BIG BREAKING: MP के भोपाल में 1800 करोड़ रुपए की ड्रग्स बरामद, फैक्ट्री पर NCB और गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई

भोपाल पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क: BIG BREAKING: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गुजरात ATS ने संयुक्त रूप से भोपाल के पास एक औद्योगिक क्षेत्र में छापा मारकर 1800 करोड़ रुपए कीमत की मादक दवा मेफेड्रोन (MD Drugs) बरामद की है। यह छापा 5 अक्टूबर को बगरोदा गांव के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक फैक्ट्री पर मारा गया, जहां अवैध रूप से ड्रग्स का निर्माण हो रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फैक्ट्री में हो रहा था ड्रग्स का निर्माणगुजरात ATS के डीएसपी एस.एल. चौधरी के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि भोपाल का अमित चतुर्वेदी और नासिक, महाराष्ट्र का सान्याल बाने भोपाल के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री की आड़ में मेफेड्रोन (एमडी) नामक मादक पदार्थ का अवैध निर्माण और बिक्री कर रहे हैं। सूचना मिलने पर गुजरात ATS ने NCB के सहयोग से फैक्ट्री पर छापा मारा, जहां बड़ी मात्रा में ड्रग्स और इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद किया गया। 5 हजार किलो कच्चा माल और उपकरण बरामदछापे के दौरान फैक्ट्री से मेफेड्रोन (एमडी) बनाने में इस्तेमाल होने वाला करीब 5000 किलोग्राम कच्चा माल और उपकरण जब्त किए गए। इनमें ग्राइंडर, मोटर, ग्लास फ्लास्क, हीटर और अन्य उपकरण शामिल हैं। इन सामग्रियों को आगे की जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है।  दो आरोपी गिरफ्तारइस छापे में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:1. अमित प्रकाशचंद्र चतुर्वेदी (57 वर्ष), निवासी कोटरा सुल्तानाबाद रोड, हुजूर, भोपाल।2. सान्याल बाने, निवासी नासिक, महाराष्ट्र। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस मामले की गहन जांच कर रही हैं, ताकि इस ड्रग्स नेटवर्क के अन्य लिंक और इसमें शामिल लोगों का पता लगाया जा सके। यह ड्रग्स तस्करी और निर्माण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे राजधानी भोपाल में फैले ड्रग्स रैकेट पर कड़ा प्रहार हुआ है।

Shailaja Paik: कौन है शैलजा पाइक:पुणे की झुग्गी से मैकआर्थर ‘जीनियस’ फेलोशिप तक की कहानी!

“यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” – Shailaja Paik पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Shailaja Paik: पुणे के येरवडा की एक छोटी झुग्गी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन शैलजा पाइक की यह असाधारण कहानी हमें बताती है कि सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। आज शैलजा पाइक दुनिया भर में दलित अध्ययन की प्रमुख विद्वान के रूप में जानी जाती हैं और हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठित मैकआर्थर ‘जीनियस’ अनुदान (MacArthur ‘Genius’ Grant) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अपनी असाधारण रचनात्मकता और सामाजिक योगदान के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई हो। इस फेलोशिप के साथ 8 लाख डॉलर का अनुदान भी दिया जाता है। भारतीय रुपये के हिसाब से ये करीब 6.64 करोड़ है। शैलजा पाइक का सफर बेहद प्रेरणादायक है। येरवडा (Yerawada) की झुग्गियों में पली-बढ़ी शैलजा ने बचपन में ही गरीबी, जातिगत और लैंगिक भेदभाव का सामना किया। उनका परिवार एक छोटे से एक कमरा घर में रहता था, जिसकी छत लकड़ी के खंभों से सहारा पाती थी। उनके पिता देवराम पाइक राज्य कृषि विभाग में काम करते थे, जबकि उनकी मां सरिता पाइक एक गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, लेकिन उनके माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी। शैलजा और उनकी तीन बहनों को पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शैलजा को पहली बार जातिगत भेदभाव का सामना अपने पैतृक गांव ब्रह्मगांव तकली में करना पड़ा, जहां दलित परिवारों को ऊंची जातियों से अलग रहना पड़ता था और उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं थी। यह अनुभव उनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ गया और आगे चलकर उनके शोध का आधार बना। शैलजा ने स्थानीय रोशनी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने हमेशा कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। जब उन्होंने 10वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए, तो उनका नाम अखबार में आया और यह उनके स्कूल के लिए भी गर्व का क्षण था। इसके बाद, उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। हालांकि उनका सपना यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अपने परिवार की मदद करने के लिए वह सपना छोड़ना पड़ा। अपने शुरुआती संघर्षों के बावजूद, शैलजा ने अपनी ऊर्जा दलित महिलाओं के अधिकारों और उनके सामाजिक संघर्षों पर केंद्रित की। उन्होंने 2007 में ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अमेरिका के येल विश्वविद्यालय और यूनियन कॉलेज में पढ़ाने के बाद सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर बनीं। आज वह दक्षिण एशियाई अध्ययन, महिला अध्ययन, और समाजशास्त्र के साथ ही चार्ल्स फेल्प्स टैफ्ट प्रतिष्ठित शोध प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। शैलजा की पहली पुस्तक, Dalit Women’s Education in Modern India: Double Discrimination (2014), दलित महिलाओं के संघर्ष और शिक्षा की जटिलताओं पर केंद्रित थी। उनकी दूसरी पुस्तक, The Vulgarity of Caste: Dalits, Sexuality, and Humanity in Modern India (2022), जाति, लैंगिकता और मानवीयता के आपसी संबंधों पर आधारित है। इन किताबों के माध्यम से शैलजा ने दिखाया कि कैसे जाति और लैंगिकता भारतीय समाज में अन्याय को बढ़ावा देती हैं। शैलजा की यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनका येरवडा से अमेरिका तक का सफर है। एक दलित महिला के रूप में उन्होंने जातिगत और लैंगिक भेदभाव के साथ-साथ रंगभेद का भी सामना किया, लेकिन इन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। जब उन्हें मैकआर्थर फेलोशिप के लिए चुने जाने की खबर मिली, तो वह अमेरिका में थीं। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” शैलजा का मानना है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में केवल दलितों को ही संघर्ष करने की जिम्मेदारी नहीं उठानी चाहिए, बल्कि ऊंची जातियों को भी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। वह कहती हैं, “जाति के दमन के खिलाफ सिर्फ पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि सभी को साथ आकर लड़ना होगा।” शैलजा पाइक की यह यात्रा उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अन्याय का सामना कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा, संघर्ष, और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है। शैलजा की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अगर आप में संघर्ष करने की हिम्मत और सपनों को पाने का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

Ratlam News: बालम ककड़ी खाने से परिवार हुआ फूड प्वाइजनिंग का शिकार, 5 वर्षीय बालक की मौत, रखे ये सावधानियां

रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं, रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा होता है उत्पादन, खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: रतलाम के जड़वासा कलां गांव में कथित तौर पर बालम ककड़ी खाने से एक ही परिवार के पांच लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए, जिसमें 5 वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। माता-पिता और दो बेटियां मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला फूड प्वाइजनिंग का दिखाई दे रहा है, जिसकी वजह से पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ी। जानकारी के अनुसार परिवार ने बालम ककड़ी खाई थी, जो सीजन में मिलने वाला एक स्थानीय फल है। परिवार के सदस्य  मांगीलाल पाटीदार ने अपनी पत्नी कविता, बेटियां दक्षिता, साक्षी और बेटे क्रियांश के साथ बालम ककड़ी खाई थी। रात में सभी की तबीयत अचानक खराब हो गई और उल्टियां होने लगीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रतलाम के मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां 5 वर्षीय क्रियांश की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों का इलाज जारी है। मृतक बालक के चाचा रवि पाटीदार ने बताया कि मांगीलाल तीन दिन पहले सैलाना-धामनोद रोड से बालम ककड़ी खरीदकर लाए थे। परिवार के सभी सदस्यों ने इसे एक साथ खाया, जिसके बाद यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। परिवार के इंकार के बाद मृतक बालक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका, इसलिए मृत्यु की असल वजह स्पष्ट नहीं हो पाई, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह फूड प्वाइजनिंग का मामला हो सकता है। फिलहाल, पिता की हालत में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि मां और दोनों बेटियों का इलाज मेडिकल कॉलेज में जारी है। कीटनाशक भी हो सकती है वजहरतलाम मेडिकल कॉलेज के ऐपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल ने बताया कि पांचों मरीज फूड पॉइजनंग के कारण बीमार होकर आए थे। सही इलाज मिलने में लंबा गैप होने से भी स्थिति बिगड़ी। क्रियांश का ब्लड सैम्पल लिया है, जांच करवाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत फूड पॉइजनिंग से हुई है। मां और दो बेटियों को इलाज किया जा रहा है। पुलिस चौकी को इन्वेस्टिगेशन के लिए लिखकर दिया था। वहीं, पुलिस चौकी प्रभारी सुनील राघव ने बताया कि फिलहाल इस तरह का मामला नहीं आया है। जानकारी आएगी तो पड़ताल की जाएगी। विशेषज्ञों की माने तो बच्चे की मौत को सीधे तौर पर बालम ककड़ी का इफेक्ट नहीं मान सकते। इसकी पैदावार में पेस्टीसाइट्स का उपयोग किया जाता है। हो सकता है कि परिवार ने खाने से पहले ककड़ी को अच्छी तरह धोया नहीं होगा। उल्टी-दस्त के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी आ जाती है, इससे भी मौत हो सकती है। रखे ये सावधानीबालम ककड़ी या साधारण ककड़ी/खीरा खाने से पहले सावधानियां रखनी जरूरी है। ककड़ी का कच्चा फल जहरीला होता है, खाने से बीमार हो सकते हैं। ककड़ी को बेल से तोड़कर सीधे नहीं खाना चाहिए। ककड़ी पर कीट से बचाने के लिए जिन कीटनाशक का प्रयोग होता है, उनका असर 5 से 6 दिनों तक नहीं जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का छिडकाव करने के 1 से 2 दिन में अगर फसल बेचते है तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। जब भी आप ककड़ी ले उसे पानी से अच्छे से साफ कर ले और उसके छिलके उतार कर ही खाएं। गर्म पानी में नमक डालकर उसमें भी कुछ देर रख सकते है।रात में ककड़ी नहीं खानी चाहिए। इससे पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। ककड़ी के सेवन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। ककड़ी को पकाने की सलाह नही ं दी जाती क्योंकि इसमें पानी ज्यादा मात्रा में होता है। भोजन के साथ ककड़ी खा रहे हैं तो ज्यादा मात्रा में न खाएं। बालम ककड़ी क्या है?बालम ककड़ी एक फल है। यह लौकी जैसी दिखती है। पकने पर अंदर से केसरिया रंग की हो जाती है। इसलिए इसे केसरिया बालम ककड़ी भी कहते हैं। यह स्वाद में हल्की मीठी होती है। इसमें पानी की भरपूर मात्रा होती है। रतलाम के सैलाना में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। इसके अलावा बालम ककड़ी की पैदावार सबसे ज्यादा झाबुआ और धार जिलों में होती है। सैलाना क्षेत्र में उगने वाली बालम ककड़ी का स्वाद और आकार सबसे अच्छा होता है। इसकी मांग देश में दूर – दूर तक है।

new zealand women vs india women: भारत को न्यूजीलैंड से मिली 58 रनों की करारी शिकस्त, सोफी डिवाइन का दमदार प्रदर्शन

