MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी पर क्यों बढ़ा विवाद, किसानों का आंदोलन किस बात को लेकर है?

MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। जानिए सरकार मूंग की खेती को क्यों हतोत्साहित कर रही है और किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसानों और सरकार के बीच मूंग खरीदी को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। राजधानी भोपाल में किसान संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। किसानों का आरोप है कि सरकार समर्थन मूल्य पर उनकी पूरी उपज नहीं खरीद रही, जबकि खेती के दौरान उन्हें भारी लागत उठानी पड़ी है। दूसरी ओर राज्य सरकार का तर्क है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग के बजाय उड़द जैसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की, जिससे खरीदी और भंडारण की समस्या और बढ़ गई। सरकार और किसानों के बीच यही मतभेद अब आंदोलन का मुख्य कारण बन गया है। आइए जानते हैं कि पूरा विवाद आखिर क्या है और दोनों पक्षों की दलीलें क्या हैं। मूंग की खेती को लेकर सरकार की क्या दलील है? राज्य सरकार का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल होता है। इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग की जगह उड़द की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार ने उड़द की समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी और प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की थी। फिर भी किसानों ने मूंग की खेती क्यों बढ़ाई? किसानों का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग कम समय में तैयार हो जाती है और बेहतर मुनाफा देती है। यही कारण है कि इस वर्ष प्रदेश में लगभग 14.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई की गई। तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार इस सीजन में लगभग 20.16 लाख टन मूंग उत्पादन होने की संभावना है। खरीदी को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ? भारत सरकार ने इस सीजन में 4.54 लाख टन मूंग खरीदी का लक्ष्य तय किया। राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कुल अनुमानित उत्पादन का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। किसानों का आरोप है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन का मानक बहुत कम निर्धारित किया, जिससे उनकी पूरी उपज खरीदी नहीं जा सकी। किसानों की सबसे बड़ी आपत्ति क्या है? किसानों का कहना है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन करीब 1,419 किलोग्राम माना, जबकि वास्तविक उत्पादन 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। उनका कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में लगातार सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कई बार कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। ऐसे में लागत काफी अधिक आती है और सीमित खरीदी से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंदोलन का असर खरीदी पर भी दिखा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मूंग बेचने के लिए 3.47 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था। लेकिन विरोध के चलते केवल करीब 82 हजार किसानों ने ही अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेची। इसे किसान संगठनों ने खरीदी प्रक्रिया के विरोध का संकेत बताया है। गोदामों में पहले से पड़ा है भारी स्टॉक सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग अभी भी सरकारी गोदामों में रखी हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये है। कमजोर गुणवत्ता और बाजार में सीमित मांग के कारण इस स्टॉक की बिक्री भी चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि सरकार अतिरिक्त खरीदी को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। किसान संगठन ने क्या कहा? राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यदि सरकार मूंग को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानती है तो उसमें इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और रसायनों की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार पहले किसानों को मूंग उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती रही है, तो अब समर्थन मूल्य पर खरीदी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

MP News: एमपी के छात्रों को बड़ी राहत! निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस घटाने की तैयारी, सालाना शुल्क 35 हजार करने का प्रस्ताव

MP News: मध्य प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना करने का प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलने पर लाखों छात्रों को सस्ती इंजीनियरिंग शिक्षा का लाभ मिल सकता है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो छात्रों को सालाना फीस में बड़ी राहत मिल सकती है। शुल्क विनियामक समिति (FRC) को भेजे गए प्रस्ताव में कई निजी संस्थानों ने वार्षिक शिक्षण शुल्क को घटाकर 35 हजार रुपये करने की मांग की है। मौजूदा समय में अधिकांश निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस 40 हजार से 60 हजार रुपये के बीच है। फीस कम होने से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों के लिए भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधिक किफायती हो सकती है। इससे निजी कॉलेजों में लंबे समय से खाली रह रही सीटों के भरने की भी उम्मीद जताई जा रही है। क्यों घटाई जा रही है इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस? प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग संस्थान पिछले कई वर्षों से छात्रों की कमी का सामना कर रहे हैं। प्रवेश कम होने के कारण कॉलेजों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में 58 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर, इस दौरान केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हुआ है। निजी कॉलेजों में पिछले वर्षों के दौरान औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाया, जबकि सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। कॉलेजों का क्या है तर्क? फीस कम करने का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का कहना है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से प्रति छात्र खर्च लगातार बढ़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि यदि फीस कम होगी तो— विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं छात्रों की संख्या घटने का कारण? शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इंजीनियरिंग में दाखिले कम होने के पीछे कई वजहें हैं। प्रमुख कारण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी यदि प्रस्ताव मंजूर होता है ध्यान दें: फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय शुल्क विनियामक समिति (FRC) की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। शुल्क विनियामक समिति की मंजूरी का इंतजार कॉलेजों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अब शुल्क विनियामक समिति विचार करेगी। यदि समिति इसे मंजूरी देती है तो आगामी शैक्षणिक सत्र में नई फीस लागू की जा सकती है। हालांकि अभी तक समिति की ओर से अंतिम निर्णय जारी नहीं किया गया है।

