Rule Change: आधार से LPG तक… 1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Rule Change From July 2026: 1 जुलाई से आधार अपडेट, LPG कीमत, CNG-PNG दरें, HDFC क्रेडिट कार्ड नियम और बैंक छुट्टियों समेत 5 बड़े बदलाव लागू होंगे। जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Rule Change: जून 2026 खत्म होने वाला है और नए महीने की शुरुआत के साथ कई महत्वपूर्ण वित्तीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं। 1 जुलाई 2026 से आधार कार्ड अपडेट, LPG गैस सिलेंडर की कीमतों, CNG-PNG दरों, क्रेडिट कार्ड सुविधाओं और बैंक छुट्टियों से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इन बदलावों का असर सीधे आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ने वाला है। ऐसे में हर नागरिक के लिए इन नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। आधार कार्ड अपडेट होगा मुफ्त भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार धारकों को बड़ी राहत दी है। नए निर्देशों के अनुसार, जिन लोगों की ईमेल आईडी आधार कार्ड में अपडेट नहीं है, वे 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक इसे मुफ्त में अपडेट करा सकेंगे। पहले इस सेवा के लिए 75 रुपये शुल्क देना पड़ता था। UIDAI का उद्देश्य अधिक से अधिक आधार धारकों की जानकारी को अपडेट और सुरक्षित बनाना है। किसे मिलेगा फायदा? LPG सिलेंडर की कीमतों में हो सकता है बदलाव हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। जून में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 53.50 रुपये तक बढ़ाए गए थे, जबकि 5 किलो वाले सिलेंडर में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में 1 जुलाई को घरेलू और कमर्शियल LPG की कीमतों में बदलाव की संभावना बनी हुई है। CNG, PNG और ATF की दरें भी बदल सकती हैं सरकार स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी वजह से CNG और PNG की कीमतों की भी नियमित समीक्षा की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF), CNG और PNG की कीमतों में संशोधन हो सकता है। यदि कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन और हवाई यात्रा महंगी हो सकती है, जबकि कमी आने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। HDFC Bank Credit Card Rules में बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2026 से HDFC Bank के Regalia Gold Credit Card धारकों के लिए एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नियम बदल जाएंगे। नई नीति के अनुसार, ग्राहकों को अगली तिमाही में मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज सुविधा का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करना अनिवार्य होगा। नए नियम का असर जुलाई में 12 दिन बंद रह सकते हैं बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अवकाश कैलेंडर के अनुसार जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में बैंक लगभग 12 दिनों तक बंद रह सकते हैं। इनमें रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार सहित कुल 6 साप्ताहिक अवकाश शामिल हैं। वहीं कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण अतिरिक्त छुट्टियां रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को बैंकिंग कार्य पहले से निपटाने की सलाह दी जा रही है।

डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए? जानिए कब करें शिकायत और कैसे वापस मिल सकता है आपका पैसा

डिजिटल धोखाधड़ी होने पर कितने समय में शिकायत करनी चाहिए? बैंक, साइबर क्राइम पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने का तरीका जानें। RBI के नियमों के अनुसार पैसा वापस मिलने की पूरी प्रक्रिया समझें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेक। देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं। यूपीआई, नेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि आपकी एक छोटी सी देरी लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। डिजिटल धोखाधड़ी होने के बाद सबसे पहले क्या करें? यदि आपके खाते से बिना अनुमति के पैसा कट जाता है या किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक को इसकी जानकारी दें। बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग सेवाओं को तुरंत ब्लॉक करवाएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने पर संबंधित एजेंसियां संदिग्ध ट्रांजैक्शन को फ्रीज करने का प्रयास कर सकती हैं। कितने समय में करनी चाहिए शिकायत? विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल फ्रॉड की शिकायत 24 से 48 घंटे के भीतर करना सबसे प्रभावी माना जाता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत यदि ग्राहक पांच दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर देता है तो उसे “Zero Liability” यानी शून्य जिम्मेदारी का लाभ मिल सकता है। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, पैसे की रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी। देर होने पर धोखेबाज राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे जांच और रिकवरी मुश्किल हो जाती है। RBI के नियम: कितना पैसा वापस मिलेगा? शून्य जिम्मेदारी अगर धोखाधड़ी बैंक की तकनीकी गड़बड़ी, सिस्टम फेलियर या किसी तीसरे पक्ष की गलती से हुई है और ग्राहक ने पांच दिनों के भीतर शिकायत कर दी है, तो पूरी राशि वापस मिलने की संभावना रहती है। सीमित जिम्मेदारी यदि शिकायत कुछ देरी से, आमतौर पर 4 से 7 दिनों के भीतर दर्ज की जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित हो सकती है। ऐसे मामलों में बैंक नियमों के अनुसार आंशिक या सीमित राहत दे सकता है। पूरी जिम्मेदारी यदि ग्राहक ने खुद OTP, PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा की हो, फर्जी लिंक पर क्लिक किया हो या शिकायत दर्ज करने में अत्यधिक देरी की हो, तो नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है और पैसा वापस मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है। अपने अकाउंट को ऐसे रखें सुरक्षित शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें? यदि बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो आप बैंक के शिकायत निवारण सेल या RBI के बैंकिंग लोकपाल के पास अपील कर सकते हैं। बड़ी रकम की धोखाधड़ी होने पर पुलिस में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है, ताकि कानूनी कार्रवाई के साथ आपकी रिकवरी की संभावना मजबूत हो सके।

