Rules Change: 1 अप्रैल से बड़े बदलाव: LPG महंगा, ATM-PAN-टैक्स नियम बदलेंगे, जेब पर सीधा असर

Rules Change: 1 अप्रैल 2026 से देश में LPG, इनकम टैक्स, ATM ट्रांजैक्शन, PAN कार्ड और रेलवे टिकट नियमों में बड़े बदलाव लागू होंगे। जानिए हर बदलाव का आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Rules Change: मार्च का महीना खत्म होने के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देशभर में कई बड़े वित्तीय और रोजमर्रा से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी की जेब, बैंकिंग, टैक्स और यात्रा पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कौन-कौन से 5 बड़े बदलाव लागू होने वाले हैं— 1. LPG, ATF और CNG-PNG के दाम बदल सकते हैं हर महीने की तरह इस बार भी 1 अप्रैल को गैस सिलेंडर के नए रेट जारी हो सकते हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के चलते पहले ही LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसका असर सीधे किचन बजट और ट्रांसपोर्ट खर्च पर पड़ेगा। 2. नया इनकम टैक्स नियम लागू 1 अप्रैल से आयकर अधिनियम 2025 लागू होने जा रहा है, जो पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। इससे सैलरीड और बिजनेस दोनों टैक्सपेयर्स प्रभावित होंगे। 3. ATM नियमों में बदलाव (HDFC, PNB, Bandhan Bank) HDFC Bank Punjab National Bank Bandhan Bank ATM इस्तेमाल करने वालों को अब ज्यादा सावधानी रखनी होगी। 4. PAN कार्ड के नियम होंगे सख्त PAN Card 1 अप्रैल से PAN से जुड़े नियम कड़े हो सकते हैं— नए PAN आवेदन और अपडेट प्रक्रिया थोड़ी कठिन हो सकती है। 5. रेलवे टिकट कैंसिल करना महंगा Indian Railways रेल यात्रियों के लिए बड़ा झटका— अचानक यात्रा कैंसिल करने पर जेब पर ज्यादा बोझ पड़ेगा।

Social Media new rules: सोशल मीडिया KYC अनिवार्य? फेसबुक-इंस्टा यूजर्स के लिए बड़ा प्रस्ताव

Social Media new rules: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर KYC अनिवार्य करने की संसदीय समिति की सिफारिश, जानें क्या बदल सकता है Facebook, Instagram और अन्य ऐप्स के लिए नया नियम। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Social Media new rules: आने वाले समय में Facebook, Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति ने यह अहम सिफारिश की है। क्यों जरूरी समझा गया KYC? संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इन समस्याओं को रोकने के लिए यूजर्स की पहचान और उम्र का सत्यापन जरूरी हो गया है। समिति ने गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर KYC आधारित वेरिफिकेशन लागू किया जाए। महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा पर फोकस ‘साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा’ विषय पर पेश रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि कई मामलों में गुमनाम अकाउंट्स के जरिए महिलाओं और नाबालिगों को निशाना बनाया जाता है।ऐसे में KYC अनिवार्य होने से फर्जी अकाउंट्स पर लगाम लगाई जा सकेगी। कंपनियों के लिए भी सख्त नियम समिति ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए भी कड़े नियम सुझाए हैं: निजता पर उठ सकते हैं सवाल हालांकि, इस सिफारिश के बाद डेटा सुरक्षा और यूजर्स की निजता को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि KYC से सुरक्षा तो बढ़ेगी, लेकिन व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है। क्या बदल सकता है आपके लिए? अगर सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है, तो आने वाले समय में:

Hormuz Strait News: होर्मुज से भारत को राहत: ईरान ने दी मंजूरी, तेल-गैस लदे 20 जहाज जल्द पहुंचेंगे

