Lady Of Justice: सुप्रीम कोर्ट में ‘न्याय की देवी’ की प्रतिमा में बड़ा बदलाव, आंखों से पट्टी और हाथ से तलवार हटाई

नई दिल्ली- पब्लिक वार्तान्यूज़ डेस्क। Lady Of Justice: सुप्रीम कोर्ट में ‘न्याय की देवी’ की प्रतिमा में बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के तहत अब प्रतिमा की आंखों से पट्टी हटा दी गई है और हाथ में तलवार की जगह संविधान की प्रति दी गई है। इस नई प्रतिमा को सुप्रीम कोर्ट के परिसर में पिछले साल स्थापित किया गया था, लेकिन हाल ही में इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसने जनता और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। (Supreme Court Of India) पारंपरिक रूप से, ‘न्याय की देवी’ को आंखों पर पट्टी और हाथ में तलवार के साथ दिखाया जाता है, जो न्याय की निष्पक्षता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस नई प्रतिमा में आंखों से पट्टी हटाकर न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संविधान को सर्वोच्चता दी गई है। इस बदलाव को न्यायिक व्यवस्था के आधुनिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानून और संविधान को सर्वोपरि माना गया है। प्रतिमा के इस नए रूप को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे न्याय की नई व्याख्या के रूप में देख रहे हैं, जहां कानून और संविधान की अहमियत को प्रमुखता दी गई है, वहीं कुछ पारंपरिक दृष्टिकोण के समर्थक इस बदलाव पर सवाल उठा रहे हैं।

When to celebrate Diwali?: देशभर में इस दिन मनेगी 2024 की दिवाली, जयपुर की धर्मसभा में हुआ निर्णय

धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए, गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली (Diwali 2024) का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को मनाने का निर्णय जयपुर – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। कब मनाएं दिवाली?: दीपावली पर्व की तिथि को लेकर देशभर में जारी असमंजस के बीच, 15 अक्टूबर 2024 को जयपुर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नवीन सभागार में अखिल भारतीय विद्वत परिषद द्वारा एक महत्वपूर्ण धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए। प्रमुख ज्योतिषाचार्य प्रो. रामपाल शास्त्री की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष दीपावली (When to celebrate Diwali?) का महापर्व 31 अक्टूबर 2024, गुरुवार को ही मनाया जाएगा। धर्मसभा के अनुसार, यह तिथि शास्त्रसम्मत है और इसी दिन लक्ष्मी पूजन (Lakshmi Pujan) का सही समय है। धर्मसभा का निर्णय: 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी दीपावलीधर्मसभा में विद्वानों ने विभिन्न पंचांगों, ज्योतिषीय गणनाओं और शास्त्रीय प्रमाणों का सूक्ष्म अध्ययन किया। गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को ही मनाना शास्त्रों के अनुसार उचित और शुभ है। इस दिन प्रदोषकाल में व्यापिनी कार्तिकी अमावस्या का समय रहेगा, जो लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। धर्मसभा के संयोजक प्रो. मोहनलाल शर्मा ने बताया कि विद्वानों ने पंचांगों की गणनाओं और सूर्य सिद्धांत के आधार पर इस निर्णय को अंतिम रूप दिया। उन्होंने कहा, “31 अक्टूबर की रात को पूरी अमावस्या व्यापिनी रहेगी, और शास्त्रों के अनुसार कर्मकाल में तिथि की प्राप्ति आवश्यक होती है। इस कारण 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जानी चाहिए।” शास्त्रों का समर्थन: प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का महत्वधर्मशास्त्रों के अनुसार, प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन को अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। धर्मसभा में इस बात पर जोर दिया गया कि 31 अक्टूबर को प्रदोषकाल के समय व्यापिनी अमावस्या रहेगी, और उसी समय लक्ष्मी पूजन करना शास्त्रों के अनुसार सबसे उचित होगा। धर्मसभा के अध्यक्ष प्रो. रामपाल शास्त्री ने कहा, “दीपावली का पर्व तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक कि वह प्रदोषकाल में व्यापिनी अमावस्या के समय न हो।” विरोध के स्वर: 1 नवंबर को भी दिवाली के पक्ष में विद्वानों की रायहालांकि धर्मसभा में 31 अक्टूबर की तिथि को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, कुछ विद्वानों ने इसका विरोध भी जताया। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास सहित अन्य विद्वानों ने तर्क दिया कि 1 नवंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त के बाद अमावस्या रहेगी, जो लक्ष्मी पूजन के लिए अधिक शुभ मानी जाती है। शास्त्री कोसलेंद्रदास ने कहा, “शास्त्रों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जब दो दिन अमावस्या का योग हो, तो दूसरे दिन अमावस्या को पर्व मनाना चाहिए। इस वर्ष 1 नवंबर को भी अमावस्या सूर्योदय के बाद तक बनी रहेगी, इसलिए 1 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत होगा।” ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा ने भी इसी प्रकार का तर्क देते हुए कहा, “दो दिन अमावस्या होने पर शास्त्रों के अनुसार उत्तर वाली अमावस्या (दूसरे दिन) को लक्ष्मी पूजन करना सही होता है। 1 नवंबर को स्वाति नक्षत्र का भी संयोग रहेगा, जिससे लक्ष्मी पूजन का महत्व और बढ़ जाएगा।” देशभर में विविधता: अलग-अलग राज्यों में अलग तिथियों पर दीपावलीदीपावली पर्व को लेकर देशभर में अलग-अलग पंचांगों के आधार पर विभिन्न तिथियों का निर्धारण किया गया है। अयोध्या के राममंदिर में 1 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी, जबकि काशी में सौर पंचांग सिद्धांत के अनुसार 31 अक्टूबर को ही पर्व मनाने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली के कुछ पंचांगकर्ता 1 नवंबर को दीपावली मानने के पक्ष में हैं, वहीं राजस्थान के जयविनोदी पंचांग और सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी। जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में भी 31 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजन होगा। धर्मसभा का उद्देश्य: एकरूपता और धार्मिक अनुशासन की स्थापनाधर्मसभा के निर्णय का उद्देश्य पूरे देश में दीपावली की तिथि को लेकर चल रहे भ्रम को समाप्त करना और सनातन धर्म के अनुयायियों के बीच धार्मिक अनुशासन और एकरूपता को बढ़ावा देना है। धर्मसभा के विद्वानों ने कहा कि शास्त्रों के आधार पर 31 अक्टूबर को दीपावली मनाना सर्वश्रेष्ठ और शुभ है। धर्मसभा का निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि सनातन धर्म के अनुयायी सही समय पर दीपावली का महापर्व मना सकें।