El Niño Alert: 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश का खतरा, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाई विशेष मॉनिटरिंग सेल

El Niño Alert के बीच केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर है। 12 राज्यों के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मॉनिटरिंग सेल गठित कर राज्यों को तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। El Niño Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के बढ़ते संकेतों के बीच केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हालात की समीक्षा करते हुए राज्यों को जरूरी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। 315 जिलों में कम बारिश की आशंका, 111 जिले सबसे संवेदनशील कृषि मंत्रालय की समीक्षा बैठक में सामने आया कि देश के करीब 315 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। इनमें से 111 जिलों को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं सीमित होने के कारण फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में कई इलाकों में सामान्य औसत की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इससे खरीफ सीजन की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश समेत 12 राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा अल नीनो का प्रभाव मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में अधिक देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में कृषि गतिविधियां काफी हद तक मानसून पर निर्भर हैं, इसलिए कम बारिश किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। कृषि मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे पहले से तैयार आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) को तुरंत लागू करें और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करें। शिवराज सिंह चौहान ने बनाई विशेष मॉनिटरिंग सेल कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव की लगातार निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप को सक्रिय किया गया है। ये टीमें मौसम, फसल और जल उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगी और समय-समय पर राज्यों को आवश्यक सलाह देंगी। जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों पर जोर सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है। तालाब, चेक डैम, खेत-तालाब और अन्य जल संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने और फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी गई है। किसानों से अपील: जल्दबाजी में न करें बुवाई कृषि मंत्रालय ने किसानों से अपील की है कि पर्याप्त बारिश होने तक बुवाई की जल्दबाजी न करें। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक मौसम आधारित सलाह पहुंचाई जाएगी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अभी खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर शुरू नहीं हुई है, इसलिए अगले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार का भरोसा सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाद्य सुरक्षा पर किसी भी तरह का संकट नहीं आने दिया जाएगा। हालांकि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसानों और कृषि उत्पादन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

PhonePe New Rule: 1 साल तक Wallet इस्तेमाल नहीं किया तो कटेंगे ₹100! जानिए नया नियम और किन यूजर्स पर पड़ेगा असर