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी की मौत का खुलासा, हत्या को हादसा दिखाने की रची गई साजिश

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी पलक काशिव हत्याकांड का बड़ा खुलासा। प्रेमी ने शादी से इनकार पर गला घोंटा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगाई और हादसा दिखाने की साजिश रची। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर में निजी बैंक की कर्मचारी पलक काशिव की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में इसे गैस रिसाव और आग से जुड़ा हादसा माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और साइबर जांच ने पूरी कहानी बदल दी। पुलिस के मुताबिक यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी मयंक शाक्य शादी के लिए लगातार दबाव बना रहा था। जब पलक ने शादी से इनकार कर दिया तो उसने कथित तौर पर उसकी हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करने की बात भी पुलिस के सामने कही है। इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच की मदद से हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। कैसे सामने आई हत्या की सच्चाई? पलक काशिव का शव सोमवार को तपेश्वरी क्षेत्र स्थित फ्लैट में मिला था। परिवार के लोग दो दिनों से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। जब मकान मालिक फ्लैट पहुंचा तो पलक मृत अवस्था में मिली। मौके पर गैस का बर्नर खुला था और गैस का रिसाव हो रहा था। रसोई में कटी हुई सब्जियां भी रखी थीं। शुरुआती हालात देखकर ऐसा लगा कि किसी घरेलू हादसे में उसकी मौत हुई होगी। इसी आधार पर पुलिस ने पहले दुर्घटना की संभावना मानकर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच की दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक नकाबपोश युवक तेज़ी से कॉलोनी से निकलता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने पलक के परिचित लोगों की जानकारी जुटाई और साइबर टीम की मदद से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की। तकनीकी जांच में मयंक शाक्य की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। दतिया से गिरफ्तारी, पूछताछ में कबूल किया अपराध पुलिस ने आरोपी मयंक शाक्य को दतिया से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पहले पलक का गला दबाया। जब वह बेहोश हो गई तो उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घटना को हादसा साबित करने के लिए गैस का बर्नर भी खुला छोड़ दिया, ताकि ऐसा लगे कि आग गैस रिसाव से लगी थी। गाने के शौक ने कराई थी दोनों की मुलाकात जांच में यह भी सामने आया कि पलक और मयंक की पहचान स्टार मेकर्स ऐप के जरिए हुई थी। दोनों को गाने का शौक था और इसी प्लेटफॉर्म पर उनकी दोस्ती हुई थी। समय के साथ दोनों संपर्क में आए, लेकिन शादी को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए। पुलिस जांच में क्या-क्या सामने आया? मुख्य तथ्य

Ratlam News: रतलाम में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लाखों रुपये का डोडाचूरा बरामद

Ratlam News: रतलाम के बड़ावदा थाना क्षेत्र में पुलिस ने 290 किलो डोडाचूरा और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की। कार्रवाई के दौरान दो आरोपी मौके से फरार हो गए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बड़ावदा थाना पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली से 290 किलोग्राम डोडाचूरा बरामद किया है। जब्त किए गए मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 14 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ट्रैक्टर लेकर भाग निकला। पीछा किए जाने पर चालक और उसका साथी ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए। पुलिस ने वाहन की तलाशी ली तो ट्रॉली में प्लास्टिक के कट्टों में भरा डोडाचूरा मिला। फिलहाल पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। गश्त के दौरान पुलिस को देखकर भागे आरोपी जावरा एसडीओपी संदीप कुमार के अनुसार, बड़ावदा थाना पुलिस की टीम नियमित रात्रि गश्त पर थी। इसी दौरान एक बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली संदिग्ध स्थिति में दिखाई दी। जब पुलिस ने वाहन रोकने का संकेत दिया तो चालक तेजी से वाहन लेकर भाग निकला। पुलिस टीम ने पीछा किया, जिसके बाद आरोपी ग्राम सिंदुरकिया स्थित शासकीय मिडिल स्कूल के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर झाड़ियों की ओर भाग गए। 13 कट्टों में मिला 290 किलो डोडाचूरा पुलिस ने मौके पर छोड़ी गई ट्रॉली की तलाशी ली। जांच के दौरान ट्रॉली में रखे 13 प्लास्टिक के कट्टों में अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा मिला। तौल कराने पर इसका कुल वजन 290 किलोग्राम निकला। पुलिस के अनुसार इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 14.50 लाख रुपये है। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज बरामद डोडाचूरा और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली को पुलिस ने जब्त कर लिया है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अब ट्रैक्टर-ट्रॉली के मालिक और फरार आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। संभावित ठिकानों पर दबिश पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी कार्रवाई के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही वाहन के स्वामित्व और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