RSS पथ संचलन: महाराष्ट्र में RSS के जुलूस को मुस्लिम भीड़ द्वारा रोकने की कोशिश, तनाव के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

मुंबई – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क।RSS पथ संचलन: दशहरा से एक दिन पहले महाराष्ट्र के रत्नागिरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जुलूस यानी पथ संचलन के दौरान तनाव पैदा हो गया। जानकारी के मुताबिक जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पथ संचलन को रोकने का प्रयास किया।वहीं कथित तौर पर नारेबाजी की। इससे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया। रत्नागिरी के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार रात को कोंकण नगर इलाके में यह घटना हुई। इसके बाद पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में कणकवली से विधायक और बीजेपी नेता नितेश राणे ने एक तथाकथित वीडियो शेयर किया है, जिसमें कुछ लोगों को नारेबाजी करते हुए देखा गया था। घटना को लेकर नितेश ने वीडियो के साथ लिखा- ‘इसका हिसाब तो होगा… इंटरेस्ट के साथ’! रत्नागिरी में शुक्रवार शाम निकला था RSS का मार्चरत्नागिरी में शुक्रवार शाम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता कदम ताल करते हुए घोष के साथ मार्च कर रहे थे। संघ कार्यकर्ता कतार लगाकर चल रहे थे। इसी बीच कुछ अराजक तत्वों का झुंड इस मार्च को बाधित करने की कोशिश करते हुए दिखाई दिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी उन लोगों को रोककर खड़े हुए थे, ताकि आरएसएस का मार्च निकल सके।वीडियो में देखा गया कि संघ कार्यकर्ताओं के आते ही वहां मौजूद अराजक तत्व नारेबाजी करने लगे। उन लोगों ने धार्मिक नारे लगाए। काफी देर तक ये लोग संघ कार्यकर्ताओं के मार्च के बीच नारेबाजी करते रहे। पुलिस वहां मोर्चा संभालकर डटी हुई थी और संघ का मार्च वहां से धीरे-धीरे आगे निकल गया था। फिलहाल पुलिस ने बताया कि जब दशहरा उत्सव की पूर्व संध्या पर आरएसएस ने इलाके में पथ संचलन किया तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे लगाए। हालांकि कोई हिंसा नहीं हुई। मगर रात को लोगों की भीड़ थाने में जुट गई। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अधिकारी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहींपुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने शिकायतों के आधार पर दो मामले दर्ज किए हैं। पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उन्हें नोटिस जारी कर दिए हैं। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। भागवत ने विजयादशमी पर क्या कहा?नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने हिंदुओं से एक होने की अपील की। भागवत ने बांग्लादेश का उदाहरण दिया और कहा कि पहली बार हिंदू एकजुट हुए और अपनी रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि जब तक अत्याचार करने की कट्टरपंथी प्रकृति बनी रहेगी तब तक न केवल हिंदू बल्कि सभी अल्पसंख्यक खतरे में रहेंगे। कमजोरी कोई विकल्प नहींसंघ प्रमुख ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह भारत के हिंदुओं के लिए भी सीख है। हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में जो कुछ हुआ? इसके कुछ तात्कालिक कारण हो सकते हैं और जो लोग चिंतित हैं, वे इस पर चर्चा करेंगे। मगर मूल मुद्दा हिंदुओं के खिलाफ बार-बार हो रहा अत्याचार है। भागवत ने आगे कहा कि अगर हम कमजोर हैं तो हम अत्याचार को आमंत्रित कर रहे हैं। हम जहां भी हैं, हमें एकजुट और सशक्त होने की जरूरत है। कमजोरी कोई विकल्प नहीं है। बांग्लादेश पर भड़के भागवतभागवत ने कहा कि बांग्लादेश में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि उन्हें पाकिस्तान का साथ देना चाहिए क्योंकि उसके पास परमाणु शक्ति है और उन्हें भारत से खतरा है। उन्होंने कहा कि जिस देश को उसके निर्माण में पूरा समर्थन मिला, वह अब भारत के खिलाफ इस तरह के बयान को बढ़ावा दे रहा है।

