YouTube Monetization Rules 2027: कमाई के लिए बढ़ी वॉच टाइम और Shorts की शर्त

YouTube Monetization Rules 2027: YouTube ने 2027 से नए क्रिएटर्स के लिए YPP की शर्तें कड़ी करने का ऐलान किया है। वॉच आवर्स और Shorts व्यूज का नया नियम जानें।  नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। YouTube Monetization Rules 2027: YouTube से कमाई शुरू करने की तैयारी कर रहे नए क्रिएटर्स के लिए आने वाला साल चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्लेटफॉर्म ने YouTube Partner Program (YPP) में विज्ञापन और YouTube Premium रेवेन्यू शेयरिंग से जुड़ी पात्रता शर्तों को बढ़ाने की घोषणा की है। नई व्यवस्था के मुताबिक 1 फरवरी 2027 से YPP में नए आवेदन करने वाले क्रिएटर्स को विज्ञापन और YouTube Premium की कमाई के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा वॉच टाइम या Shorts व्यूज पूरे करने होंगे। वॉच आवर्स की सीमा 4,000 से बढ़ाकर 8,000 घंटे और Shorts की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ योग्य व्यूज की जाएगी। हालांकि, 1,000 सब्सक्राइबर की मौजूदा शर्त में बदलाव नहीं किया गया है। पहले से YPP में शामिल क्रिएटर्स पर नए आवेदन की यह बढ़ी हुई एंट्री शर्त लागू नहीं होगी। 2027 से YPP में क्या बदलेगा? YouTube की नई व्यवस्था मुख्य रूप से उन क्रिएटर्स पर लागू होगी जो 1 फरवरी 2027 के बाद YPP के लिए नए सिरे से आवेदन करेंगे। YouTube Monetization की नई पात्रता YouTube के नए नियमों के तहत 1 फरवरी 2027 से नए क्रिएटर्स को विज्ञापन और YouTube Premium से कमाई के लिए पहले से ज्यादा लक्ष्य पूरा करना होगा। लॉन्ग-फॉर्म वीडियो के लिए वॉच टाइम की सीमा 4,000 घंटे से बढ़कर 8,000 घंटे हो जाएगी। Shorts के जरिए पात्रता हासिल करने वालों को 90 दिनों में 1 करोड़ की जगह 2 करोड़ योग्य व्यूज जुटाने होंगे। सब्सक्राइबर की न्यूनतम सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह शर्त पहले की तरह 1,000 सब्सक्राइबर ही रहेगी। लॉन्ग-फॉर्म वीडियो के वॉच आवर्स की गणना पिछले 365 दिनों के आधार पर होगी, जबकि Shorts Views के लिए 90 दिनों की अवधि तय रहेगी। Shorts Creators के लिए भी बदला नियम YouTube ने Shorts से होने वाली विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर भी नया प्रावधान किया है। नई व्यवस्था में Shorts से कमाई जारी रखने के लिए चैनल को हर रोलिंग 90 दिनों में कम से कम 1 करोड़ योग्य Shorts Views हासिल करने होंगे। अगर किसी चैनल के Shorts Views इस सीमा से नीचे चले जाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि पूरा चैनल YPP से बाहर हो जाएगा। ऐसे क्रिएटर्स लंबे वीडियो से होने वाली कमाई जारी रख सकेंगे, लेकिन Shorts से रेवेन्यू शेयरिंग तब तक रुक सकती है, जब तक चैनल दोबारा जरूरी व्यूज हासिल नहीं कर लेता। छोटे क्रिएटर्स के लिए YPP का निचला स्तर जारी हर क्रिएटर के लिए नियम पूरी तरह सख्त नहीं किए गए हैं। YouTube ने YPP के शुरुआती स्तर को फिलहाल बरकरार रखा है। जिन क्रिएटर्स के पास: वे फैन फंडिंग और शॉपिंग जैसे कुछ कमाई वाले फीचर्स के लिए पात्र हो सकते हैं। यह स्तर विज्ञापन और YouTube Premium रेवेन्यू शेयरिंग वाली पूर्ण YPP पात्रता से अलग है। YouTube पर बढ़ रहा है वीडियो और Shorts का इस्तेमाल YouTube के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखने का समय लगातार बढ़ रहा है। कंपनी ने बताया है कि Shorts को रोजाना करीब 200 अरब व्यूज मिल रहे हैं, जबकि टीवी स्क्रीन पर हर दिन एक अरब घंटे से अधिक YouTube कंटेंट देखा जाता है। बढ़ती दर्शक संख्या और क्रिएटर्स की संख्या के बीच प्लेटफॉर्म अपने पार्टनर प्रोग्राम में बदलाव कर रहा है। नए क्रिएटर्स के लिए क्या मायने रखता है? जो लोग 2027 में नया YouTube चैनल शुरू करने या मौजूदा चैनल को मोनेटाइज करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अब सिर्फ सब्सक्राइबर बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। लंबे वीडियो बनाने वाले क्रिएटर्स को लगातार वॉच टाइम बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। Shorts पर निर्भर चैनलों के लिए नियमित और बड़े पैमाने पर योग्य व्यूज हासिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा। यानी आने वाले समय में कंटेंट की गुणवत्ता, दर्शकों की रिटेंशन और लगातार व्यूज कमाई की राह में अहम भूमिका निभाएंगे। YouTube छोटे क्रिएटर्स के लिए नए कमाई विकल्प भी ला रहा है कंपनी ने केवल पात्रता शर्तों में बदलाव की बात नहीं की है। छोटे क्रिएटर्स की कमाई बढ़ाने के लिए YouTube Shopping बोनस, ब्रांड डील इंसेंटिव और ट्रेंडिंग कंटेंट से जुड़े अन्य कमाई विकल्पों पर भी काम कर रहा है। YouTube Premium Lite को भी उन देशों में उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है जहां Premium सेवा मौजूद है। भारत में Premium Lite नवंबर 2025 से उपलब्ध है। कंपनी का कहना है कि Premium सब्सक्रिप्शन से क्रिएटर्स की कमाई में भी योगदान बढ़ सकता है। क्या मौजूदा YouTubers की कमाई तुरंत प्रभावित होगी? नए नियमों का सबसे बड़ा असर 1 फरवरी 2027 के बाद YPP में नए आवेदन करने वाले क्रिएटर्स पर पड़ेगा। जो क्रिएटर्स पहले से YPP का हिस्सा हैं, उनके लिए नई बढ़ी हुई प्रवेश सीमा लागू नहीं होगी। हालांकि Shorts से रेवेन्यू शेयरिंग के लिए 90 दिनों में 1 करोड़ योग्य व्यूज वाली शर्त अलग से महत्वपूर्ण होगी। इसलिए मौजूदा Shorts क्रिएटर्स को भी अपने चैनल के योग्य व्यूज पर नजर रखनी होगी।