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। new zealand women vs india women: भारतीय महिला टीम ने महिला टी-20 वर्ल्ड कप की बेहद निराशाजनक शुरुआत की। पहले गेंदबाजी और फील्डिंग, फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप शो के कारण भारतीय गेंदबाजों ने 160 रन दिए। वहीं न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन (Sophie Devine) ने जबरदस्त अर्धशतक लगाते हुए अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और इसके बाद उनकी टीम के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन कर भारत को 58 रनों से हरा दिया। यह मुकाबला शुक्रवार को महिला टी20 विश्व कप (Women T20 World Cup) में खेला गया। दोनों टीमें 14वीं बार टी20 इंटरनेशनल मैच में आमने सामने थीं। पहले बल्लेबाजी का फैसला करते हुए न्यूजीलैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 160 रन बनाए। कप्तान सोफी डिवाइन ने 36 गेंदों में नाबाद 57 रन बनाकर अपनी टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। इसके अलावा, ओपनर्स सूजी बेट्स (27) और जॉर्जिया प्लिमर (34) ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। भारत की ओर से अरुंधति रेड्डी ने 67 रन की साझेदारी को तोड़ते हुए भारत को पहली सफलता दिलाई। हालाँकि, भारतीय गेंदबाजों ने कुछ समय बाद वापसी की, लेकिन डिवाइन की लाजवाब पारी ने न्यूज़ीलैंड को फिनिशिंग टच दिया। 160 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम पूरी तरह से लड़खड़ा गई और 19 ओवरों में मात्र 102 रनों पर ढेर हो गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर (15) (Harmanpreet Kaur) भारत की ओर से शीर्ष स्कोरर रहीं। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों में रोज़मेरी मैयर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि ली ताहूहू ने भी 15 रन देकर 3 विकेट झटके। भारतीय बल्लेबाजों ने निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए आसानी से अपने विकेट गंवाए और कोई भी बड़ी साझेदारी नहीं कर पाए, जिससे टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 58 रनों से मिली इस हार के बाद अब भारतीय टीम के सामने सोमवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की चुनौती होगी, जिन्होंने अपना पहले मुकाबले में श्रीलंका को हराया था। (india vs pakistan) स्कोर बोर्डन्यूजीलैंड: 160/4 (20 ओवर) – सोफी डिवाइन 57* (36), जॉर्जिया प्लिमर 34 (22); रेणुका सिंह 2/27 भारत: 102 ऑल आउट (19 ओवर) – हरमनप्रीत कौर 15; रोज़मेरी मैयर 4/19, ली ताहूहू 3/15

Ratlam News: रतलाम को मिला इंटरनेशनल शूटिंग कोच, मध्यप्रदेश में एकमात्र उमंग पोरवाल ने हासिल की उपलब्धि

शहर को 96 स्टेट और 4 नेशनल मेडलिस्ट देने वाला कोच, जर्मनी में हुई ट्रेनिंग, 16 में से 4 कोच भारत के चयनित, MP से अकेले उमंग रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: अगर आप राइफल या गन से शूटिंग का शौक रखते है और आपको एक बेहतर कोच की तलाश है, तो मिलिए शहर के पहले इंटरनेशनल शूटिंग कोच उमंग पोरवाल से। जिन्होंने हालही में यह उपलब्धि हासिल की है। आपको बता दे उमंग रतलाम डिस्ट्रिक्ट रायफल एसोसिएशन के सेक्रेटरी और नेशनल लेवल मेडलिस्ट हैं। जिन्होंने अब इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (ISSF) द्वारा आयोजित कोचेस (D Level) लाइसेंस कोर्स उत्तीर्ण कर रतलाम को गौरवान्वित किया है। यह कोर्स जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित किया गया, जिसमें संपूर्ण विश्व से 16 कोचों का चयन किया गया था। उमंग पोरवाल मध्य प्रदेश से चयनित होने वाले एकमात्र प्रतिभागी थे, जबकि पूरे भारत से 4 लोग चयनित हुए, जिनमें से तीन भारतीय सुरक्षा बलों से थे। शूटर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाला यह कोर्स जून से जुलाई 2024 तक चला, जिसमें उमंग ने अंतिम परीक्षा में उच्चतम अंक अर्जित कर यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र प्राप्त किया। ISSF एक विश्वस्तरीय संस्था है, जो ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है। उमंग को विश्व रिकॉर्ड होल्डर और ग्रीस की राष्ट्रीय कोच श्रीमती अगाथी कसूमी से प्रशिक्षण मिला, जो स्वयं 6 बार ओलंपिक में हिस्सेदारी कर चुकी हैं। 10 सप्ताह चला प्रशिक्षणISSF के अध्यक्ष लुशियानो रोसी (इटली) और ISSF अकादमी डायरेक्टर वैसा निसिनिन (फिनलैंड) ने उमंग को यह लाइसेंस और प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस 10-सप्ताह लंबे प्रशिक्षण के दौरान उमंग ने एंटी डोपिंग एजुकेशन एंड लर्निंग के तहत कोचेस ऑफ हाई परफॉर्मेंस एजुकेशन प्रोग्राम से भी प्रमाण पत्र प्राप्त किया। 96 स्टेट और 4 नेशनल मेडलिस्ट दे चुकेउमंग पोरवाल ने अब तक रतलाम को 96 स्टेट मेडल और 4 नेशनल मेडलिस्ट शूटर दिए हैं। 12 शूटर भारतीय शूटिंग टीम के ट्रायल्स में हिस्सा ले रहे हैं। उनकी इस उत्कृष्टता को देखते हुए मुंबई, हरियाणा, हिमाचल, मेरठ, बिहार और पुणे के शूटर भी उनसे ऑनलाइन प्रशिक्षण ले रहे हैं। अब रतलाम के बच्चों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि दूसरे शहरों से शूटर रतलाम आकर उमंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उमंग पोरवाल की इस बड़ी उपलब्धि पर लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप, एडिशनल कलेक्टर मंडलोई, CSP अभिनव बारंगे, रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश सेठिया और रतलाम पत्रकार संघ के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश पोरवाल ने हर्ष व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