Hormuz Strait News: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान ने भारत सहित 5 देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। फंसे 20 भारतीय तेल-गैस जहाजों के लौटने से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Hormuz Strait News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद वहां फंसे भारत के तेल और गैस से लदे जहाजों के देश पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। क्या है पूरा मामला? वेस्ट एशिया में युद्ध जैसे हालात के चलते दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल (Crude) और LNG की सप्लाई होती है, वहां आवाजाही बाधित होने से कई देशों की चिंता बढ़ गई थी। भारत के भी लगभग 20 जहाज इस रूट पर फंसे हुए थे। ईरान ने किन देशों को दी अनुमति ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सहित पांच मित्र देशों—चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान—के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। उनके मुताबिक, ये देश “गैर-शत्रुतापूर्ण” श्रेणी में आते हैं और इन्होंने सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान से संपर्क किया था। हालांकि अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर रोक जारी रहेगी। पहले भी मिले थे संकेत रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान पहले ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों को संदेश भेजकर सीमित आवाजाही की अनुमति देने के संकेत दे चुका था। इसमें कहा गया था कि केवल सुरक्षित और गैर-शत्रु देशों के जहाजों को ही गुजरने दिया जाएगा। भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला? शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई बड़ी कमी नहीं है और अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य बनी हुई है। क्या खत्म होगा तेल-गैस संकट? विशेषज्ञों के अनुसार, अगर स्थिति और खराब नहीं होती है और जहाज सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तो भारत में तेल-गैस की आपूर्ति जल्द स्थिर हो सकती है। हालांकि मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।

घर के पास PNG गैस तो LPG बंद! सरकार का नया नियम लागू

सरकार का बड़ा फैसला—घर के पास PNG पाइपलाइन होने पर 3 महीने में लेना होगा कनेक्शन, नहीं तो LPG सिलेंडर सप्लाई होगी बंद। जानें नए नियम और पूरी प्रक्रिया। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PNG Gas: केंद्र सरकार ने गैस वितरण को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू कर दिया है। इसके तहत जिन घरों के पास पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां अब PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। अगर किसी घर के पास पाइपलाइन होने के बावजूद कनेक्शन नहीं लिया जाता, तो पहले 3 महीने का नोटिस दिया जाएगा और उसके बाद उस पते पर LPG सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और गैस की संभावित कमी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि देश में गैस सप्लाई सुचारू बनी रहे और उपभोक्ताओं को परेशानी न हो। नए नियम की 4 बड़ी बातें 1. सोसाइटी को 3 दिन में देना होगा परमिशन अब हाउसिंग सोसायटी या RWA पाइपलाइन बिछाने में बाधा नहीं बन सकेंगी। 2. सरकारी मंजूरी में देरी नहीं 3. जमीन मालिक को मिलेगा ज्यादा मुआवजा 4. सुरक्षा और सुविधा पर जोर फायदे: नुकसान: PNG लेने पर LPG सिलेंडर करना होगा सरेंडर सरकार के नए नियम के अनुसार: किराएदार कैसे लें PNG कनेक्शन? किराएदार भी PNG कनेक्शन ले सकते हैं: मकान मालिक मना करे तो क्या होगा? अगर मकान मालिक पाइपलाइन लगाने से मना करता है, तब भी नियम लागू होगा।90 दिन बाद उस पते पर LPG सप्लाई बंद कर दी जाएगी। घर बदलने पर क्या करें?