India vs Bangladesh Highlights, 1st T20I: भारत ने बांग्लादेश को सात विकेट से हराकर 1-0 की बढ़त बनाई; हार्दिक, वरुण, अर्शदीप चमके

ग्वालियर – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। India vs Bangladesh Highlights, 1st T20I: भारत और बांग्लादेश के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 7 विकेट से शिकस्त दी। यह जीत भारत के युवा खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम थी। गेंदबाजों ने जहां बांग्लादेश को 127 रनों पर सीमित कर दिया, वहीं भारतीय बल्लेबाजों ने 12वें ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया, जो इस मैच की एकतरफा स्थिति को दर्शाता है। 6 अक्टूबर, 2024 को खेले गए पहले टी20 मैच में भारत ने बांग्लादेश को 7 विकेट से हरा दिया। यह मुकाबला ग्वालियर के न्यू माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम में हुआ, जहां भारतीय टीम ने बांग्लादेश को पूरी तरह दबाव में रखते हुए शानदार प्रदर्शन किया। गेंदबाजों का जलवाभारत की जीत में सबसे बड़ा योगदान उसके गेंदबाजों का रहा। पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश की टीम 127 रनों पर सिमट गई। तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने 3 विकेट लेकर बांग्लादेश के शीर्ष क्रम को झकझोर दिया, जिसमें लिटन दास और परवेज होसैन इमोन जैसे मुख्य बल्लेबाज शामिल थे। अर्शदीप ने पिच से मिल रही स्विंग का भरपूर फायदा उठाया और अपनी बॉलिंग से बांग्लादेश को शुरुआती झटके दिए। इसके अलावा, तीन साल बाद भारतीय टीम में लौटे वरुण चक्रवर्ती ने भी 3 विकेट झटके और मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया। अपने डेब्यू मैच में तेज गेंदबाज मयंक यादव ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए एक विकेट लिया और अपने करियर की शुरुआत एक मेडन ओवर से की, जो बेहद प्रभावशाली रहा। बल्लेबाजों का दमदार प्रदर्शन128 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत संतुलित रही। हालांकि, असली चमक देखने को मिली मध्यक्रम में जब कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav), संजू सैमसन और हार्दिक पंड्या ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। सूर्यकुमार यादव ने तेज़ गति से रन बटोरते हुए 29 रन बनाए, जबकि संजू सैमसन ने भी 29 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैच का असली मोमेंट तब आया जब हार्दिक पंड्या ने 16 गेंदों में ताबड़तोड़ 39 रन ठोक दिए और भारत को 49 गेंद शेष रहते हुए जीत दिलाई। उनके साथ डेब्यू कर रहे नितीश कुमार रेड्डी ने भी 16 रन बनाकर महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई, और दोनों ने मिलकर भारत को आराम से जीत की ओर अग्रसर किया। भारत का मजबूत आगाजयह जीत भारतीय टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली है, खासकर पहले टी20 मैच में। गेंदबाजों ने जहां बांग्लादेश की बल्लेबाजी को रोक दिया, वहीं बल्लेबाजों ने तेजी से लक्ष्य हासिल कर लिया। हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) और अर्शदीप सिंह (Arshdeep Singh) के  प्रदर्शन ने यह साफ किया कि टीम के पास प्रतिभा और संतुलन दोनों मौजूद हैं। इस शानदार जीत के बाद भारत अब अगला मैच 9 अक्टूबर को दिल्ली में खेलेगा, जहां टीम की कोशिश सीरीज को सील करने की होगी। खिलाड़ियों की मुख्य प्रदर्शन– अर्शदीप सिंह: 3/14 (3.5 ओवर)– वरुण चक्रवर्ती: 3/31 (4 ओवर)– हार्दिक पंड्या: 39* (16 गेंद)– सूर्यकुमार यादव: 29 (17 गेंद) इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि भारत की युवा टीम न केवल मजबूत है, बल्कि आने वाले मैचों में और भी बेहतर प्रदर्शन की क्षमता रखती है।

India vs Pakistan Highlights Women’s T20 World Cup 2024: भारत ने पाकिस्तान को 6 विकेट से रौंदा, पहली जीत के बाद आगे कितनी मुश्किलें!