MP News: ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

MP News: ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनेगा। 500 करोड़ की केंद्रीय सहायता, 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार का रास्ता खुलेगा। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ)विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए मोबाइल, नेटवर्किंग उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स और भविष्य की 5जी-6जी तकनीकों के उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत-2047 के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब देश केवल टेलीकॉम सेवाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक दूरसंचार उपकरणों का वैश्विक निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार देगी 500 करोड़ रुपये की सहायता परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है। करीब 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर तैयार होगा, ताकि उद्योगों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में सुविधा मिल सके। एक ही परिसर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं इस एकीकृत औद्योगिक परिसर में दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं— इससे भारत में हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार सरकार के अनुसार इस परियोजना के माध्यम से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगभग 9 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होगा। इससे 10 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। पहले चरण में इन कंपनियों का निवेश परियोजना के पहले चरण में देश की प्रमुख कंपनियां निवेश करेंगी। इनमें शामिल हैं— इन कंपनियों की ओर से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया जाएगा, जिससे 4,500 से अधिक उच्च वेतन वाले रोजगारसृजित होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी संचालन परियोजना के संचालन और प्रबंधन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा। इसमें— यह मॉडल केंद्र और राज्य सरकार की साझा भागीदारी वाली महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल होगा। केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत को दूरसंचार क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए मजबूत स्वदेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। उनके अनुसार ग्वालियर का यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन भारत को दुनिया पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया को भारत पर निर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

MP News: इंदौर मेट्रो के आसपास होगा बड़ा बदलाव, 31 किमी कॉरिडोर पर बनेंगे 4 TOD क्लस्टर, हाईराइज डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