28 दिन रिचार्ज खत्म? अब 30 दिन वैलिडिटी पर जोर, यूजर्स को सालाना बचत का मौका

मोबाइल रिचार्ज में बड़ा बदलाव! 28 दिन की जगह 30 दिन वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा, जानें कैसे साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से बचकर आपकी होगी बचत। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इससे यूजर्स को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से राहत मिल सकती है और कुल खर्च भी कम हो सकता है। 28 दिन रिचार्ज पर सरकार सख्त, 30 दिन प्लान को बढ़ावा मोबाइल यूजर्स की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को साफ संकेत दिया है कि 28 दिन की बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को प्राथमिकता दी जाए। अब कंपनियों को अपने प्लान में पारदर्शिता दिखानी होगी और यूजर्स को स्पष्ट विकल्प देने होंगे। क्यों उठाना पड़ा ये कदम? दरअसल 28 दिन का प्लान यूजर्स के लिए “छुपा हुआ अतिरिक्त खर्च” बन गया था। यह मुद्दा संसद में भी उठा, जहां इसे यूजर्स पर अतिरिक्त बोझ बताया गया। 28 दिन vs 30 दिन प्लान: समझें पूरा गणित 28 दिन प्लान: 30 दिन प्लान: गणित:365 ÷ 28 = लगभग 13 रिचार्ज365 ÷ 30 = 12 रिचार्ज अभी क्या दे रही हैं कंपनियां? देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां जैसे अभी ज्यादातर 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान ही ऑफर कर रही हैं, जिनकी कीमत ₹199 से ₹299 के बीच होती है। सरकार के नए निर्देश क्या हैं? सरकार ने कंपनियों से कहा है कि: हालांकि, प्लान की कीमत तय करने की आजादी अभी भी कंपनियों के पास रहेगी। यूजर्स के लिए क्यों जरूरी है ये बदलाव? आगे क्या बदल सकता है? अब आपको क्या करना चाहिए? FAQs 1. 28 दिन प्लान में दिक्कत क्या है?इसमें साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। 2. क्या 30 दिन प्लान सस्ते होंगे?जरूरी नहीं, लेकिन कुल सालाना खर्च कम हो सकता है। 3. क्या 28 दिन प्लान बंद हो जाएंगे?अभी नहीं, लेकिन इनकी संख्या कम हो सकती है। 4. सरकार ने क्या कहा है?30 दिन वाले प्लान को प्रमोट करने और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। 5. यूजर्स को क्या फायदा होगा?कम रिचार्ज, कम खर्च और ज्यादा सुविधा।

1 अप्रैल से HDFC Bank के नियम बदलेंगे: UPI ATM विड्रॉल पर लगेगा चार्ज, जानिए पूरी डिटेल

1 अप्रैल 2026 से HDFC Bank के ATM और UPI विड्रॉल नियम बदल रहे हैं। अब UPI कैश निकासी भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल होगी। जानिए नए चार्ज, लिमिट और बचने के तरीके। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।  HDFC Bank New Rules April 2026:नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक HDFC Bank अपने ग्राहकों के लिए अहम बदलाव करने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में बड़ा परिवर्तन लागू होगा, जिसका सीधा असर करोड़ों ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। अब तक एटीएम से UPI के जरिए कैश निकालना (UPI Withdrawal) एक अलग सुविधा मानी जाती थी, लेकिन नए नियमों के तहत इसे भी आपकी मंथली फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल कर दिया गया है। UPI विड्रॉल अब फ्री लिमिट में शामिल 1 अप्रैल से लागू नए नियम के अनुसार: फ्री लिमिट खत्म होते ही लगेगा चार्ज मेट्रो vs नॉन-मेट्रो: अलग लिमिट ग्राहकों पर क्या होगा असर? इस बदलाव के बाद: कैसे बचें अतिरिक्त चार्ज से?

Instagram DM Privacy Update: 8 मई से हटेगा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, प्राइवेट मैसेज पर बढ़ेगी निगरानी?