Ratlam News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा 7 दिवसीय “मिशन साहसी” अभियान का शुभारंभ

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) रतलाम नगर ने 7 दिवसीय “मिशन साहसी” अभियान का शुभारंभ किया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस अभियान का शुभारंभ 3 अक्टूबर को हुआ और यह 8 अक्टूबर तक चलेगा। शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महिला थाना प्रभारी श्रीमती लिलियन मालवीय और विशेष अतिथि के रूप में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुश्री ट्विंकल राठौर उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में श्रीमती लिलियन मालवीय ने कहा, “छात्राओं को न केवल शारीरिक आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए, बल्कि साइबर क्राइम से भी सतर्क रहना चाहिए। ऐसे मामलों की तुरंत पुलिस को सूचना देना बेहद जरूरी है।” सुश्री ट्विंकल राठौर ने “मिशन साहसी” अभियान की सराहना करते हुए कहा, “यह अभियान छात्राओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस अभियान के माध्यम से छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने का कार्य लगातार कर रहा है।” एबीवीपी रतलाम नगर अध्यक्ष शुभम तलोदिया ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि यह सात दिवसीय अभियान के अंतर्गत छात्राओं को आत्मरक्षा की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है। इस कार्यक्रम का आयोजन रतलाम नगर के कलीमी कॉलोनी स्थित कराते एकेडमी में किया जा रहा है, जिसमें शहर की युवतियां भाग लेकर आत्मरक्षा के गुर सिख सकती है। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन रतलाम नगर मंत्री सिद्धार्थ मराठा ने किया।

Train Reschedule: लूप लाइन कार्य के कारण दो ट्रेनों का मार्ग बदला, यात्रा से पहले इस वेबसाईट पर चेक जरूर करे

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के कछपुरा रेलवे स्टेशन पर लूप लाइन डालने के लिए प्रस्तावित ब्लॉक के कारण रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली दो ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया है। यह परिवर्तन 06, 08 और 09 अक्टूबर को प्रभावी रहेगा। जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने बताया कि गाड़ी संख्या 11464 जबलपुर-वेरावल एक्सप्रेस 06, 08 और 09 अक्टूबर को जबलपुर से वाया कटनी मुड़वारा-बीना-भोपाल मार्ग से चलेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 11463 वेरावल-जबलपुर एक्सप्रेस 06 और 08 अक्टूबर को वेरावल से वाया भोपाल-बीना-कटनी मुड़वारा होते हुए अपने गंतव्य जबलपुर तक जाएगी। यात्रियों से अनुरोध है कि वे यात्रा की जानकारी के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन करें और अपनी यात्रा की योजना के अनुसार मार्ग परिवर्तनों का ध्यान रखें।