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। India vs Pakistan Highlights Women’s T20 World Cup 2024: आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपनी पहली जीत दर्ज कर ली है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 6 विकेट से मात दी। इस जीत के साथ ही भारत ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है। इससे पहले भारतीय टीम को अपने पहले मैच में न्यूजीलैंड से 58 रनों की करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ यह जीत आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली साबित हुई है। पाकिस्तान का संघर्ष और अरुंधति की घातक गेंदबाजीपाकिस्तान की बल्लेबाजी शुरुआत से ही दबाव में रही। तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर ने पहले ही ओवर में गुल फिरोजा को शून्य पर बोल्ड कर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके बाद पाकिस्तानी बल्लेबाज लगातार संघर्ष करते नजर आए। सिदरा अमीन (8 रन) और ओमैमा सोहेल (3 रन) भी जल्दी पवेलियन लौट गईं। पाकिस्तान की प्रमुख बल्लेबाज मुनीबा अली (17 रन) ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी श्रेयंका पाटिल ने पवेलियन भेज दिया। अरुंधति रेड्डी की शानदार गेंदबाजी ने पाकिस्तान को और भी मुश्किल में डाल दिया। उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकेट लिए, जिनमें आलिया रियाज और निदा डार शामिल थीं। निदा डार ने 28 रन बनाकर पाकिस्तान को 100 रनों के पार पहुंचाया, लेकिन उनका प्रयास नाकाफी साबित हुआ। 106 रनों का मामूली लक्ष्य, फिर भी भारतीय बल्लेबाजी में दबावपाकिस्तान द्वारा दिया गया 106 रनों का लक्ष्य बड़ा नहीं था, लेकिन भारतीय टीम की शुरुआत थोड़ी नर्वस दिखी। स्मृति मंधाना (7 रन) का जल्दी आउट होना टीम पर दबाव डालने वाला साबित हुआ। हालांकि, इसके बाद शेफाली वर्मा (32 रन) और जेमिमा रोड्रिग्स (23 रन) ने 43 रनों की साझेदारी कर टीम को संभाला। शेफाली ने कुछ बेहतरीन शॉट्स लगाए, लेकिन पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना और ओमैमा सोहेल की फिरकी ने दोनों को आउट कर भारतीय पारी को हिला दिया। ऋचा घोष का शून्य पर आउट होना भारतीय टीम के लिए एक और बड़ा झटका था, जिससे टीम एक समय दबाव में दिख रही थी। लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने सूझबूझ से खेलते हुए मैच को अपने नियंत्रण में रखा। हरमनप्रीत कौर (29 रन) ने टीम को जीत के करीब पहुंचाया, लेकिन अंतिम क्षणों में चोटिल होने के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा। इसके बाद दीप्ति शर्मा (7 रन) और सजना सजीवन (4 रन) ने मैच को खत्म किया। जीत के बावजूद भारतीय टीम की चुनौतियांहालांकि भारत ने यह मुकाबला जीत लिया, लेकिन टीम के प्रदर्शन में कुछ कमजोरियां भी नजर आईं। बल्लेबाजी क्रम में निरंतरता का अभाव दिखा, खासकर शीर्ष क्रम की अस्थिरता और मिडिल ऑर्डर के जल्दी आउट होने से टीम दबाव में आ गई थी। इसके अलावा, पाकिस्तान जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ 106 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भी टीम को जीत के लिए संघर्ष करना पड़ा, जो आगामी मैचों में चिंता का विषय हो सकता है। भारतीय टीम को अपने अगले मुकाबले में 9 अक्टूबर को श्रीलंका का सामना करना है। यह मैच भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि टीम को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए हर मैच जीतना जरूरी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार के बाद टीम का नेट रनरेट भी नकारात्मक हो चुका है, जिसे सुधारने के लिए भारत को बड़े अंतर से जीत की जरूरत होगी। पाकिस्तान की सीमित बल्लेबाजी और रणनीतिक कमजोरीपाकिस्तान की बल्लेबाजी इस मैच में कमजोर कड़ी साबित हुई। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक मजबूत साझेदारी की जरूरत थी, जो किसी भी बल्लेबाज ने नहीं दी। निदा डार का संघर्ष और सैयदा अरूब शाह के साथ आठवें विकेट के लिए 28 रनों की साझेदारी ने टीम को 100 रनों के पार पहुंचाया, लेकिन यह स्कोर कभी भी चुनौतीपूर्ण नहीं लगा। पाकिस्तान की गेंदबाजी में फातिमा सना और सादिया इकबाल ने अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन लक्ष्य की मामूलीता के कारण वे भारतीय बल्लेबाजों पर अधिक दबाव नहीं बना सकीं। फील्डिंग के दौरान भी कुछ मौके गंवाए गए, जिसने पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरी को उजागर किया। आगे की राह और टी20 का परिदृश्यभारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला हमेशा खास होता है, और भारत ने अपने शानदार रिकॉर्ड को बनाए रखा है। वूमेन्स टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के बीच अब तक 8 मुकाबले हुए हैं, जिनमें से 6 में भारत ने जीत दर्ज की है। भारतीय टीम के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ होने वाले अगले मैच में टीम को अपनी बल्लेबाजी में स्थिरता लानी होगी और बड़े स्कोर खड़े करने पर ध्यान देना होगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान को भी अपने बचे हुए मैचों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा, क्योंकि टूर्नामेंट में बने रहने के लिए उन्हें अब हर मैच जीतना जरूरी है। भारत की यह जीत टूर्नामेंट में बने रहने के लिए अहम थी, लेकिन टीम को अपनी कमजोरियों पर काम करने की जरूरत है। गेंदबाजी में अरुंधति रेड्डी और श्रेयंका पाटिल की शानदार परफॉर्मेंस ने उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन बल्लेबाजी में सुधार की गुंजाइश है।