Instagram DM Privacy Update: Instagram ने डायरेक्ट मैसेज से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन हटाने का फैसला लिया है। 8 मई 2026 से लागू होने वाले इस अपडेट के बाद प्राइवेट चैट की सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं। जानिए पूरा मामला। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Instagram DM Privacy Update: दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक Instagram के करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने डायरेक्ट मैसेज (DM) से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर को हटाने जा रही है। यह बदलाव 8 मई 2026 से लागू होगा। इस अपडेट के बाद इंस्टाग्राम पर भेजे जाने वाले मैसेज पहले की तरह पूरी तरह प्राइवेट नहीं रहेंगे। यानी तकनीकी रूप से कंपनी चाहे तो यूजर्स के मैसेज को एक्सेस कर सकती है। 2023 में शुरू हुआ था एन्क्रिप्टेड चैट फीचर रिपोर्ट्स के मुताबिक इंस्टाग्राम ने दिसंबर 2023 में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर की शुरुआत की थी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी बातचीत को सिर्फ मैसेज भेजने वाला और रिसीव करने वाला ही पढ़ सके। लेकिन अब इस फीचर को हटाने के बाद यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़ी अतिरिक्त सुरक्षा समाप्त हो जाएगी। यूजर्स अपनी चैट और मीडिया डाउनलोड कर सकते हैं इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta Platforms ने कहा है कि एन्क्रिप्शन बंद होने से पहले यूजर्स अपनी मौजूदा चैट और मीडिया फाइल्स डाउनलोड कर सकते हैं। आखिर Meta ने यह फैसला क्यों लिया? हालांकि Meta ने आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे ऑनलाइन सुरक्षा और सरकारी नियमों का दबाव हो सकता है। दुनिया के कई देशों की सरकारें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियम लागू करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि एन्क्रिप्टेड चैट्स के जरिए बच्चों के शोषण या गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़ा कंटेंट ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। नए नियमों का भी असर यूरोपियन यूनियन का प्रस्तावित EU Chat Control Regulation और ब्रिटेन का Online Safety Act 2023 सोशल मीडिया कंपनियों को संदिग्ध और अवैध कंटेंट को स्कैन करने और हटाने के लिए बाध्य करता है। ऐसे में एन्क्रिप्शन हटाने से Meta के लिए इन नियमों का पालन करना आसान हो सकता है। क्या WhatsApp और Messenger पर भी पड़ेगा असर? इस फैसले के बाद यूजर्स के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या Meta के अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp और Facebook Messenger पर भी भविष्य में ऐसे बदलाव हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल कंपनी ने इन ऐप्स के एन्क्रिप्शन को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की है।

Mobile Data: क्या मोबाइल डेटा होगा महंगा? हर 1GB पर लग सकता है ₹1 टैक्स, जानिए क्या है मामला

Mobile Data भारत में मोबाइल डेटा महंगा हो सकता है। सरकार हर 1GB डेटा पर ₹1 टैक्स लगाने के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। जानिए पूरा मामला और यूजर्स पर इसका कितना असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Mobile Data: भारत में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए आने वाले समय में डेटा महंगा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार मोबाइल डेटा उपयोग पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की संभावना का अध्ययन कर रही है। इसके लिए दूरसंचार विभाग (DoT) को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक समीक्षा बैठक के दौरान मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद सरकार ने दूरसंचार विभाग से यह जांच करने को कहा कि क्या मोबाइल डेटा इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जा सकता है और यदि लगाया जाए तो उसका ढांचा कैसा होगा। हर 1GB डेटा पर लग सकता है ₹1 टैक्स रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें मोबाइल डेटा उपयोग पर प्रति 1GB लगभग ₹1 का अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव शामिल है। अगर यह मॉडल लागू किया जाता है, तो जब भी कोई यूजर मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करेगा, उसे मौजूदा चार्ज के अलावा यह अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि इस तरह का टैक्स लागू होता है तो सरकार को इससे हर साल करीब ₹22,900 करोड़ तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। पहले से लग रहा है 18% GST गौरतलब है कि भारत में मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर पहले से ही 18% जीएसटी लगाया जाता है। यानी यूजर्स टेलीकॉम सेवाओं पर पहले ही टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में यदि मोबाइल डेटा उपयोग पर अलग से टैक्स लागू होता है, तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा अतिरिक्त शुल्क होगा। भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट भारत उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल इंटरनेट की कीमत दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम है। कम कीमतों के कारण देश में वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके चलते डेटा की खपत भी लगातार बढ़ रही है। अभी नहीं हुई कोई आधिकारिक घोषणा हालांकि, इस मामले में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल सरकार ने दूरसंचार विभाग को इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

