पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म का एक विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान है, जो हमें धर्म, करुणा, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह महोत्सव तीर्थंकर भगवान के जीवन के पांच महत्वपूर्ण चरणों को आत्मसात करने और आत्मा की दिव्यता को पहचानने का मार्गदर्शक है।”   उन्होंने 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के आदर्श जीवन का उल्लेख करते हुए कहा, “भगवान नेमिनाथ का जीवन करुणा, अहिंसा और सत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने पंचशील सिद्धांत (अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) पर चलने का संदेश दिया, जो आज भी मानवता के लिए प्रेरणादायक है।”   मंत्री कश्यप ने सांस्कृतिक और पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर   कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारी परंपरा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन पर आधारित है। भारतीय संस्कृति सर्वे भवंतु सुखिनः और ‘जियो और जीने दो’ की भावना को आत्मसात करती है।”   उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “भारतीय संस्कृति में वृक्ष, जल, भूमि और जीव-जंतुओं की पूजा की परंपरा है। हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करे।”   सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति   इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल और मंत्री के साथ कलेक्टर, डीआईजी और एसपी भी मौजूद रहे। समिति की ओर से कलेक्टर का भी सम्मान किया गया।   महोत्सव का महत्व   पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म के आदर्शों को प्रचारित करने और समाज में नैतिक और मानवीय मूल्यों को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण आयोजन है। इस महोत्सव ने धर्म और प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज को प्रेरित किया।  

Ratlam News: रतलाम में त्वचा रोगियों के लिए विशेष शिविर का आयोजन, इस रविवार शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर देंगे सेवाएं

रतलाम। Ratlam News: शहर के भारत मेडिकल स्टोर एवं क्लीनिक के तत्वावधान में इस रविवार को एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, और गुप्त रोग से संबंधित समस्याओं का निवारण किया जाएगा। यह शिविर उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो त्वचा संबंधी बीमारियों और देखभाल के उपायों पर विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहते हैं।यह शिविर त्वचा की देखभाल और बीमारियों के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो स्थानीय निवासियों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगा।उचित परामर्श के साथ-साथ आवश्यक दवाइयां और जीवनशैली से जुड़े सुझाव दिए जाएंगे। शिविर में भाग लेने के लिए आपको भारी भरकम फीस से छुटकारा मिलेगा। त्वचा रोग पर विशेष शिविरइस शिविर में प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेशकुमार मीना (एमबीबीएस, एमडी) अपनी सेवाएं देंगे। डॉ. मीना रतलाम के प्रतिष्ठित चिकित्सकों में से एक हैं और त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, तथा गुप्त रोगों के उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। शिविर में निम्नलिखित समस्याओं का समाधान किया जाएगा: ऐसे करवा सकते है रजिस्ट्रेशनशिविर का आयोजन गायत्री टाकीज रोड स्थित भारत क्लिनिक (6, शहर सराय, गायत्री टॉकीज के पास, रतलाम) पर होगा। जिसके लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र 100 रुपए का रहेगा। शिविर रविवार यानी 12 जनवरी को दोपहर 12 से 4 बजे तक आयोजित होगा। शिविर में भाग लेने से पहले आपको दिए गए नंबर 9644650272, 831997837 पर कॉल कर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। शिविर में त्वचा की देखभाल और त्वचा को स्वस्थ रखने के उपायों पर विस्तृत मार्गदर्शन। त्वचा रोग के प्रति जागरूक हो जनताइस शिविर का मुख्य उद्देश्य है कि लोग त्वचा से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लें और विशेषज्ञ से उचित उपचार लें। बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें, और बढ़ते प्रदूषण के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में, यह शिविर आमजन को स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों के प्रति जागरूक करेगा। अधिक जानकारी व रेजिस्ट्रेशन के लिए 9644650272, 831997837 नंबर पर कॉल कर सकते है।

Ratlam News: रतलाम मेडिकल कॉलेज में सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया का पहला सफल प्रयोग