MP News: रतलाम में डीजल से भरी मालगाड़ी के टैंकर हुए बेपटरी, बाल्टियों में भरकर ले गए लोग, ट्रेन सेवाएं प्रभावित

रतलाम -पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। MP News: गुरुवार रात रतलाम-नागदा रेल मार्ग पर एक डीजल से भरी मालगाड़ी के दो टैंकर बेपटरी हो गए, जिससे एक टैंकर आधा पलट गया। हादसे की सूचना मिलते ही रतलाम रेल मंडल (Ratlam Rail Division) के अधिकारी और दुर्घटना रिलीफ ट्रेन तुरंत मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने घटना स्थल पर माइक से अनाउंसमेंट कर लोगों को सतर्क किया, कि कोई भी व्यक्ति आसपास बीड़ी-सिगरेट न पिए और मालगाड़ी से दूर रहे, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीना ने बताया कि रतलाम डीआरएम रजनीश कुमार ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उज्जैन और कोटा जाने वाली ट्रेनों के लिए डाउन लाइन पर यातायात बहाल कर दिया गया है। यह दुर्घटना रतलाम के घटला ब्रिज के पास रात लगभग 10 बजे हुई, जब मालगाड़ी रतलाम से नागदा की ओर जा रही थी। घटनास्थल रतलाम रेलवे स्टेशन (Ratlam Junction) से मात्र 1 किमी की दूरी पर स्थित है। हादसे के बाद मालगाड़ी के टैंकर को पटरी पर लाने की कोशिश जारी रही, जिससे रेलवे लाइन पर यातायात को सामान्य किया जा सके। अगले दिन शुक्रवार को सुबह 10 बजे ट्रेक को सही करते हुए गाड़ियों का परिचालन शुरू किया गया। डीजल रिसाव से हड़कंप, बाल्टियों में भर ले गए डीजलदुर्घटना के बाद एक टैंकर से रात भर डीजल रिसता रहा, डीजल ट्रेक के पास नालियों में बहता रहा। जिसका लोगों ने फायदा उठाया। सुबह होते ही आसपास के लोग बाल्टियां और बर्तन लेकर पहुंचे और नालियों में बह रहे डीजल को इकट्ठा कर अपने साथ ले गए। जिसके हाथ में जो आया चाहे बाल्टी हो, टंकी हो या पानी भरने का कैंपर लेकर नाली के पास पहुंच गए। यह सब रेल अधिकारियों व पुलिस के सामने होता रहा। रेलवे को हुए इस आर्थिक नुकसान का भी आंकलन किया जाएगा। रेल सेवाएं प्रभावित, कई ट्रेनें रि-शेड्यूल करना पड़ीहादसे के कारण दिल्ली-मुंबई डाउन लाइन पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे कई ट्रेनें रतलाम और आसपास के स्टेशनों पर रोकी गईं। रात 12 बजे के बाद अप लाइन से ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ, जिसमें मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को निकालने में सफलता मिली। हालांकि, डाउन लाइन बाधित रही लेकिन अगले दिन सुबह 10 बजे तक स्थिति सामान्य कर दी गई। इससे कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली-मुंबई मार्ग पर मालगाड़ियां पटरी से उतरने पर डीआरएम रजनीश कुमार ने कहा कि ट्रेन के तीन डिब्बे पटरी से उतरी हैं एक तो डिब्बे को उठा लिया गया है दूसरा वाले में थोड़ा दिक्कत है और तीसरा वाला भी माइनर है वो भी जल्द उठा लिया जाएगा। सारे सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। हम कोई ट्रेनें रद्द नहीं कर रहे हैं बस थोड़ी ट्रेनों में देरी हो सकती है। ये ट्रेन राजकोट से आ रही थी और भोपाल के पास बकनिया जा रही थी। पेट्रोलियम पदार्थ रिसाव हो रहा है लेकिन हम लोग सावधानी बरत रहे हैं। जांच की टीम काम कर रही है। पांच ट्रेनों को रि-शेड्यूल किया गया:– गाड़ी संख्या 09546 नागदा-रतलाम स्पेशल (01 घंटा देरी से)– गाड़ी संख्या 09545 रतलाम-नागदा (1.30 घंटा देरी से)– गाड़ी संख्या 19341 नागदा-बिना (1.30 घंटा देरी से)– गाड़ी संख्या 09382 रतलाम-दाहोद (02 घंटा देरी से)– गाड़ी संख्या 09350 दाहोद-आनंद (02 घंटा देरी से) प्रशासन की तत्परता और कार्रवाईरात 1 बजे कलेक्टर राजेश बाथम, अपर कलेक्टर आर.एस. मंडलोई, एसडीएम अनिल भाना और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। बांगरोद इंडियन ऑयल डिपो से भी अधिकारियों को बुलाया गया, और सुरक्षा के लिए आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया। वैगन को हटाने के लिए जेसीबी, क्रेन और पाइप की व्यवस्था की गई। साथ ही, रेत की बोरियां भी मंगवाई गईं ताकि किसी अन्य हादसे से बचा जा सके।