LPG crisis India: LPG संकट का असर इंटरनेट पर? गैस की किल्लत से मोबाइल नेटवर्क ठप होने की आशंका

LPG crisis India: अमेरिका-ईरान-इजराइल तनाव के बीच भारत में LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। टेलीकॉम कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर संकट लंबा चला तो मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG crisis India: अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। इस तनाव के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर केवल रसोई गैस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ सकता है। टेलीकॉम टावरों के संचालन पर बढ़ सकता है असर दरअसल, कई जगह टेलीकॉम टावरों और डेटा सेंटरों के बैकअप जनरेटर के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो टेलीकॉम कंपनियों को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि कंपनियों के पास बिजली और अन्य ईंधन के विकल्प मौजूद होते हैं, लेकिन लंबे समय तक एलपीजी की कमी रहने पर संचालन लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या भी सामने आ सकती है। DIPA ने सरकार को दी चेतावनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA) के अनुसार, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद तेल कंपनियों ने टेलीकॉम टावर निर्माण से जुड़ी कुछ इकाइयों को एलपीजी की आपूर्ति रोक दी है।हालांकि फिलहाल देश में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन स्थिति लंबी चली तो समस्या बढ़ सकती है। टेलीकॉम टावर निर्माण भी हो सकता है प्रभावित टेलीकॉम टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में गैल्वनाइजेशन प्लांट में जिंक को पिघली हुई अवस्था में बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत होती है।कुछ कंपनियों ने फिलहाल कम लौ पर प्लांट चलाने का विकल्प अपनाया है, लेकिन यदि एलपीजी की कमी जारी रही तो उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। इससे नए टेलीकॉम टावरों के निर्माण में देरी हो सकती है और नेटवर्क विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है। क्यों जरूरी है मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क आज के दौर में टेलीकॉम नेटवर्क केवल कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। 5G नेटवर्क, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन, आपातकालीन सेवाएं, डिजिटल भुगतान, सरकारी ऑनलाइन सेवाएं और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं पूरी तरह इस नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। ऐसे में इसकी निर्बाध उपलब्धता बेहद जरूरी है। सरकार से की गई अहम मांग DIPA ने दूरसंचार विभाग से मांग की है कि टेलीकॉम टावर निर्माण इकाइयों को एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध से छूट दी जाए। साथ ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कीमतों में उछाल और सप्लाई संकट की स्थिति बन सकती है।

Share Market: 1300 अंक टूटा सेंसेक्स: शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1300 अंक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ। निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए गिरावट की बड़ी वजह। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Share Market: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72% गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 394.75 अंक यानी 1.63% टूटकर 23,866.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को बड़ा झटका लगा और बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। टॉप 30 शेयरों में अधिकांश में गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 2 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस गिरावट में कई बड़े शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख रूप से बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की कमाई हुई साफ मंगलवार को शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ था, लेकिन बुधवार की गिरावट ने यह कमाई लगभग पूरी तरह मिटा दी। बीएसई का कुल मार्केट कैप मंगलवार को करीब 447 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर 441.90 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इन सेक्टरों में ज्यादा गिरावट बाजार में आई इस गिरावट का असर कई सेक्टरों पर देखने को मिला। इन सभी क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एफआईआई की बिकवाली बनी बड़ी वजह शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। 10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,673 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। प्रॉफिट बुकिंग का भी असर पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग की। इससे भी बाजार पर दबाव बढ़ा और इंडेक्स नीचे आ गए। मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इंडिया VIX में उछाल बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX भी 11 मार्च को 8% से ज्यादा बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार में आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह लेने की सलाह दी जा रही है।