Ratlam News: रतलाम में वन भूमि विवाद बना खूनी संघर्ष, पहाड़ी पर युवक की गला रेतकर हत्या, पिता और भाई भी घायल

Ratlam News: रतलाम के बाजना थाना क्षेत्र के कागलीखोरा गांव में वन विभाग की जमीन के विवाद में 18 वर्षीय युवक की हत्या कर दी गई। पिता और भाई घायल, पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के बाजना थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह वन विभाग की जमीन को लेकर चला आ रहा विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। कागलीखोरा गांव की पहाड़ी पर खेती की हकाई करने पहुंचे एक परिवार पर हमला कर दिया गया, जिसमें 18 वर्षीय युवक की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई। हमले में मृतक के पिता और बड़े भाई भी घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर बाजना थाना पुलिस, एफएसएल टीम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच वन विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। कागलीखोरा गांव की पहाड़ी पर हुआ हमला पुलिस के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे लक्ष्मण (18) पुत्र बादरिया अपने पिता बादरिया और बड़े भाई नारायण (20) के साथ गांव की पहाड़ी पर वन भूमि की हकाई करने पहुंचे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के 6 से 7 लोग वहां पहुंचे। बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में लक्ष्मण के गले पर गंभीर वार किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता और भाई भी हमले में घायल हो गए। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से देर से पहुंची सूचना घटना जिस इलाके में हुई, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण पुलिस को तत्काल सूचना नहीं मिल सकी। करीब 10:30 बजे डायल-112 के माध्यम से पुलिस को हत्या की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही बाजना थाना प्रभारी रविंद्र दंडोतिया पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद रतलाम से एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल भी घटनास्थल पहुंचे और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बाजना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां दोपहर में पोस्टमार्टम कराया गया। वन विभाग की जमीन को लेकर पुराना विवाद पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच गांव की पहाड़ी पर स्थित वन विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। इसी पुराने विवाद ने मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हमले के पीछे की परिस्थितियों को भी खंगाल रही है। छह आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज बाजना थाना पुलिस ने हत्या सहित अन्य धाराओं में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दर्ज आरोपियों में शामिल हैं— पुलिस के अनुसार सभी आरोपी एक ही परिवार के सदस्य हैं। कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा? बाजना थाना प्रभारी रविंद्र दंडोतिया ने बताया कि मृतक की उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। परिजन उसकी उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बता रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने कहा कि डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मामले के सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच की जा रही है।

MP News: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल तक सहमति से बने संबंध को नहीं माना दुष्कर्म

MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल तक सहमति से बने संबंधों को दुष्कर्म नहीं मानते हुए केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज रेप की FIR और लंबित आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सहमति से बने संबंधों और दुष्कर्म के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दो बालिग अपनी स्वतंत्र इच्छा से लंबे समय तक संबंध में रहे हैं और सहमति किसी झूठे वादे, धमकी या दबाव के आधार पर नहीं ली गई है, तो ऐसे मामले में दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर भोपाल निवासी एक केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनाया। यह निर्णय सहमति (Consent) और झूठे विवाह के वादे से जुड़े मामलों में कानूनी दृष्टिकोण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ता एक केंद्रीय कर्मचारी है, जिसके खिलाफ उसकी विवाहित सहकर्मी ने भोपाल के छोला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया। साथ ही शादी का झांसा देकर करीब चार वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था और मामला ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन था। हाईकोर्ट ने किन तथ्यों पर दिया फैसला? सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों का विस्तृत परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता: अदालत ने यह भी माना कि दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे और रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने महिला को ब्लैकमेल किया, धमकाया या झूठे विवाह के वादे से उसकी सहमति प्राप्त की। अदालत ने क्या कहा? न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि यदि दो बालिग बिना किसी दबाव, भय या झूठे प्रलोभन के अपनी स्वतंत्र इच्छा से लंबे समय तक संबंध में रहते हैं, तो केवल बाद में विवाद उत्पन्न होने से उस संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने का आदेश दिया। फैसले का कानूनी महत्व यह फैसला इस सिद्धांत को दोहराता है कि दुष्कर्म के मामलों में प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है। यदि सहमति स्वतंत्र रूप से दी गई हो और उसे धोखे, धमकी, दबाव या झूठे विवाह के वादे से प्राप्त न किया गया हो, तो अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेती है।