MP News: इंदौर मेट्रो के 31.32 किमी रूट के आसपास 4 TOD क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। जानिए किन इलाकों में होगा हाईराइज डेवलपमेंट और क्या होंगे बड़े बदलाव। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर शहर आने वाले वर्षों में एक नए शहरी विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना के साथ अब शहर में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) की योजना को भी गति दी जा रही है। इसका उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के आसपास आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं वाले क्षेत्रों का विकास करना है। 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे में विशेष विकास क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ शहर के विकास की दिशा भी बदल सकती है। इसके लिए पहले चरण में चार प्रमुख क्लस्टर तैयार किए गए हैं। Indore Metro TOD Corridor क्या है? ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) ऐसा शहरी विकास मॉडल है, जिसमें मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाता है। इस मॉडल का उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। पहले चरण में इन 4 क्लस्टर में होगा विकास शुरुआत में मेट्रो रूट के प्रमुख स्टेशनों को जोड़ते हुए चार क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। पहला क्लस्टर दूसरा क्लस्टर तीसरा क्लस्टर चौथा क्लस्टर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास क्या-क्या बदलेगा? TOD योजना लागू होने के बाद मेट्रो रूट के आसपास कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रमुख विकास कार्य शहरवासियों और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव TOD कॉरिडोर तैयार करने वाली एजेंसी अरुप (Arup) शहर के नागरिकों, शहरी योजनाकारों और संबंधित विशेषज्ञों से सुझाव भी लेगी। इन सुझावों के आधार पर विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर मॉडल तैयार हो सके। मास्टर प्लान के साथ होगा समन्वय इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) के इंदौर रीजनल सेंटर द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि TOD योजना को इंदौर के नए मास्टर प्लान और रीजनल प्लान के साथ जोड़ा जाएगा। आईटीपीआई इंदौर रीजनल सेंटर की सचिव प्रकृति सेठी और चेयरमैन डी. एल. गोयल के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर TOD से जुड़े नियमों और विकास संबंधी प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि परियोजना प्रभावी ढंग से लागू हो सके। विशेषज्ञों ने साझा किए अंतरराष्ट्रीय अनुभव कार्यक्रम में अरुप कंसल्टेंसी फर्म के विशेषज्ञ जिग्नेश मेहता और रोमी राय ने विभिन्न शहरों में लागू TOD मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास क्लस्टर आधारित विकास से शहरी यातायात, भूमि उपयोग और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

AI Chatbots आपकी सोच और आदतों तक पढ़ रहे हैं? जानिए कितना जानते हैं आपके बारे में और कैसे रखें अपनी प्राइवेसी सुरक्षित