BIG BREAKING: MP के भोपाल में 1800 करोड़ रुपए की ड्रग्स बरामद, फैक्ट्री पर NCB और गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई

भोपाल पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क: BIG BREAKING: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गुजरात ATS ने संयुक्त रूप से भोपाल के पास एक औद्योगिक क्षेत्र में छापा मारकर 1800 करोड़ रुपए कीमत की मादक दवा मेफेड्रोन (MD Drugs) बरामद की है। यह छापा 5 अक्टूबर को बगरोदा गांव के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक फैक्ट्री पर मारा गया, जहां अवैध रूप से ड्रग्स का निर्माण हो रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फैक्ट्री में हो रहा था ड्रग्स का निर्माणगुजरात ATS के डीएसपी एस.एल. चौधरी के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि भोपाल का अमित चतुर्वेदी और नासिक, महाराष्ट्र का सान्याल बाने भोपाल के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री की आड़ में मेफेड्रोन (एमडी) नामक मादक पदार्थ का अवैध निर्माण और बिक्री कर रहे हैं। सूचना मिलने पर गुजरात ATS ने NCB के सहयोग से फैक्ट्री पर छापा मारा, जहां बड़ी मात्रा में ड्रग्स और इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद किया गया। 5 हजार किलो कच्चा माल और उपकरण बरामदछापे के दौरान फैक्ट्री से मेफेड्रोन (एमडी) बनाने में इस्तेमाल होने वाला करीब 5000 किलोग्राम कच्चा माल और उपकरण जब्त किए गए। इनमें ग्राइंडर, मोटर, ग्लास फ्लास्क, हीटर और अन्य उपकरण शामिल हैं। इन सामग्रियों को आगे की जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है।  दो आरोपी गिरफ्तारइस छापे में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:1. अमित प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी (57 वर्ष), निवासी कोटरा सुल्तानाबाद रोड, हुजूर, भोपाल।2. सान्याल बाने, निवासी नासिक, महाराष्ट्र। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस मामले की गहन जांच कर रही हैं, ताकि इस ड्रग्स नेटवर्क के अन्य लिंक और इसमें शामिल लोगों का पता लगाया जा सके। यह ड्रग्स तस्करी और निर्माण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे राजधानी भोपाल में फैले ड्रग्स रैकेट पर कड़ा प्रहार हुआ है।

Shailaja Paik: कौन है शैलजा पाइक:पुणे की झुग्गी से मैकआर्थर ‘जीनियस’ फेलोशिप तक की कहानी!

“यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” – Shailaja Paik पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Shailaja Paik: पुणे के येरवडा की एक छोटी झुग्गी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन शैलजा पाइक की यह असाधारण कहानी हमें बताती है कि सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। आज शैलजा पाइक दुनिया भर में दलित अध्ययन की प्रमुख विद्वान के रूप में जानी जाती हैं और हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठित मैकआर्थर ‘जीनियस’ अनुदान (MacArthur ‘Genius’ Grant) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अपनी असाधारण रचनात्मकता और सामाजिक योगदान के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई हो। इस फेलोशिप के साथ 8 लाख डॉलर का अनुदान भी दिया जाता है। भारतीय रुपये के हिसाब से ये करीब 6.64 करोड़ है। शैलजा पाइक का सफर बेहद प्रेरणादायक है। येरवडा (Yerawada) की झुग्गियों में पली-बढ़ी शैलजा ने बचपन में ही गरीबी, जातिगत और लैंगिक भेदभाव का सामना किया। उनका परिवार एक छोटे से एक कमरा घर में रहता था, जिसकी छत लकड़ी के खंभों से सहारा पाती थी। उनके पिता देवराम पाइक राज्य कृषि विभाग में काम करते थे, जबकि उनकी मां सरिता पाइक एक गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, लेकिन उनके माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी। शैलजा और उनकी तीन बहनों को पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शैलजा को पहली बार जातिगत भेदभाव का सामना अपने पैतृक गांव ब्रह्मगांव तकली में करना पड़ा, जहां दलित परिवारों को ऊंची जातियों से अलग रहना पड़ता था और उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं थी। यह अनुभव उनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ गया और आगे चलकर उनके शोध का आधार बना। शैलजा ने स्थानीय रोशनी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने हमेशा कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। जब उन्होंने 10वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए, तो उनका नाम अखबार में आया और यह उनके स्कूल के लिए भी गर्व का क्षण था। इसके बाद, उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। हालांकि उनका सपना यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अपने परिवार की मदद करने के लिए वह सपना छोड़ना पड़ा। अपने शुरुआती संघर्षों के बावजूद, शैलजा ने अपनी ऊर्जा दलित महिलाओं के अधिकारों और उनके सामाजिक संघर्षों पर केंद्रित की। उन्होंने 2007 में ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अमेरिका के येल विश्वविद्यालय और यूनियन कॉलेज में पढ़ाने के बाद सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर बनीं। आज वह दक्षिण एशियाई अध्ययन, महिला अध्ययन, और समाजशास्त्र के साथ ही चार्ल्स फेल्प्स टैफ्ट प्रतिष्ठित शोध प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। शैलजा की पहली पुस्तक, Dalit Women’s Education in Modern India: Double Discrimination (2014), दलित महिलाओं के संघर्ष और शिक्षा की जटिलताओं पर केंद्रित थी। उनकी दूसरी पुस्तक, The Vulgarity of Caste: Dalits, Sexuality, and Humanity in Modern India (2022), जाति, लैंगिकता और मानवीयता के आपसी संबंधों पर आधारित है। इन किताबों के माध्यम से शैलजा ने दिखाया कि कैसे जाति और लैंगिकता भारतीय समाज में अन्याय को बढ़ावा देती हैं। शैलजा की यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनका येरवडा से अमेरिका तक का सफर है। एक दलित महिला के रूप में उन्होंने जातिगत और लैंगिक भेदभाव के साथ-साथ रंगभेद का भी सामना किया, लेकिन इन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। जब उन्हें मैकआर्थर फेलोशिप के लिए चुने जाने की खबर मिली, तो वह अमेरिका में थीं। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” शैलजा का मानना है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में केवल दलितों को ही संघर्ष करने की जिम्मेदारी नहीं उठानी चाहिए, बल्कि ऊंची जातियों को भी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। वह कहती हैं, “जाति के दमन के खिलाफ सिर्फ पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि सभी को साथ आकर लड़ना होगा।” शैलजा पाइक की यह यात्रा उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अन्याय का सामना कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा, संघर्ष, और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है। शैलजा की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अगर आप में संघर्ष करने की हिम्मत और सपनों को पाने का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

Ratlam News: बालम ककड़ी खाने से परिवार हुआ फूड प्वाइजनिंग का शिकार, 5 वर्षीय बालक की मौत, रखे ये सावधानियां

रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं, रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा होता है उत्पादन, खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: रतलाम के जड़वासा कलां गांव में कथित तौर पर बालम ककड़ी खाने से एक ही परिवार के पांच लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए, जिसमें 5 वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। माता-पिता और दो बेटियां मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला फूड प्वाइजनिंग का दिखाई दे रहा है, जिसकी वजह से पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ी। जानकारी के अनुसार परिवार ने बालम ककड़ी खाई थी, जो सीजन में मिलने वाला एक स्थानीय फल है। परिवार के सदस्य  मांगीलाल पाटीदार ने अपनी पत्नी कविता, बेटियां दक्षिता, साक्षी और बेटे क्रियांश के साथ बालम ककड़ी खाई थी। रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रतलाम के मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां 5 वर्षीय क्रियांश की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों का इलाज जारी है। मृतक बालक के चाचा रवि पाटीदार ने बताया कि मांगीलाल तीन दिन पहले सैलाना-धामनोद रोड से बालम ककड़ी खरीदकर लाए थे। परिवार के सभी सदस्यों ने इसे एक साथ खाया, जिसके बाद यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। परिवार के इंकार के बाद मृतक बालक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका, इसलिए मृत्यु की असल वजह स्पष्ट नहीं हो पाई, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह फूड प्वाइजनिंग का मामला हो सकता है। फिलहाल, पिता की हालत में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि मां और दोनों बेटियों का इलाज मेडिकल कॉलेज में जारी है। कीटनाशक भी हो सकती है वजहरतलाम मेडिकल कॉलेज के ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया कि पांचों मरीज फूड पॉइजनंग के कारण बीमार होकर आए थे। सही इलाज मिलने में लंबा गैप होने से भी स्थिति बिगड़ी। क्रियांश का ब्लड सैम्पल लिया है, जांच करवाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत फूड पॉइजनिंग से हुई है। मां और दो बेटियों को इलाज किया जा रहा है। पुलिस चौकी को इन्वेस्टिगेशन के लिए लिखकर दिया था। वहीं, पुलिस चौकी प्रभारी सुनील राघव ने बताया कि फिलहाल इस तरह का मामला नहीं आया है। जानकारी आएगी तो पड़ताल की जाएगी। विशेषज्ञों की माने तो बच्चे की मौत को सीधे तौर पर बालम ककड़ी का इफेक्ट नहीं मान सकते। इसकी पैदावार में पेस्टीसाइट्स का उपयोग किया जाता है। हो सकता है कि परिवार ने खाने से पहले ककड़ी को अच्छी तरह धोया नहीं होगा। उल्टी-दस्त के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी आ जाती है, इससे भी मौत हो सकती है। रखे ये सावधानीबालम ककड़ी या साधारण ककड़ी/खीरा खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी है। ककड़ी का कच्चा फल जहरीला होता है, खाने से बीमार हो सकते हैं। ककड़ी को बेल से तोड़कर सीधे नहीं खाना चाहिए। ककड़ी पर कीट से बचाने के लिए जिन कीटनाशक का प्रयोग होता है, उनका असर 5 से 6 दिनों तक नहीं जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का छिडकाव करने के 1 से 2 दिन में अगर फसल बेचते है तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। जब भी आप ककड़ी ले उसे पानी से अच्छे से साफ कर ले और उसके छिलके उतार कर ही खाएं। गर्म पानी में नमक डालकर उसमें भी कुछ देर रख सकते है।रात में ककड़ी नहीं खानी चाहिए। इससे पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। ककड़ी के सेवन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। ककड़ी को पकाने की सलाह नही ं दी जाती क्योंकि इसमें पानी ज्यादा मात्रा में होता है। भोजन के साथ ककड़ी खा रहे हैं तो ज्यादा मात्रा में न खाएं। बालम ककड़ी क्या है?बालम ककड़ी एक फल है। यह लौकी जैसी दिखती है। पकने पर अंदर से केसरिया रंग की हो जाती है। इसलिए इसे केसरिया बालम ककड़ी भी कहते हैं। यह स्वाद में हल्की मीठी होती है। इसमें पानी की भरपूर मात्रा होती है। रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। इसके अलावा बालम ककड़ी की पैदावार सबसे ज्यादा झाबुआ और धार जिलों में होती है। सैलाना क्षेत्र में उगने वाली बालम ककड़ी का स्वाद और आकार सबसे अच्छा होता है। इसकी मांग देश में दूर – दूर तक है।

new zealand women vs india women: भारत को न्यूजीलैंड से मिली 58 रनों की करारी शिकस्त, सोफी डिवाइन का दमदार प्रदर्शन

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। new zealand women vs india women: भारतीय महिला टीम ने महिला टी-20 वर्ल्ड कप की बेहद निराशाजनक शुरुआत की। पहले गेंदबाजी और फील्डिंग, फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप शो के कारण भारतीय गेंदबाजों ने 160 रन दिए। वहीं न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन (Sophie Devine) ने जबरदस्त अर्धशतक लगाते हुए अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और इसके बाद उनकी टीम के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन कर भारत को 58 रनों से हरा दिया। यह मुकाबला शुक्रवार को महिला टी20 विश्व कप (Women T20 World Cup) में खेला गया। दोनों टीमें 14वीं बार टी20 इंटरनेशनल मैच में आमने सामने थीं। पहले बल्लेबाजी का फैसला करते हुए न्यूजीलैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 160 रन बनाए। कप्तान सोफी डिवाइन ने 36 गेंदों में नाबाद 57 रन बनाकर अपनी टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। इसके अलावा, ओपनर्स सूजी बेट्स (27) और जॉर्जिया प्लिमर (34) ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। भारत की ओर से अरुंधति रेड्डी ने 67 रन की साझेदारी को तोड़ते हुए भारत को पहली सफलता दिलाई। हालाँकि, भारतीय गेंदबाजों ने कुछ समय बाद वापसी की, लेकिन डिवाइन की लाजवाब पारी ने न्यूज़ीलैंड को फिनिशिंग टच दिया। 160 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम पूरी तरह से लड़खड़ा गई और 19 ओवरों में मात्र 102 रनों पर ढेर हो गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर (15) (Harmanpreet Kaur) भारत की ओर से शीर्ष स्कोरर रहीं। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों में रोज़मेरी मैयर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि ली ताहूहू ने भी 15 रन देकर 3 विकेट झटके। भारतीय बल्लेबाजों ने निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए आसानी से अपने विकेट गंवाए और कोई भी बड़ी साझेदारी नहीं कर पाए, जिससे टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 58 रनों से मिली इस हार के बाद अब भारतीय टीम के सामने सोमवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की चुनौती होगी, जिन्होंने अपना पहले मुकाबले में श्रीलंका को हराया था। (india vs pakistan) स्कोर बोर्डन्यूजीलैंड: 160/4 (20 ओवर) – सोफी डिवाइन 57* (36), जॉर्जिया प्लिमर 34 (22); रेणुका सिंह 2/27 भारत: 102 ऑल आउट (19 ओवर) – हरमनप्रीत कौर 15; रोज़मेरी मैयर 4/19, ली ताहूहू 3/15