MP News: मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख किसानों को ₹3,300 करोड़ की बड़ी सौगात

MP News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता राशि ट्रांसफर की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को खंडवा में आयोजित राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹3,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित की। नई कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से किसान, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। ₹3,300 करोड़ की राशि सीधे किसानों के खातों में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डिजिटल सिंगल-क्लिक प्रणाली के जरिए 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,300 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की। सरकार का कहना है कि यह आर्थिक सहायता किसानों को खेती से जुड़े खर्च पूरे करने और बेहतर कृषि तकनीक अपनाने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, “राज्य के सभी किसानों को बहुत-बहुत बधाई। हमारी सरकार हर स्थिति में आपके साथ मजबूती से खड़ी है।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। कृषि प्रदर्शनी का किया निरीक्षण कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने कृषि मशीनरी, आधुनिक खेती की तकनीकों और विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शकों और किसानों से बातचीत कर खेती में नवाचारों की जानकारी ली। इस दौरान खंडवा जिले के कई प्रगतिशील किसानों को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

Ratlam News: रतलाम में शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 10 लाख की साइबर ठगी, पुलिस ने 5 लाख से ज्यादा रकम कराई होल्ड

Ratlam News: रतलाम में फेसबुक लिंक के जरिए शेयर मार्केट निवेश का झांसा देकर 10 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर 5 लाख से अधिक राशि होल्ड कराई। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: शेयर मार्केट में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच रतलाम के एक निवेशक को भारी पड़ गया। फेसबुक पर मिले एक लिंक के जरिए साइबर ठगों ने उसे निवेश का झांसा दिया और अलग-अलग किस्तों में 10 लाख रुपये से अधिक की रकम अपने खातों में जमा करा ली। जब पीड़ित ने निवेश की गई राशि निकालने की कोशिश की तो संबंधित एप्लिकेशन बंद हो चुकी थी। शिकायत मिलते ही रतलाम साइबर सेल ने मामले में तेजी से कार्रवाई की। जांच के दौरान ठगों के बैंक खातों में पहुंची 5 लाख रुपये से अधिक की राशि होल्ड करवा दी गई। न्यायालय की प्रक्रिया के बाद पीड़ित को अब तक 2.68 लाख रुपये वापस मिल चुके हैं, जबकि शेष राशि लौटाने की प्रक्रिया जारी है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश संबंधी ऑफर और अनजान लिंक कितने खतरनाक हो सकते हैं। कैसे हुई 10 लाख रुपये की साइबर ठगी? मामला स्टेशन रोड थाना क्षेत्र का है। पीड़ित ने 12 मार्च 2026 को रतलाम साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि फेसबुक पर मिले एक लिंक के माध्यम से उसे शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का दावा किया गया। लालच में आकर उसने 27 फरवरी से 12 मार्च 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि निवेश के नाम पर जमा कर दी। ठग लगातार अधिक लाभ का भरोसा देकर और पैसे निवेश करने के लिए दबाव बनाते रहे। एप्लिकेशन बंद होते ही सामने आई ठगी जब पीड़ित ने निवेश की गई रकम निकालने (विड्रॉल) का प्रयास किया तो संबंधित एप्लिकेशन खुलना बंद हो गई। इसके बाद उसे साइबर ठगी का अहसास हुआ और उसने तुरंत रतलाम साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर सेल ने ऐसे बचाई लाखों रुपये की राशि शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामला नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज किया। इसके बाद बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर ठगों के खातों में पहुंची ₹5,04,126 की राशि होल्ड करवाई गई। वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायालय ने यह राशि पीड़ित को लौटाने के आदेश जारी किए। आदेश के पालन में अब तक ₹2,68,907पीड़ित के खाते में वापस जमा किए जा चुके हैं। बाकी राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2026 में रतलाम पुलिस की बड़ी सफलता रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक साइबर ठगी के मामलों में ₹86,28,026 की राशि ठगों के खातों में होल्ड करवाई जा चुकी है। इनमें से ₹20,23,739 पीड़ितों को वापस दिलाई जा चुकी है, जबकि शेष मामलों में कानूनी और न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है। राशि रिफंड कराने की कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी सब इंस्पेक्टर जीवन बारिया, हेड कॉन्स्टेबल हिम्मत सिंह तथा कॉन्स्टेबल मोरसिंह और राहुल पाटीदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस की सलाह इन बातों का रखें विशेष ध्यान