Terrorist Threat : महाकाल मंदिर समेत MP-राजस्थान के स्टेशनों को उड़ाने की धमकी भरा पत्र, लिखा- जिहादियों की मौत का बदला लेंगे!

पत्र मिलने के बाद खुफिया एजेंसिया अलर्ट हो गई हैं। राजस्थान के कई शहरों में सघन चेकिंग भी की जा रही है, राजस्थान, मध्य प्रदेश को खून से रंग देने की साजिश? उज्जैन – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Terrorist Threat: महाकाल मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी देने वाले ने खुद को जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर बताया है। अज्ञात व्यक्ति ने एक पत्र के माध्यम से राजस्थान के हुनमानगढ़ के रेलवे स्टेशन अधीक्षक को दी है। इसमें उज्जैन (Ujjain) रेलवे स्टेशन, हनुमानगढ़ जंक्शन सहित राज्य के श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, बूंदी, उदयपुर, जयपुर रेलवे स्टेशन सहित राजस्थान के कुछ धार्मिक स्थल को आगामी 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। पत्र मिलने के बाद खुफिया एजेंसिया अलर्ट हो गई हैं। राजस्थान के कई शहरों में सघन चेकिंग भी की जा रही है। हनुमानगढ़ के स्टेशन प्रबंधक ने बताया कि पात्र हमारे यहां मिला था, जिसमें राजस्थान और मध्यप्रदेश को खून से रंगने की बात लिखी थी। साथ ही राजस्थान के कई रेलवे स्टेशन और उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Mandir Ujjain) को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। पत्र जीआरपी को सौंप दिया है। पत्र में जम्मू कश्मीर में जेहादियों की हत्या का बदला लेने के लिए स्टेशनों और मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी लिखी है। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को मिला है पत्रराजस्थान के हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन के अधीक्षक नागेंद्र सिंह को एक पत्र मिला है, जिसमें राजस्थान के कई शहर और रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। मंगलवार को मिले पत्र में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के जम्मू कश्मीर के एरिया कमांडर सलीम अंसारी के नाम से पत्र भेजा गया है। जेहादी की मौत का बदला लेंगेपत्र में लिखा है कि हे खुदा मुझे माफ करना जम्मू कश्मीर में मारे जा रहे हमारे जेहादी की मौत का बदला लेंगे। हम ठीक 30 अक्टूबर को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर, गंगानगर और हनुमानगढ़, बूंदी उदयपुर सिटी जयपुर मंडल राजस्थान और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ा देंगे। हम ठीक 2 नवंबर को महाकाल उज्जैन शिव मंदिर और जयपुर के कई धार्मिक स्थान, हवाई अड्डा, मिलिट्री कैंप को बम से उड़ा देंगे। एमपी राजस्थान को खून से रंग देंगेपत्र लिखने वाला ने लिखा है कि हम राजस्थान, मध्य प्रदेश को खून से रंग देंगे। इसके बाद लिखा कि खुदा आफिज, (Jaish E Mohmmad) आतंकवादी संगठन, जैश ए मोहम्मद एरिया कमांडर मो. सलीम अंसारी जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान जिंदाबाद। हालांकि उज्जैन पुलिस को इस बात की सूचना साझा नहीं की गई है। उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि मीडिया से सूचना हमको मिली है। जानकारी लगने के बाद हम सतर्कता बरत रहे है। राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) से संपर्क कर कार्रवाई करेंगे। 10 साल तक की सजा का प्रावधानतहत सजा हो सकती है। किसी भी तरह की बम की धमकी को, भले ही वह मजाक के रूप में दी गई हो, कानून गंभीर अपराध की श्रेणी में रखता है। ऐसी धमकी से अफरातफरी का माहौल बन सकता है। ऐसे में बम की धमकी देने वाले को 10 साल तक की अलग-अलग धाराओं के कई मायनों में ऐसा लगता है कि आतंकवादी गतिविधियों  से प्रेरित होकर या कोई आतंकी साहित्य पढ़कर ऐसा किया गया है तो पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियां अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेशन एक्ट (UAPA) के तहत भी कार्रवाई कर सकती हैं।