AI Chatbots आपकी बातचीत से आपकी आदतों, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और व्यक्तित्व का अनुमान लगा सकते हैं। जानिए ChatGPT और Gemini की मेमोरी कैसे बंद करें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। AI Chatbots: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट्स अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। नौकरी, पढ़ाई, स्वास्थ्य, यात्रा, खरीदारी और ऑफिस के काम से जुड़े सवालों के लिए करोड़ों लोग ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जितनी तेजी से इनका उपयोग बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से प्राइवेसी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI चैटबॉट्स केवल आपके सवालों का जवाब नहीं देते, बल्कि समय के साथ आपकी बातचीत से आपके बारे में कई ऐसे अनुमान भी लगा लेते हैं, जो आपने कभी सीधे तौर पर उन्हें नहीं बताए होते। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मेमोरी और पर्सनलाइजेशन सुविधाएं उपयोगकर्ता को बेहतर अनुभव देती हैं, लेकिन यदि इन्हें समझदारी से इस्तेमाल न किया जाए तो यह आपकी निजी जानकारी से जुड़े जोखिम भी बढ़ा सकती हैं। AI Chatbots आपकी कौन-कौन सी बातें समझ सकते हैं? एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार ने ChatGPT और Gemini से पूछा कि वे उसके बारे में क्या जानते हैं। जवाब में चैटबॉट्स ने उसकी पुरानी बातचीत के आधार पर कई ऐसे अनुमान बताए जो उसने कभी सीधे साझा नहीं किए थे। इनमें शामिल थे— यानी, AI केवल आपके शब्दों को नहीं पढ़ता बल्कि बातचीत के पैटर्न को भी समझने की कोशिश करता है। किन जानकारियों का अनुमान लगा सकते हैं AI Chatbots? 1. आर्थिक स्थिति अगर आप अक्सर किसी महंगी कार, गैजेट, निवेश या खरीदारी से जुड़े सवाल पूछते हैं तो AI आपकी संभावित आय या आर्थिक स्थिति का अनुमान लगा सकता है। 2. स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बार-बार किसी बीमारी, दवा या इलाज से जुड़े सवाल पूछने पर AI यह समझ सकता है कि आपको किस तरह की स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। 3. व्यक्तित्व और व्यवहार आप सवाल किस तरह पूछते हैं, कितनी बार जानकारी दोबारा मांगते हैं या किस तरह निर्णय लेते हैं—इन सबके आधार पर AI आपके व्यक्तित्व के बारे में अनुमान लगा सकता है। 4. जीवनशैली यात्रा, खानपान, काम करने के तरीके और रोजमर्रा की आदतों से जुड़े सवाल आपकी लाइफस्टाइल का संकेत दे सकते हैं। ChatGPT और Gemini में मेमोरी कैसे बंद करें? यदि आप नहीं चाहते कि AI भविष्य की बातचीत के लिए आपकी जानकारी याद रखे, तो यह विकल्प बंद किया जा सकता है। ChatGPT में इसके बाद ChatGPT नई बातचीत के लिए आपकी जानकारी याद नहीं रखेगा। Gemini में ऐसा करने पर Gemini आपकी बातचीत के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी सहेजना और उसका उपयोग करना बंद कर देगा। इन सवालों से जान सकते हैं AI आपके बारे में क्या समझता है अगर आप यह जानना चाहते हैं कि AI ने आपकी बातचीत से क्या निष्कर्ष निकाले हैं, तो ये प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं। AI इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां

iPhone 17e लॉन्च: A19 चिप, MagSafe और 48MP कैमरा के साथ भारत में 64,900 रुपये से शुरू

Apple ने भारत में iPhone 17e लॉन्च किया। जानें A19 चिप, 48MP कैमरा, MagSafe सपोर्ट, 6.1-इंच OLED डिस्प्ले, स्टोरेज वेरिएंट और पूरी कीमत की डिटेल… नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। टेक दिग्गज Apple ने अपनी नई iPhone 17 सीरीज का सबसे किफायती मॉडल iPhone 17e भारत में लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल पिछले साल आए iPhone 16e की जगह लेगा। कंपनी ने इस बार iPhone 17e को कई बड़े अपग्रेड्स के साथ पेश किया है, जिसमें लेटेस्ट A19 चिप, MagSafe सपोर्ट और Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन शामिल हैं। iPhone 17e की कीमत और वेरिएंट भारत में iPhone 17e की शुरुआती कीमत ₹64,900 रखी गई है। यह कीमत 256GB स्टोरेज वेरिएंट के लिए है। वहीं, 512GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹84,900 है।यह स्मार्टफोन तीन कलर ऑप्शन — ब्लैक, सॉफ्ट पिंक और व्हाइट — में उपलब्ध होगा। iPhone 17e के स्पेसिफिकेशन और फीचर्स डिस्प्ले और डिजाइन iPhone 17e में 6.1 इंच का Super Retina XDR (OLED) डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 1,170×2,532 पिक्सल है। इसमें 60Hz रिफ्रेश रेट और Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन मिलता है। फोन को IP68 रेटिंग दी गई है, जिससे यह पानी और धूल से सुरक्षित रहता है। प्रोसेसर और परफॉर्मेंस फोन में लेटेस्ट A19 चिप दी गई है, जिसमें 6-कोर CPU, 4-कोर GPU और 16-कोर Neural Engine शामिल है। डिवाइस 8GB रैम के साथ आता है और 256GB व 512GB स्टोरेज ऑप्शन में उपलब्ध है।यह स्मार्टफोन iOS 26 पर काम करेगा और इसमें Apple Intelligence फीचर्स के साथ एक्शन बटन भी दिया गया है। कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए iPhone 17e में 48MP का रियर कैमरा मिलता है, जो ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) सपोर्ट करता है। कंपनी का दावा है कि इसमें 2x ऑप्टिकल क्वालिटी जूम की सुविधा भी दी गई है।सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 12MP का TrueDepth फ्रंट कैमरा दिया गया है। हालांकि, इसमें Action Mode और Cinematic Video जैसे फीचर्स उपलब्ध नहीं हैं। बैटरी और चार्जिंग iPhone 17e में 20W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। इसके साथ ही 7.5W MagSafe वायरलेस चार्जिंग की सुविधा भी दी गई है, जो इस सेगमेंट में बड़ा अपग्रेड माना जा रहा है। कनेक्टिविटी फोन डुअल सिम (नैनो + eSIM) सपोर्ट के साथ आता है। कनेक्टिविटी फीचर्स में 5G, 4G LTE, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.3, NFC, GPS, GLONASS, Galileo, BeiDou और NavIC शामिल हैं। क्या iPhone 17e है वैल्यू फॉर मनी? A19 चिप, 48MP कैमरा, MagSafe सपोर्ट और प्रीमियम डिजाइन के साथ iPhone 17e को कंपनी ने मिड-रेंज प्रीमियम सेगमेंट में उतारा है। अगर आप लेटेस्ट iPhone अनुभव चाहते हैं लेकिन Pro मॉडल पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते, तो iPhone 17e एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