MP News: पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर लगेगी सख्त लगाम, फास्ट ट्रैक कोर्ट में होंगे केस

MP News: मध्य प्रदेश सरकार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए नया सख्त कानून लाने जा रही है। फास्ट ट्रैक कोर्ट, संपत्ति कुर्की और AI आधारित सुरक्षा व्यवस्था लागू होगी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान होने वाले पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, फर्जी अभ्यर्थियों और डिजिटल माध्यम से नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संबंधी नया कानून तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून के तहत परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। केवल जेल और जुर्माना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आरोपियों की संपत्ति भी कुर्क की जा सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि ईमानदार अभ्यर्थियों का विश्वास बनाए रखने के लिए परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा सख्त कानून राज्य सरकार जिस नए कानून की तैयारी कर रही है, उसमें परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों पर विशेष फोकस रहेगा। प्रस्तावित कानून के तहत निम्न मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा— इन मामलों में कठोर दंड, आर्थिक जुर्माना, संपत्ति कुर्की, त्वरित जांच और शीघ्र अभियोजन की व्यवस्था की जाएगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई सरकार का उद्देश्य केवल अपराध दर्ज करना नहीं बल्कि समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना भी है। इसलिए परीक्षा से जुड़े गंभीर मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का प्रस्ताव है, जिससे लंबित मामलों में तेजी से फैसला हो सके। भर्ती परीक्षाओं में होंगे बड़े बदलाव राज्य सरकार सामान्य प्रशासन विभाग, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती परीक्षाओं के नियमों में भी बदलाव कर रही है। नियमों के प्रारूप पर दावा-आपत्ति आमंत्रित की जा चुकी है और अब इन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। समान योग्यता वाले पदों के लिए होगी एक ही परीक्षा नई व्यवस्था के तहत एक जैसी पात्रता वाले पदों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। सरकार समान प्रकृति के पदों का समूह बनाएगी और वर्ष में केवल एक संयुक्त परीक्षा आयोजित करने की योजना पर काम कर रही है। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन और परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। AI, बायोमैट्रिक और CCTV से होगी निगरानी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होंगे ये उपाय ऑनलाइन शिकायत प्रणाली भी होगी शुरू भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। अभ्यर्थी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेंगे और तय समय सीमा में शिकायतों का समाधान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए। उनका कहना है कि परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए सख्त कानून लाना इस सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

MP Weather: MP कल का मौसम: 27 जुलाई को पूरे मध्य प्रदेश में बारिश का येलो अलर्ट

MP Weather: 27 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी। जानिए भोपाल समेत किन जिलों में कैसा रहेगा मौसम। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather: मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बना हुआ है और पिछले कई दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 27 जुलाई 2026 के लिए पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार बारिश के साथ गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों से मौसम को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की गई है। यदि आप सोमवार को यात्रा, खेती या किसी अन्य जरूरी काम के लिए घर से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का ताजा अपडेट जानना आपके लिए जरूरी हो सकता है। MP Weather 27 July 2026: क्यों बना हुआ है बारिश का दौर? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट के पास सक्रिय मौसमी प्रणाली का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। इसके साथ ही राजस्थान और मध्य भारत के ऊपर मानसून ट्रफ सक्रिय बनी हुई है। इन दोनों मौसम प्रणालियों की वजह से मध्य प्रदेश में लगातार नमी पहुंच रही है। यही कारण है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है और अगले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह बना रह सकता है। भोपाल समेत पूरे प्रदेश के लिए येलो अलर्ट भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार 27 जुलाई को पूरे मध्य प्रदेश में येलो अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वानुमान के मुताबिक— इन जिलों में अधिक बारिश की संभावना पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अधिकांश स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। इन जिलों में कई स्थानों पर बारिश इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। इन जिलों में भी हो सकती है बारिश कुछ अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। इनमें शामिल हैं— मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों और किसानों के लिए कुछ जरूरी सावधानियां जारी की हैं।

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