Ratlam News: रतलाम को मिला इंटरनेशनल शूटिंग कोच, मध्यप्रदेश में एकमात्र उमंग पोरवाल ने हासिल की उपलब्धि

शहर को 96 स्टेट और 4 नेशनल मेडलिस्ट देने वाला कोच, जर्मनी में हुई ट्रेनिंग, 16 में से 4 कोच भारत के चयनित, MP से अकेले उमंग रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: अगर आप राइफल या गन से शूटिंग का शौक रखते है और आपको एक बेहतर कोच की तलाश है, तो मिलिए शहर के पहले इंटरनेशनल शूटिंग कोच उमंग पोरवाल से। जिन्होंने हालही में यह उपलब्धि हासिल की है। आपको बता दे उमंग रतलाम डिस्ट्रिक्ट रायफल एसोसिएशन के सेक्रेटरी और नेशनल लेवल मेडलिस्ट हैं। जिन्होंने अब इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (ISSF) द्वारा आयोजित कोचेस (D Level) लाइसेंस कोर्स उत्तीर्ण कर रतलाम को गौरवान्वित किया है। यह कोर्स जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित किया गया, जिसमें संपूर्ण विश्व से 16 कोचों का चयन किया गया था। उमंग पोरवाल मध्य प्रदेश से चयनित होने वाले एकमात्र प्रतिभागी थे, जबकि पूरे भारत से 4 लोग चयनित हुए, जिनमें से तीन भारतीय सुरक्षा बलों से थे। शूटर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला यह कोर्स जून से जुलाई 2024 तक चला, जिसमें उमंग ने अंतिम परीक्षा में उच्चतम अंक अर्जित कर यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र प्राप्त किया। ISSF एक विश्वस्तरीय संस्था है, जो ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है। उमंग को विश्व रिकॉर्ड होल्डर और ग्रीस की राष्ट्रीय कोच श्रीमती अगाथी कसूमी से प्रशिक्षण मिला, जो स्वयं 6 बार ओलंपिक में हिस्सेदारी कर चुकी हैं। 10 सप्ताह चला प्रशिक्षणISSF के अध्यक्ष लुशियानो रोसी (इटली) और ISSF अकादमी डायरेक्टर वैसा निसिनिन (फिनलैंड) ने उमंग को यह लाइसेंस और प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस 10-सप्ताह लंबे प्रशिक्षण के दौरान उमंग ने एंटी डोपिंग एजुकेशन एंड लर्निंग के तहत कोचेस ऑफ हाई परफॉर्मेंस एजुकेशन प्रोग्राम से भी प्रमाण पत्र प्राप्त किया। 96 स्टेट और 4 नेशनल मेडलिस्ट दे चुकेउमंग पोरवाल ने अब तक रतलाम को 96 स्टेट मेडल और 4 नेशनल मेडलिस्ट शूटर दिए हैं। 12 शूटर भारतीय शूटिंग टीम के ट्रायल्स में हिस्सा ले रहे हैं। उनकी इस उत्कृष्टता को देखते हुए मुंबई, हरियाणा, हिमाचल, मेरठ, बिहार और पुणे के शूटर भी उनसे ऑनलाइन प्रशिक्षण ले रहे हैं। अब रतलाम के बच्चों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि दूसरे शहरों से शूटर रतलाम आकर उमंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उमंग पोरवाल की इस बड़ी उपलब्धि पर लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप, एडिशनल कलेक्टर मंडलोई, CSP अभिनव बारंगे, रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश सेठिया और रतलाम पत्रकार संघ के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश पोरवाल ने हर्ष व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

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