रतलाम-पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: सरकारी मेडिकल कॉलेज (DLNP GMC) में पहली बार सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया का सफल प्रयोग किया गया। यह प्रक्रिया जनरल सर्जरी टीम द्वारा किए गए एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी ऑपरेशन के दौरान की गई। एनेस्थीसिया विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. योगेश तिलकर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उत्सव शर्मा ने एचओडी एवं प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र डावर के मार्गदर्शन में इस प्रक्रिया को अंजाम दिया।   इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में टी7-टी8 स्तर पर सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया गया, जिसमें हाइपरबारिक बुपिवाकेन और आइसोबारिक लेवो बुपिवाकेन का संयोजन किया गया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अंशुमान दत्ता (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. भरत और उनकी टीम ने भी सराहनीय योगदान दिया। मरीज और उनके परिजनों ने डॉक्टरों की टीम का धन्यवाद व्यक्त किया।   सर्जरी टीम की भूमिका   यह सर्जरी जनरल सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. नीलम चार्ल्स, डॉ. विक्रम मुजाल्दे, डॉ. अनिल डावर और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पूरी की।   प्रबंधन की सराहना   कॉलेज की डीन प्रोफेसर डॉ. अनीता मुथा और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप मिश्रा ने पूरी एनेस्थीसिया और सर्जरी टीम के प्रयासों की प्रशंसा की।   यह कदम रतलाम मेडिकल कॉलेज के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है और भविष्य में मरीजों के लिए आधुनिक व उन्नत उपचार की संभावनाओं को प्रोत्साहित करेगा।  

Ratlam News: रतलाम मेडिकल कॉलेज में नई शुरुआत; मिलेगा कमर, गर्दन जैसे दर्द का निःशुल्क इलाज

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शासकीय डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज रतलाम (GMC Ratlam) ने विश्व विकलांगता दिवस के अवसर पर फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग के तहत फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और ऑर्थोटिक्स-प्रोस्थेटिक्स जैसी अत्याधुनिक सेवाओं का शुभारंभ किया। इन सेवाओं के माध्यम से अब मरीजों को कमर दर्द, गर्दन दर्द, बच्चों में विकार और कृत्रिम अंग एवं पट्टे जैसी समस्याओं का नि:शुल्क इलाज मिलेगा।  विश्व विकलांगता दिवस का महत्वहर साल 3 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह दिवस दिव्यांगों के अधिकारों और उनके प्रति करुणा एवं सम्मान का संदेश देता है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में PMR विभाग ने अत्याधुनिक मशीनों और सेवाओं के माध्यम से मरीजों के इलाज में नए आयाम जोड़े।  PMR विभाग में निम्नलिखित आधुनिक मशीनें और सेवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं:  – लेजर थेरेपी– ट्रैक्शन मशीन– आईएफटी मशीन– हीटिंग थेरेपी इन सेवाओं का लाभ अस्पताल में भर्ती मरीज (IPD) और बाहरी मरीज (OPD) दोनों उठा सकते हैं।  सफल इलाज के प्रेरणादायक मामले  केस 1:12 महीने की बच्ची, जिसे न्म से दाहिने कूल्हे में दर्द और पैर सीधा न रखने की समस्या थी, PMR विभाग में नियमित थेरेपी से पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है। बच्ची अब चलने लगी है और किसी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी।  केस 2:दीपक पाटीदार, 35 वर्षीय व्यक्ति, जिन्हें लकवे की शिकायत थी, ने PMR विभाग में फिजियोथेरेपी करवाकर अपनी दैनिक गतिविधियां फिर से शुरू कर दी हैं।  फिजियोथेरेपी के लाभ– मांसपेशियों और जोड़ों की लचक बनाए रखता है।  – वजन नियंत्रण और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार।  – हृदय, फेफड़े और शारीरिक क्षमता में वृद्धि।  – मानसिक तनाव कम करके सकारात्मकता बढ़ाता है।  ये रखे सावधानियां:– उच्च रक्तचाप, सांस फूलने, अस्थिभंग (फ्रैक्चर) की स्थिति में सावधानी बरतें।  – इंटरनेट से देखी गई एक्सरसाइज से बचें।  – केंसर के शुरुआती स्टेज में 2000 से अधिक मरीज लाभान्वितअब तक 2000 से अधिक मरीज (OPD और IPD) इस विभाग की सेवाओं से लाभान्वित हो चुके हैं।  PMR विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि यह पहल न केवल दिव्यांग मरीजों के लिए सहायक सिद्ध होगी, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नया अध्याय जोड़ेगी।