भारत में जल्द एंट्री करेगा Apple Pay, बड़े बैंकों से तेज बातचीत

Apple Pay India launch update: Apple ICICI, HDFC और Axis Bank से बातचीत में, 2026 के मध्य तक भारत में Apple Pay लॉन्च होने की उम्मीद, UPI और कार्ड पेमेंट दोनों को मिलेगा सपोर्ट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Apple Pay: क्यूपर्टिनो बेस्ड टेक दिग्गज Apple अब भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी देश के प्रमुख बैंकों के साथ बातचीत कर रही है और 2026 के मध्य तक इसे लॉन्च करने की योजना बना रही है। ICICI, HDFC और Axis बैंक से बातचीत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Apple भारत में अपनी कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सर्विस लॉन्च करने के लिए ICICI Bank, HDFC Bank और Axis Bank जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों से बातचीत कर रही है। इसके अलावा कंपनी कार्ड नेटवर्क कंपनियों के साथ भी चर्चा में है। 2026 के मध्य तक लॉन्च का प्लान इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, Apple भारत के बड़े डिजिटल पेमेंट बाजार और युवा यूजर बेस को ध्यान में रखते हुए 2026 के मध्य तक Apple Pay लॉन्च कर सकती है। पहले इसके इस साल के आखिर तक लॉन्च होने की उम्मीद थी, लेकिन अब टाइमलाइन को पहले खिसकाने की तैयारी है। कार्ड पेमेंट से शुरुआत, बाद में UPI इंटीग्रेशन रिपोर्ट में कहा गया है कि Apple Pay शुरुआत में कॉन्टैक्टलेस कार्ड-बेस्ड पेमेंट को सपोर्ट करेगा। इसके बाद कंपनी धीरे-धीरे National Payments Corporation of India (NPCI) के Unified Payments Interface (UPI) को भी अपने प्लेटफॉर्म में शामिल करेगी। इसका मतलब है कि यूजर्स भविष्य में iPhone के जरिए UPI पेमेंट भी कर सकेंगे, जैसा कि अभी Google Pay और PhonePe में होता है। Visa और Mastercard से भी चल रही बातचीत Apple Pay को भारत में लाने के लिए Apple Visa और Mastercard जैसे ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क के साथ भी फीस स्ट्रक्चर और पार्टनरशिप पर चर्चा कर रही है। RBI और रेगुलेटरी मंजूरी का इंतजार भारत में Apple Pay लॉन्च में देरी की सबसे बड़ी वजह रेगुलेटरी अप्रूवल है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को Reserve Bank of India (RBI)और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी का इंतजार है। Google Pay, PhonePe और Amazon Pay से होगा मुकाबला भारत में लॉन्च के बाद Apple Pay का मुकाबला देश के प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे PhonePe, BHIM UPI, Google Pay और Amazon Pay से होगा। हालांकि Apple अपनी सिक्योरिटी और प्रीमियम यूजर एक्सपीरियंस के दम पर बाजार में अलग पहचान बनाने की कोशिश करेगा। क्या बदलेगा यूजर्स के लिए?