PhonePe New Rule: PhonePe ने Wallet से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 365 दिनों तक PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करने पर यूजर्स से ₹100 तक की Inactivity Maintenance Fee वसूली जाएगी। जानिए पूरा नया नियम। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PhonePe New Rule: अगर आप PhonePe का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe ने अपने Wallet से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार, जो यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनसे ₹100 तक की Inactivity Maintenance Fee वसूली जा सकती है। कंपनी के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है और कई यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताई है। क्या है PhonePe का नया नियम? PhonePe द्वारा जारी नई Wallet Guidelines के मुताबिक, यदि कोई यूजर लगातार 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet से कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं करता है, तो उसका Wallet Inactive माना जाएगा। ऐसी स्थिति में कंपनी Maintenance Fee के रूप में ₹100 तक का शुल्क वसूल सकती है। हालांकि, यह नियम केवल PhonePe Wallet पर लागू होगा। UPI के जरिए भुगतान करना या सिर्फ ऐप खोलना Wallet Activity नहीं माना जाएगा। किन यूजर्स पर लगेगा ₹100 का चार्ज? यह शुल्क केवल उन यूजर्स पर लागू होगा जिन्होंने: अगर यूजर Wallet के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन कर देता है, तो Wallet फिर से Active माना जाएगा और शुल्क नहीं लगेगा। फीस काटने से पहले मिलेगा अलर्ट PhonePe ने स्पष्ट किया है कि शुल्क लगाने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले नोटिफिकेशन या मैसेज भेजा जाएगा। इसके जरिए यूजर को Wallet एक्टिव करने का मौका मिलेगा। यदि Wallet में ₹100 या उससे अधिक राशि मौजूद है तो कंपनी ₹100 काट सकती है। वहीं, यदि Wallet में ₹100 से कम बैलेंस है, तो उपलब्ध पूरी राशि काटी जा सकती है। हालांकि Wallet बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा। क्यों लिया गया यह फैसला? डिजिटल वॉलेट कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय खातों के रखरखाव पर खर्च होने वाले संसाधनों को लेकर चिंतित रही हैं। ऐसे में कई फिनटेक कंपनियां Inactive Wallets के लिए Maintenance Charge लागू करती हैं। PhonePe का कहना है कि यह शुल्क केवल निष्क्रिय Wallets के प्रबंधन के लिए लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रिया PhonePe के इस नए नियम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कुछ लोगों का कहना है कि लंबे समय तक Wallet का उपयोग न करने पर चार्ज लगाना ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है, जबकि कुछ यूजर्स इसे सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया बता रहे हैं।

Gold-Silver Rate Crash: दो दिन में ₹22,000 टूटी चांदी, सोना भी हुआ धड़ाम; खरीदारी का सुनहरा मौका?

Gold-Silver Rate Crash: सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट। दो दिन में चांदी ₹22,000 प्रति किलो और सोना ₹7,600 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हुआ। जानिए गिरावट की वजह और ताजा रेट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Gold-Silver Rate Crash: सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जबरदस्त टूट दर्ज की गई, जबकि सोना भी हजारों रुपये सस्ता हो गया। दो दिनों के भीतर चांदी करीब ₹22,000 प्रति किलो और सोना ₹7,600 से अधिक प्रति 10 ग्राम तक फिसल चुका है। खुलते ही ₹8,000 से ज्यादा टूटी चांदी MCX पर 3 जुलाई एक्सपायरी वाली चांदी गुरुवार को ₹2,37,572 प्रति किलो पर बंद हुई थी। शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही इसका भाव गिरकर ₹2,29,561 प्रति किलो पर पहुंच गया। यानी एक ही झटके में चांदी ₹8,011 प्रति किलो सस्ती हो गई। अगर पिछले दो दिनों की बात करें तो बुधवार को चांदी ₹2,51,807 प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहां से शुक्रवार तक इसमें कुल ₹22,246 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। Gold Rate Crash: सोना भी हुआ हजारों रुपये सस्ता चांदी की तरह सोने की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। 5 अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट गोल्ड का भाव शुक्रवार को गिरकर ₹1,46,252 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह गुरुवार के बंद भाव ₹1,49,309 प्रति 10 ग्राम से ₹3,057 कम है। वहीं 17 जून को सोने का भाव ₹1,53,879 प्रति 10 ग्राम था। इस हिसाब से दो कारोबारी दिनों में सोना ₹7,627 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। रिकॉर्ड हाई से कितना नीचे आया सोना? इस साल जनवरी में सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया था। वायदा बाजार में सोने का भाव पहली बार ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा था और इसका हाई लेवल ₹2,04,375 दर्ज किया गया था। वर्तमान कीमत की तुलना करें तो सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब ₹58,123 प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है। इससे निवेशकों और खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। अचानक क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका का केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) है। फेडरल रिजर्व ने अपनी जून 2026 की बैठक में ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। हालांकि अधिकारियों ने बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताई है और भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ने पर निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों से दूरी बनाते हैं, जिससे इनकी कीमतों पर दबाव आता है। निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या है संकेत? सोना और चांदी में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन शादी-ब्याह या निवेश के लिए खरीदारी करने वालों के लिए यह राहत भरी खबर है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेड की नीतियों के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल, सोना और चांदी दोनों अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जिससे बाजार में खरीदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

EPFO Good News: अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा! 7 करोड़ कर्मचारियों को जून में मिल सकती है बड़ी सुविधा