Ratlam News: मेडिकल कॉलेज में कंगारू टेक्नीक से बच्चे को मिला नया जीवन; 3 महीने तक डॉक्टर्स व स्टाफ ने की देखभाल

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: मेडिकल कॉलेज रतलाम के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) की टीम ने 600 ग्राम के अत्यंत कमजोर नवजात को नया जीवन देकर एक और मिसाल पेश की है। यह बच्चा, जिसे जन्म के तुरंत बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुका है। घर जाते वक्त डॉक्टरों को धन्यवाद देते हुए बच्चे की मां संगीता की आंखें भी भर आई। वहीं पिता वीरेंद्र ने भी रतलाम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को धन्यवाद दिया। गंभीर स्थिति में हुआ था नवजात का जन्म31 अगस्त 2024 को संगीता पति वीरेंद्र को उच्च रक्तचाप और पैरों में सूजन की शिकायत के चलते मेडिकल कॉलेज रतलाम में भर्ती किया गया। चिकित्सीय आपात स्थिति को देखते हुए समय से पूर्व उनकी डिलीवरी करवाई गई। जन्म के समय नवजात का वजन मात्र 600 ग्राम था और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। पति वीरेंद्र ने बताया की जब बच्चे का जन्म हुआ तो हमने आशा छोड़ दी थी कि यह जिंदा रहेगा। मगर डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के लोगों ने हमसे ज्यादा समय हमारे बच्चे को दिया। उसकी देखभाल की। जिससे आज 3 महीने बाद हमारा बच्चा स्वस्थ है। इसके लिए में डॉक्टरों का जीवनभर आभारी रहूंगा। एसएनसीयू टीम ने संभाली जिम्मेदारीनवजात को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती किया गया, जहां बच्चे की धीमी धड़कन और सांस की समस्या के कारण वेंटिलेटर पर रखा गया। जीवनरक्षक दवाओं और विशेषज्ञ देखभाल से नवजात की स्थिति धीरे-धीरे स्थिर हुई। सात दिनों के गहन उपचार के बाद बच्चे को वेंटिलेटर से हटाया गया। हालांकि, इस दौरान उसका वजन घटकर 480 ग्राम हो गया।  कंगारू मातृ देखभाल से बढ़ाया वजनडॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने माता को “कंगारू मातृ देखभाल” के तहत बच्चे को नियमित देखभाल और उचित पोषण दिया। 93 दिनों के सतत प्रयासों और विशेषज्ञ निगरानी से बच्चे का वजन बढ़ाकर 1 किलो 200 ग्राम किया गया। कंगारू मातृ देखभाल में, नवजात बच्चे या विशेष रुप से ऐसे बच्चे जिनका जन्म समय-पूर्व होता है। उनकी देखरेख की विशेष तकनीक है, जिसमें नवजात शिशु की देखभाल उसके माता-पिता अथवा अभिभावक त्वचा से त्वचा के स्पर्श द्वारा करते हैं। डिस्चार्ज पर परिवार ने व्यक्त किया आभारडिस्चार्ज के समय नवजात पूरी तरह स्वस्थ था। बच्चे की मां और परिजनों ने एसएनसीयू की टीम, विशेष रूप से डॉ. देवेंद्र नरगावे, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. प्राची मट्टा और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ. एम.एल. बर्मन ने भी समय-समय पर मार्गदर्शन किया।  एसएनसीयू टीम की सफलताएसएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र नरगावे ने बताया कि यह सफलता टीम के अथक प्रयास और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का परिणाम है। मेडिकल कॉलेज रतलाम की एसएनसीयू इकाई नवजात शिशुओं की देखभाल में एक मिसाल बनती जा रही है।

Ratlam News: बालम ककड़ी खाने से परिवार हुआ फूड प्वाइजनिंग का शिकार, 5 वर्षीय बालक की मौत, रखे ये सावधानियां

रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं, रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा होता है उत्पादन, खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: रतलाम के जड़वासा कलां गांव में कथित तौर पर बालम ककड़ी खाने से एक ही परिवार के पांच लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए, जिसमें 5 वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। माता-पिता और दो बेटियां मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला फूड प्वाइजनिंग का दिखाई दे रहा है, जिसकी वजह से पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ी। जानकारी के अनुसार परिवार ने बालम ककड़ी खाई थी, जो सीजन में मिलने वाला एक स्थानीय फल है। परिवार के सदस्य  मांगीलाल पाटीदार ने अपनी पत्नी कविता, बेटियां दक्षिता, साक्षी और बेटे क्रियांश के साथ बालम ककड़ी खाई थी। रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रतलाम के मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां 5 वर्षीय क्रियांश की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों का इलाज जारी है। मृतक बालक के चाचा रवि पाटीदार ने बताया कि मांगीलाल तीन दिन पहले सैलाना-धामनोद रोड से बालम ककड़ी खरीदकर लाए थे। परिवार के सभी सदस्यों ने इसे एक साथ खाया, जिसके बाद यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। परिवार के इंकार के बाद मृतक बालक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका, इसलिए मृत्यु की असल वजह स्पष्ट नहीं हो पाई, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह फूड प्वाइजनिंग का मामला हो सकता है। फिलहाल, पिता की हालत में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि मां और दोनों बेटियों का इलाज मेडिकल कॉलेज में जारी है। कीटनाशक भी हो सकती है वजहरतलाम मेडिकल कॉलेज के ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया कि पांचों मरीज फूड पॉइजनंग के कारण बीमार होकर आए थे। सही इलाज मिलने में लंबा गैप होने से भी स्थिति बिगड़ी। क्रियांश का ब्लड सैम्पल लिया है, जांच करवाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत फूड पॉइजनिंग से हुई है। मां और दो बेटियों को इलाज किया जा रहा है। पुलिस चौकी को इन्वेस्टिगेशन के लिए लिखकर दिया था। वहीं, पुलिस चौकी प्रभारी सुनील राघव ने बताया कि फिलहाल इस तरह का मामला नहीं आया है। जानकारी आएगी तो पड़ताल की जाएगी। विशेषज्ञों की माने तो बच्चे की मौत को सीधे तौर पर बालम ककड़ी का इफेक्ट नहीं मान सकते। इसकी पैदावार में पेस्टीसाइट्स का उपयोग किया जाता है। हो सकता है कि परिवार ने खाने से पहले ककड़ी को अच्छी तरह धोया नहीं होगा। उल्टी-दस्त के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी आ जाती है, इससे भी मौत हो सकती है। रखे ये सावधानीबालम ककड़ी या साधारण ककड़ी/खीरा खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी है। ककड़ी का कच्चा फल जहरीला होता है, खाने से बीमार हो सकते हैं। ककड़ी को बेल से तोड़कर सीधे नहीं खाना चाहिए। ककड़ी पर कीट से बचाने के लिए जिन कीटनाशक का प्रयोग होता है, उनका असर 5 से 6 दिनों तक नहीं जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का छिडकाव करने के 1 से 2 दिन में अगर फसल बेचते है तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। जब भी आप ककड़ी ले उसे पानी से अच्छे से साफ कर ले और उसके छिलके उतार कर ही खाएं। गर्म पानी में नमक डालकर उसमें भी कुछ देर रख सकते है।रात में ककड़ी नहीं खानी चाहिए। इससे पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। ककड़ी के सेवन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। ककड़ी को पकाने की सलाह नही ं दी जाती क्योंकि इसमें पानी ज्यादा मात्रा में होता है। भोजन के साथ ककड़ी खा रहे हैं तो ज्यादा मात्रा में न खाएं। बालम ककड़ी क्या है?बालम ककड़ी एक फल है। यह लौकी जैसी दिखती है। पकने पर अंदर से केसरिया रंग की हो जाती है। इसलिए इसे केसरिया बालम ककड़ी भी कहते हैं। यह स्वाद में हल्की मीठी होती है। इसमें पानी की भरपूर मात्रा होती है। रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। इसके अलावा बालम ककड़ी की पैदावार सबसे ज्यादा झाबुआ और धार जिलों में होती है। सैलाना क्षेत्र में उगने वाली बालम ककड़ी का स्वाद और आकार सबसे अच्छा होता है। इसकी मांग देश में दूर – दूर तक है।