गूगल सर्च में दिख रही पर्सनल जानकारी अब मिनटों में हटाएं

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। अगर Google सर्च में आपकी कोई संवेदनशील जानकारी, फोटो या आपत्तिजनक कंटेंट दिख रहा है, तो अब इसे हटाना पहले से कहीं आसान हो गया है। कंपनी ने एक नया टूल जारी किया है, जो यूजर्स को अपनी प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल देता है और आपत्तिजनक कंटेंट को रिपोर्ट करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाता है। कैसे हटाएं गूगल सर्च से अपनी सेंसेटिव जानकारी अब यूजर्स सीधे सर्च रिजल्ट से ही अपनी जानकारी हटाने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें: रिक्वेस्ट सबमिट करने के बाद आप इसे “Results About You” सेक्शन में जाकर ट्रैक भी कर सकते हैं। एक साथ कई इमेज हटाने की सुविधा इस नए अपडेट की खास बात यह है कि अब यूजर एक ही रिक्वेस्ट में कई इमेज या लिंक रिपोर्ट कर सकता है। पहले हर लिंक के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया तेज और आसान हो गई है। रिक्वेस्ट मंजूर होने के बाद क्या होगा अगर आपकी रिक्वेस्ट मंजूर हो जाती है, तो एक खास फीचर इनेबल किया जा सकता है, जिससे भविष्य में आपके नाम से जुड़ी अन्य संवेदनशील जानकारी भी सर्च रिजल्ट में अपने आप फिल्टर हो जाएगी। यह फीचर खासतौर पर एआई और डीपफेक कंटेंट के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए लाया गया है। भारत सरकार ने भी कड़े किए नियम बढ़ते एआई जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को देखते हुए भारत सरकार ने भी सख्त कदम उठाए हैं। नए नियमों के तहत: ये नियम 20 फरवरी से लागू हो चुके हैं। यूजर्स के लिए क्यों जरूरी है यह अपडेट यह नया फीचर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी निजी जानकारी या फोटो बिना अनुमति के इंटरनेट पर मौजूद हैं। अब यूजर्स आसानी से अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रख सकते हैं और ऑनलाइन प्राइवेसी पर ज्यादा नियंत्रण पा सकते हैं।

Sanchar Saathi App: संचार साथी ऐप का प्री-इंस्टॉलेशन नियम खत्म: सरकार ने कहा—यूजर्स की बढ़ती स्वीकार्यता से लिया फैसला

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Sanchar Saathi App: केंद्र सरकार ने Sanchar Saathi App को लेकर जारी विवादों के बीच बड़ा फैसला लेते हुए स्मार्टफोन्स में इसके प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता को वापस ले लिया है। दूरसंचार मंत्रालय ने एक्स पोस्ट के जरिए यह जानकारी देते हुए साफ किया कि ऐप का उद्देश्य केवल साइबर सुरक्षा बढ़ाना है और अब उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से इसे डाउनलोड व अनइंस्टॉल कर सकते हैं। सरकार बोली—ऐप की स्वीकार्यता बढ़ रही, इसलिए हटाई अनिवार्यता मंत्रालय ने कहा कि संचार साथी ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद लोगों को फ्रॉड कॉल, स्कैम और ऑनलाइन अपराधों से बचाना है। सरकार के अनुसार, ऐप की बढ़ती लोकप्रियता को देखने के बाद इसे प्री-इंस्टॉल करने की बाध्यता हटाने का निर्णय लिया गया। एपल ने जताई थी आपत्ति 28 नवंबर को जारी निर्देशों के बाद Apple ने सरकार के आदेश का पालन करने से इनकार किया था।कंपनी ने कहा था कि ऐप का प्री-इंस्टॉलेशन iPhone यूजर्स की प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है। Apple ने रॉयटर्स से कहा था कि वे अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखेंगे। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को बताया बेबुनियाद प्री-इंस्टॉलेशन के आदेश के बाद संसद में राजनीतिक घमासान मच गया था। दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में कहा कि संचार साथी ऐप से किसी भी तरह की जासूसी संभव नहीं है। यह ऐप सिर्फ जन सुरक्षा के लिए बनाया गया है। 1.4 करोड़ लोगों ने ऐप किया डाउनलोड सरकार के मुताबिक: यह ऐप के प्रति बढ़ते भरोसे और जागरूकता को दर्शाता है। संचार साथी ऐप क्यों है चर्चा में?