PF EPFO Good News: Withdrawal via UPI और ATM की सुविधा शुरू कर सकता है। श्रम मंत्रालय के अनुसार जून 2026 के अंत तक 7 करोड़ से अधिक EPFO सदस्यों को यह बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। EPFO Good News: देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही ऐसी सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिससे पीएफ खाते में जमा राशि को ATM और UPI के जरिए निकाला जा सकेगा। श्रम मंत्रालय के मुताबिक यह सुविधा जून महीने के अंत तक शुरू हो सकती है, जिससे करीब 7 करोड़ EPFO सदस्यों को सीधा लाभ मिलेगा। PF Withdrawal Via UPI-ATM: क्या है नई सुविधा? श्रम मंत्रालय द्वारा जारी अपडेट के अनुसार, EPFO की नई डिजिटल व्यवस्था अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 2.01 सर्वर पूरी तरह सक्रिय होते ही सदस्य अपने PF खाते से राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे और फिर ATM के माध्यम से नकदी निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के जरिए भी PF निकासी की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी। इससे कर्मचारियों को बार-बार EPFO कार्यालय जाने या लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने पहले ही दिए थे संकेत केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने मई में ही इस सुविधा के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार EPFO को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि कर्मचारियों को अपना पैसा निकालने के लिए किसी तरह की परेशानी न हो। मंत्री के अनुसार, डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद PF निकासी पहले की तुलना में अधिक तेज, सरल और पारदर्शी हो जाएगी। कितनी होगी UPI से PF निकालने की लिमिट? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, UPI या ATM के जरिए निकासी की सीमा सदस्य के कुल PF बैलेंस के लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि अंतिम नियम और सीमा EPFO द्वारा आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी। PF खाते को UPI से जोड़ने के लिए क्या जरूरी होगा? नई सुविधा का लाभ लेने के लिए EPFO सदस्यों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी: जरूरी दस्तावेज और शर्तें जानकारी के अनुसार, EPFO पोर्टल और UMANG ऐप पर जल्द ही “Link PF with UPI” या “PF Withdrawal via UPI” जैसा नया विकल्प दिखाई दे सकता है। इसके जरिए Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM जैसी UPI सेवाओं को PF खाते से जोड़ा जा सकेगा। कब निकाल सकते हैं पूरा PF पैसा? EPFO नियमों के अनुसार कर्मचारी 55 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के बाद पूरा PF फंड निकाल सकते हैं। इसके अलावा विकलांगता, नौकरी छूटने, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, विदेश में स्थायी रूप से बसने या अन्य विशेष परिस्थितियों में भी पूरा PF अमाउंट निकालने की अनुमति मिलती है।

MP News: कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप! दो TI समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR, 30 मिनट की कार्रवाई पर उठे सवाल

MP News: राजस्थान की चौमहला कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश पुलिस के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज हुई है। 30 मिनट में की गई मादक पदार्थ जब्ती कार्रवाई को कोर्ट ने संदिग्ध माना। मध्यप्रदेश- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश पुलिस पर बड़ी कार्रवाई हुई है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट के आदेश के बाद एमपी पुलिस के दो थाना प्रभारियों (TI) समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के डग थाना क्षेत्र में की गई मादक पदार्थों की जब्ती कार्रवाई से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के आगर मालवा की कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी। पुलिस ने दावा किया था कि कार्रवाई के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य का मादक पदार्थ (एमडी), स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम और हथियार बरामद किए गए। हालांकि आरोप है कि इस कार्रवाई की पूरी जानकारी स्थानीय डग पुलिस को नहीं दी गई। केवल फोन पर महिलाओं द्वारा अभद्रता किए जाने की सूचना दी गई, लेकिन छापेमारी की सही जगह और सहायता की आवश्यकता के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई। कोर्ट ने क्यों माना कार्रवाई को संदिग्ध? गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि एमपी पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए गांव में प्रवेश किया, घरों में तोड़फोड़ की और उनके परिवार को झूठे मामले में फंसा दिया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार: 30 मिनट में पूरी कार्रवाई पर सवाल इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने कार्रवाई को संदिग्ध मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। किन पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला? कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट, पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा, शुभम सहित पूरी टीम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 10 लाख रुपये मांगने का भी आरोप परिवादी हमीद खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की थी। रुपये देने में असमर्थता जताने पर उनके परिवार के दो सदस्यों शाहिर खान और मनोवर खान को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मादक पदार्थों का मामला दर्ज कर दिया गया। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके घरों की तलाशी में केवल एक लाइसेंसशुदा बंदूक, एक एयर गन और सात मोबाइल फोन मिले थे। किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। अब आगे क्या? राजस्थान में दर्ज हुई यह एफआईआर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। दोनों राज्यों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पुलिस कार्रवाई और एनडीपीएस मामलों की जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