Govinda injured: बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा के घुटने में लगी गोली, ICU में भर्ती, हालत खतरे से बाहर

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता गोविंदा (Actor Govinda) के साथ एक दुर्घटना हो गई, जिसमें उनके घुटने में गोली लग गई। यह घटना मंगलवार सुबह करीब 4.45 बजे हुई, जब वे अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर को साफ कर रहे थे। गलती से रिवॉल्वर उनके हाथ से गिर गई और गोली सीधे उनके घुटने में लग गई। घटना के तुरंत बाद, गोविंदा को मुंबई के Criti Care अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक उनके पैर से गोली निकाल दी। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें ICU में रखा गया है। अस्पताल से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन गोविंदा के परिवार ने बताया है कि वे जल्द ही इस बारे में जानकारी देंगे। गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने बताया कि घटना के समय गोविंदा कोलकाता जाने की तैयारी कर रहे थे। उनकी पत्नी सुनीता पहले से ही कोलकाता में थीं। रिवॉल्वर साफ करते वक्त यह हादसा हुआ। उनकी बेटी इस वक्त अस्पताल में उनके साथ मौजूद है और उन्हें अगले दो दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। इस घटना के समय गोविंदा की पत्नी सुनीता मुंबई में नहीं थीं, लेकिन अब उन्हें इस घटना की जानकारी दे दी गई है और वे जल्द ही मुंबई लौट रही हैं। गौरतलब है कि गोविंदा इस साल मार्च में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे। उनके फैन्स और बॉलीवुड से जुड़े लोग उनकी जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

Dengue से बचाव: बकरी के दूध की डिमांड अचानक क्यों बढ़ी, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी में इन बातों का रखे ध्यान, क्या कहते है एक्सपर्ट!

विशेषज्ञों की सलाह: डेंगू (Dengue) के घरेलू उपचार में सतर्क रहें, डॉक्टर की सलाह से ही करे घरेलू उपाय!, इन बातों को ध्यान रख बच सकते है आप… पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। बारिश के मौसम के साथ डेंगू (Dengue) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देशभर में डेंगू से बचाव और इलाज के लिए लोग घरेलू उपचारों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गिलोय, पपीते के पत्ते और बकरी का दूध प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इन नुस्खों का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दे रहे हैं। रतलाम मेडिकल कॉलेज (GMC Ratlam) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सोहन मंडलोई (Dr. Sohan Mandloi) के अनुसार “डेंगू बुखार के दौरान पपीते के पत्ते और गिलोय जैसे घरेलू नुस्खे कुछ हद तक लाभकारी हो सकते हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपेन और फ्लेवोनोइड्स प्लेटलेट काउंट बढ़ाने और इम्युनिटी को सुधारने में सहायक माने जाते हैं, लेकिन इनका असर वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। इसके साथ ही अधिक मात्रा में इनका सेवन नुकसानदायक हो सकता है, जिससे मतली और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।” इस तरह के कई पेशेंट हमारे पास आते है, जो घर पर इलाज शुरू कर देते है और बाद में उन्हें दोगुनी मार झेलना पड़ती है। बकरी के दूध की मांग बढ़ीडेंगू के इलाज के लिए बकरी के दूध (Got Milk in dengue) की मांग में भी तेजी देखी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, बकरी के दूध में सेलेनियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं और यह गाय के दूध के मुकाबले आसानी से पचने योग्य होता है। इसके चलते कई लोग इसे डेंगू से निपटने के लिए बेहतर मानते हैं। डॉ. सोहन मंडलोई का कहना है की “बकरी का दूध इम्युनिटी बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे डेंगू के मुख्य इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह केवल सहायक हो सकता है, न कि इसके जरिए डेंगू का इलाज किया जा सकता है।” हर्बल ट्रीटमेंट के बारे में चेतावनीडॉ. मंडलोई ने यह भी चेतावनी दी कि घरेलू नुस्खों और हर्बल उपचारों को मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं माना जा सकता। “गिलोय और पपीते के पत्ते जैसी औषधियां इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकती हैं, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।” डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी तरह के घरेलू उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें और डेंगू जैसे गंभीर मामलों में मेडिकल देखरेख को प्राथमिकता दें। लक्षण गंभीर होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