WhatsApp New Rules 2025: बिना एक्टिव SIM नहीं चलेगा WhatsApp, वेब यूजर्स के लिए हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट अनिवार्य

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। WhatsApp New Rules 2025:भारत सरकार मैसेजिंग ऐप्स के लिए साइबर सुरक्षा नियमों को और सख्त करने जा रही है। Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत अब WhatsApp सहित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को एक्टिव SIM आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम अपनाना होगा। नए नियम लागू होने के बाद WhatsApp उसी डिवाइस पर चलेगा जिसमें एक्टिव सिम कार्ड लगा होगा। बिना एक्टिव SIM नहीं चलेगा WhatsApp अब तक WhatsApp एक बार वेरिफिकेशन के बाद बिना किसी दोबारा जांच के चलता था, भले ही सिम फोन में हो या न हो।लेकिन नए नियमों के बाद ऐप को लगातार यह जांचना होगा कि सिम: अगर सिम हटाया गया, निष्क्रिय हुआ या बदल दिया गया तो WhatsApp तुरंत बंद हो जाएगा। WhatsApp Web पर हर 6 घंटे में होगा ऑटो लॉगआउट सरकार WhatsApp Web और Desktop App के लिए भी सिक्योरिटी बढ़ा रही है।प्रस्तावित नियमों के अनुसार: सरकार का मानना है कि इससे पब्लिक या ऑफिस कंप्यूटर पर खाते के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। सभी मैसेजिंग ऐप्स पर लागू होगा नियम यह नियम सिर्फ WhatsApp पर नहीं, बल्कि इन पर भी लागू होगा: सभी प्लेटफॉर्म्स को 90 दिनों के अंदर एक्टिव SIM लिंकिंग सिस्टम लागू करना होगा। सरकार नए नियम क्यों ला रही है? डिजिटल फ्रॉड, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन स्कैम में तेजी आने के कारण सरकार साइबर सुरक्षा मजबूत करना चाहती है।सरकार का मानना है कि: Cellular Operators Association of India (COAI) के अनुसार मोबाइल नंबर भारत में सबसे भरोसेमंद पहचान है, इसलिए इसे सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाया जा रहा है। कौन से यूजर्स होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित? भारत में 50 करोड़ से अधिक WhatsApp यूजर्स हैं।नियम लागू होने के बाद परेशानी इन यूजर्स को हो सकती है: क्या नए नियम वास्तव में असरदार होंगे? एक्सपर्ट्स की राय मिश्रित है।कुछ कहते हैं: लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं: आगे क्या? WhatsApp सहित सभी ऐप्स को नए नियम लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है।अगर सब कुछ समय पर लागू हुआ तो:

MP News: MP e-Seva Portal: एक क्लिक पर 56 विभागों की 1700 सेवाएं, मध्यप्रदेश ने बढ़ाया डिजिटल गवर्नेंस का कदम

भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप” की शुरुआत की है। यह पोर्टल नागरिकों को 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य है—सुगम, सुरक्षित और स्मार्ट शासन को हर नागरिक तक पहुंचाना। मुख्यमंत्री का विजन: Digital Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “एमपी ई-सेवा पोर्टल” नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति दिलाने वाला प्रभावी माध्यम है। अब कोई भी व्यक्ति अपनी ज़रूरत की सेवा के लिए न केवल ऑनलाइन आवेदन कर सकता है, बल्कि उसकी स्थिति को ट्रैक भी कर सकता है। क्यों खास है MP e-Seva? सुविधाएं विवरण उपलब्ध सेवाएं 1700 से भी अधिक शामिल विभाग. 56 सरकारी विभाग आवेदन प्रक्रिया. 100% ऑनलाइन पोर्टल + ऐप. दोनों माध्यम उपलब्ध लाभ समय की बचत, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार में कमी भविष्य का लक्ष्य- एआई आधारित सेवाएं और ग्राम स्तर तक पहुँच कैसे करें उपयोग?

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