ट्रेन में सीट नहीं मिली तो युवक ने फैलाई बम की अफवाह, रेलवे स्टेशन पर मचा हड़कंप; जांच के बाद गिरफ्तार

लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना फैला दी। सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तलाशी ली, जांच में मामला फर्जी निकला। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लखनऊ- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर एक युवक की हरकत से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन में सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना दे दी। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई और ट्रेन की सघन जांच शुरू कर दी गई। सीट नहीं मिलने पर फैलाई बम की अफवाह पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना निवासी 26 वर्षीय युवक ट्रेन से सफर करने के लिए ऐशबाग रेलवे स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उसे सीट नहीं मिल सकी। इसी बात से नाराज होकर उसने ट्रेन में बम रखे होने की झूठी सूचना फैला दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल ट्रेन को रोककर सभी डिब्बों की बारीकी से जांच शुरू कर दी। यात्रियों में मची अफरा-तफरी बम की सूचना फैलते ही यात्रियों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्रियों को एहतियात के तौर पर ट्रेन से नीचे उतारा गया। स्टेशन परिसर और ट्रेन के प्रत्येक कोच की गहन तलाशी ली गई। घंटों चली जांच के बाद भी किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रेन को सुरक्षित घोषित कर आगे के लिए रवाना कर दिया। पूछताछ में सामने आई सच्चाई जांच के दौरान पुलिस ने सूचना देने वाले युवक की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि सीट नहीं मिलने के कारण उसने गुस्से में आकर बम की झूठी सूचना दी थी। जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने दी चेतावनी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बम जैसी झूठी सूचनाएं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती हैं और आपातकालीन संसाधनों का अनावश्यक उपयोग करवाती हैं। इससे यात्रियों में भय का माहौल बनता है और प्रशासन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी केवल सत्यापित आधार पर ही संबंधित एजेंसियों को दें।

E20 Petrol Insurance Claim: E20 पेट्रोल डलवाने पर रिजेक्ट हो जाएगा इंश्योरेंस क्लेम? बढ़े विवाद के बाद कंपनी ने दी बड़ी सफाई

E20 Petrol Insurance Claim को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है? ICICI Lombard ने जारी की नई सफाई, जानिए पूरी सच्चाई। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। E20 Petrol Insurance Claim: देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 Fuel) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसी बीच वाहन मालिकों के बीच एक नया डर पैदा हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंजन या अन्य पार्ट्स को नुकसान होता है तो क्या इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है? इस मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बाद ICICI Lombard ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। क्या था पूरा विवाद? हाल ही में ICICI Lombard द्वारा जारी किए गए एक FAQ (Frequently Asked Questions) में कहा गया था कि यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी में ऐसा ईंधन इस्तेमाल करता है जिसके लिए वाहन डिजाइन नहीं किया गया है, तो इसे गलत उपयोग या लापरवाही माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम की समीक्षा अलग तरीके से की जा सकती है। इसके अलावा FAQ में यह भी बताया गया था कि मोटर इंश्योरेंस पॉलिसियां आमतौर पर ऐसे नुकसान को कवर नहीं करतीं जो धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होते हैं, जैसे ईंधन से होने वाला रासायनिक क्षरण या इंजन के अंदरूनी हिस्सों की खराबी। पुरानी गाड़ियों के मालिकों में बढ़ी चिंता इस जानकारी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। खासकर उन वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई जिनकी गाड़ियां E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। लोगों को डर था कि कहीं E20 पेट्रोल भरवाने के कारण भविष्य में उनका इंश्योरेंस क्लेम खारिज न कर दिया जाए। ICICI Lombard ने दी नई सफाई विवाद बढ़ने के बाद ICICI Lombard ने नया स्पष्टीकरण जारी करते हुए ग्राहकों को आश्वस्त किया। कंपनी ने स्पष्ट कहा कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी अमान्य नहीं होगी। कंपनी के अनुसार, E20 पेट्रोल का उपयोग करना किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं माना जाएगा। यह सरकार की पर्यावरण-अनुकूल पहल का हिस्सा है और कंपनी केवल ईंधन के प्रकार के आधार पर किसी क्लेम को रिजेक्ट नहीं करती। क्लेम मंजूर होने का आधार क्या है? कंपनी ने कहा कि किसी भी मोटर इंश्योरेंस क्लेम का फैसला मुख्य रूप से दुर्घटना, चोरी या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के आधार पर किया जाता है। यदि कोई क्लेम सामान्य पेट्रोल या डीजल के इस्तेमाल के दौरान मान्य होता है, तो वही क्लेम E20 पेट्रोल के उपयोग की स्थिति में भी वैध रहेगा। हालांकि, सामान्य इंश्योरेंस नियमों के अनुसार धीरे-धीरे होने वाली मैकेनिकल खराबी या सामान्य घिसावट अब भी पॉलिसी कवरेज से बाहर रह सकती है। E20 Fuel क्या है? E20 फ्यूल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। कई नए वाहन पहले से ही E20-रेडी तकनीक के साथ बाजार में उपलब्ध हैं।