Dengue से बचाव: बकरी के दूध की डिमांड अचानक क्यों बढ़ी, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी में इन बातों का रखे ध्यान, क्या कहते है एक्सपर्ट!

विशेषज्ञों की सलाह: डेंगू (Dengue) के घरेलू उपचार में सतर्क रहें, डॉक्टर की सलाह से ही करे घरेलू उपाय!, इन बातों को ध्यान रख बच सकते है आप… पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। बारिश के मौसम के साथ डेंगू (Dengue) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देशभर में डेंगू से बचाव और इलाज के लिए लोग घरेलू उपचारों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गिलोय, पपीते के पत्ते और बकरी का दूध प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञ इन नुस्खों का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दे रहे हैं। रतलाम मेडिकल कॉलेज (GMC Ratlam) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सोहन मंडलोई (Dr. Sohan Mandloi) के अनुसार “डेंगू बुखार के दौरान पपीते के पत्ते और गिलोय जैसे घरेलू नुस्खे कुछ हद तक लाभकारी हो सकते हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपेन और फ्लेवोनोइड्स प्लेटलेट काउंट बढ़ाने और इम्युनिटी को सुधारने में सहायक माने जाते हैं, लेकिन इनका असर वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। इसके साथ ही अधिक मात्रा में इनका सेवन नुकसानदायक हो सकता है, जिससे मतली और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।” इस तरह के कई पेशेंट हमारे पास आते है, जो घर पर इलाज शुरू कर देते है और बाद में उन्हें दोगुनी मार झेलना पड़ती है। बकरी के दूध की मांग बढ़ीडेंगू के इलाज के लिए बकरी के दूध (Got Milk in dengue) की मांग में भी तेजी देखी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, बकरी के दूध में सेलेनियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं और यह गाय के दूध के मुकाबले आसानी से पचने योग्य होता है। इसके चलते कई लोग इसे डेंगू से निपटने के लिए बेहतर मानते हैं। डॉ. सोहन मंडलोई का कहना है की “बकरी का दूध इम्युनिटी बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे डेंगू के मुख्य इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह केवल सहायक हो सकता है, न कि इसके जरिए डेंगू का इलाज किया जा सकता है।” हर्बल ट्रीटमेंट के बारे में चेतावनीडॉ. मंडलोई ने यह भी चेतावनी दी कि घरेलू नुस्खों और हर्बल उपचारों को मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं माना जा सकता। “गिलोय और पपीते के पत्ते जैसी औषधियां इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकती हैं, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।” डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी तरह के घरेलू उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें और डेंगू जैसे गंभीर मामलों में मेडिकल देखरेख को प्राथमिकता दें। लक्षण गंभीर होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।