Dehradun: 7 महीने के बच्चे के पेट में भ्रूण मिलने का दुर्लभ मामला, डॉक्टर भी हुए हैरान

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। देहरादून (Dehradun) के स्वामी हिमालयन मेडिकल कॉलेज में एक अत्यंत दुर्लभ मामला सामने आया है, जहां 7 महीने के बच्चे के पेट में भ्रूण पाया गया। माता-पिता को बच्चे का पेट अचानक फूलता दिखने पर शक हुआ और उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों को लगा कि यह पेट में गांठ का मामला है, लेकिन एक्स-रे रिपोर्ट से पता चला कि बच्चे के पेट में भ्रूण विकसित हो रहा था। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार फीटस-इन-फीटू (Fetus in Fetu) नामक यह स्थिति अत्यधिक दुर्लभ होती है, जिसमें एक भ्रूण दूसरे भ्रूण के भीतर विकसित होने लगता है। डॉक्टर संतोष सिंह के अनुसार, इस तरह के मामले लाखों में से एक बार ही देखने को मिलते हैं। बच्चे का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। क्या है फीटस-इन-फीटू?फीटस-इन-फीटू मानव भ्रूण विकास की एक असामान्य और दुर्लभ स्थिति है। यह लगभग 5,00,000 में से एक गर्भावस्था में होता है, जिसमें भ्रूण के भीतर एक और भ्रूण विकसित होने लगता है। इस स्थिति का पता अक्सर जन्म के बाद ही चल पाता है, जब बच्चे के पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ता है।

Ratlam News: रतलाम में पहली ऑनलाइन मेडिकल शॉप 3 अक्टूबर से होगी शुरू, 10% डिस्काउंट, फ्री डिलवरी और फ्री चेकअप भी

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। रतलाम (Ratlam) में अब दवाइयों की होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। शहर की पहली ऑनलाइन मेडिकल शॉप ‘तत्काल मेडिकल सर्विसेस’ का शुभारंभ 3 अक्टूबर, गुरुवार को किया जाएगा। इस सेवा के तहत लोग अपने घर बैठे ही दवाइयां मंगवा सकेंगे। इसके लिए वे 9630401104 पर कॉल या व्हाट्सएप के जरिए ऑर्डर कर सकते हैं। खास बात यह है की 10 प्रतिशत डिस्काउंट इसमें दिया जाएगा। तत्काल मेडिकल सर्विसेस रतलाम के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। फ्री होम डिलीवरी और अन्य सुविधाएंतत्काल मेडिकल सर्विसेस दवाइयों की होम डिलीवरी निशुल्क करेगी और दवाइयों पर 10 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी। इसके अलावा, मरीजों के लिए घर बैठे फ्री ईसीजी, शुगर और ब्लड प्रेशर जांच की सुविधा भी उपलब्ध होगी। मरीज के लिए घर पर आकर ब्लड और यूरिन सैंपल कलेक्ट की सुविधा भी फ्री रहेगी। मरीजों को दवाई और डॉक्टर संबंधी रिमाइंडर के लिए फ्री मेसेजिंग सुविधा भी प्रदान की जाएगी। साथ ही अन्य मेडिकल इमरजेंसी सेवाएं भी तत्काल मेडिकल सर्विसेस के तहत उपलब्ध होंगी। दवाइयों के ऑर्डर के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन होना अनिवार्य है। बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां नहीं दी जाएंगी। उपभोक्ताओं को अपना पता दर्ज कराना होगा, जिसके बाद एक पासकोड जारी किया जाएगा। इस पासकोड को डिलीवरी के समय बताना होगा। ऑर्डर की पूरी राशि पहले ही उपभोक्ताओं को बता दी जाएगी, और उनकी सहमति के बाद ही दवाइयां डिलीवर की जाएंगी। दवाइयों का भुगतान उपभोक्ता ऑनलाइन या कैश दोनों माध्यमों से कर सकते हैं।