CIBIL Score 730 से कम? RBI के नए ECL नियम के बाद होम, कार और एजुकेशन लोन लेना हो सकता है बेहद मुश्किल

RBI का नया Expected Credit Loss (ECL) Framework 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। जानिए क्यों CIBIL Score 730 से कम होने पर होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, RBI का नया ECL Framework: CIBIL Score 730 से कम होने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें अगर आपका CIBIL Score 730 से कम है और आप भविष्य में होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से नया Expected Credit Loss (ECL) Framework लागू करने जा रहा है, जिसके बाद बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकती है। क्या है RBI का Expected Credit Loss (ECL) Framework? वर्तमान व्यवस्था में बैंक तब तक किसी लोन को जोखिमपूर्ण नहीं मानते, जब तक वह लंबे समय तक बकाया रहकर NPA (Non-Performing Asset) नहीं बन जाता। लेकिन ECL Framework के तहत बैंक को लोन देने से पहले ही संभावित नुकसान का आकलन करना होगा। इसका मतलब है कि बैंक ग्राहक के वित्तीय व्यवहार, भुगतान इतिहास, CIBIL Score, आय, रोजगार की स्थिरता और भविष्य में डिफॉल्ट की संभावना जैसे कई कारकों का गहन मूल्यांकन करेंगे। 730 से कम CIBIL Score वालों पर क्या होगा असर? रिपोर्ट्स के अनुसार देश के लगभग 62 प्रतिशत लोगों का CIBIL Score 730 से नीचे है। ऐसे ग्राहकों को ECL लागू होने के बाद लोन प्राप्त करने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। बैंकों को जोखिम वाले ग्राहकों के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होगी। यदि कोई ग्राहक लगातार दो EMI चूकता है, तो बैंक को उसके लिए पहले की तुलना में कई गुना अधिक प्रावधान रखना पड़ सकता है। ऐसे में बैंक कम क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को लोन देने से बच सकते हैं। महंगा हो सकता है लोन विशेषज्ञों का मानना है कि कम CIBIL Score वाले ग्राहकों को भविष्य में तीन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है: 1. लोन रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ेगी कम स्कोर वाले आवेदकों के आवेदन सीधे खारिज किए जा सकते हैं। 2. ब्याज दर ज्यादा हो सकती है यदि लोन स्वीकृत होता भी है तो बैंक अधिक जोखिम के कारण ऊंची ब्याज दर वसूल सकते हैं। 3. अतिरिक्त गारंटी की मांग कुछ मामलों में बैंक अतिरिक्त सिक्योरिटी या गारंटर की मांग भी कर सकते हैं। बैंकों पर भी पड़ेगा असर बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ECL Framework लागू होने के बाद बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। अनुमान है कि इस बदलाव से बैंकिंग उद्योग का लाभ लगभग 42,000 करोड़ रुपये तक प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना सकते हैं। क्या करें ग्राहक? यदि आप आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार का बड़ा लोन लेना चाहते हैं, तो अभी से अपना CIBIL Score सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान, कम क्रेडिट उपयोग और पुराने लोन का नियमित भुगतान आपके स्कोर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

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