Ratlam News: रतलाम जिला अस्पताल में डॉक्टर पर हमला: बच्ची के फ्रैक्चर का कारण पूछते ही थप्पड़ और मारपीट

रतलाम जिला अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश भूरिया पर मरीज के परिजन ने हमला कर दिया। डॉक्टर से मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक गंभीर घटना सामने आई, जहां इलाज के दौरान बच्ची के फ्रैक्चर का सही कारण पूछना डॉक्टर को भारी पड़ गया। परिजन ने डॉक्टर के साथ न केवल अभद्रता की बल्कि थप्पड़ मारकर मारपीट भी की। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। वीडियो देखे रतलाम जिला अस्पताल में डॉक्टर पर हमला कैसे हुआ? जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल की ओपीडी में ड्यूटी पर तैनात अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश भूरिया के पास शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे चिंगीपुरा निवासी आसिफ पुत्र रशीद अपनी घायल बेटी को इलाज के लिए लेकर पहुंचा। आसिफ ने डॉक्टर को बताया कि उसकी पत्नी बच्ची के कपड़े बदल रही थी, उसी दौरान उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। इस पर डॉक्टर ने चिकित्सकीय अनुभव के आधार पर कहा कि केवल कपड़े बदलने से फ्रैक्चर होना संभव नहीं लगता और चोट का वास्तविक कारण बताया जाए। बताया जा रहा है कि इसी बात से नाराज होकर आरोपी ने डॉक्टर के साथ बहस शुरू कर दी और देखते ही देखते गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ों से हमला कर दिया। आरोप है कि उसने डॉक्टर की नाक और गाल पर नाखून मारकर खरोंच भी पहुंचाई। बीच-बचाव करने पहुंचे कर्मचारियों को भी दी धमकी मारपीट की घटना देखकर ड्रेसर धर्मेंद्र चौधरी और चुन्नीलाल यादव बीच-बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन आरोपी ने उन्हें भी धमकाते हुए जान से मारने की बात कही। शोर सुनकर अन्य डॉक्टर और अस्पताल कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। घटना के दौरान कुछ देर तक ओपीडी में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और मरीजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। डॉक्टरों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग घटना के बाद बड़ी संख्या में डॉक्टर स्टेशन रोड थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सिविल सर्जन डॉ. एपी सिंह ने भी पुलिस को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत के आधार पर स्टेशन रोड थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ मध्यप्रदेश चिकित्सक एवं चिकित्सा से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा अधिनियम, 2008 के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस का बयान थाना प्रभारी जितेन्द्र सिंह जादौन ने बताया कि डॉक्टर की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर आरोपी आसिफ को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। डॉक्टरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल जिला अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ वर्षों में अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए मध्यप्रदेश में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू है, जिसके तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

Ratlam News: रतलाम में लिफ्ट लगाने के नाम पर ₹3.54 लाख की ठगी! इंदौर के कारोबारी पर FIR, कई और लोगों से धोखाधड़ी का आरोप

Ratlam News: रतलाम में लिफ्ट लगाने के नाम पर ₹3.54 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। माणक चौक थाना पुलिस ने अहमदाबाद निवासी कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। कई अन्य लोगों से भी ठगी के आरोप लगे हैं। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम में लिफ्ट लगाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। माणक चौक थाना पुलिस ने अहमदाबाद निवासी एक कारोबारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लिफ्ट लगाने के लिए एडवांस राशि लेने के बावजूद न तो काम किया गया और न ही पैसे लौटाए गए। ₹3.54 लाख एडवांस लेने के बाद नहीं लगाई लिफ्ट पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, नाहरपुरा निवासी और अश्विन टेलीकॉम के संचालक अश्विन मूणत ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी दुकान के ऊपर बने भवन में लिफ्ट लगाने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने इंदौर स्थित केन्स एलेवेटर्स एंड इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर मनीष गुप्ता से संपर्क किया। शिकायत के मुताबिक, लिफ्ट लगाने की कुल लागत 7.20 लाख रुपये तय हुई थी। आरोपी द्वारा एडवांस राशि मांगने पर 11 मार्च 2024 को शिकायतकर्ता ने अपने पिता के यूनियन बैंक खाते से 3.54 लाख रुपये कंपनी के यस बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ काम एफआईआर में कहा गया है कि एडवांस राशि मिलने के बाद आरोपी से कई बार फोन पर संपर्क किया गया और लिफ्ट लगाने के लिए कहा गया, लेकिन उसने न तो लिफ्ट लगाई और न ही एडवांस राशि वापस की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने अवैध लाभ कमाने की नीयत से उनके साथ धोखाधड़ी की। रतलाम के कई अन्य लोगों से भी ठगी का आरोप शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि आरोपी मनीष गुप्ता ने रतलाम के कई अन्य लोगों से भी लिफ्ट लगाने के नाम पर रकम लेकर कथित रूप से धोखाधड़ी की है। एफआईआर में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें मनोज गुप्ता, निलेश चाणोदिया, लोकेश व्यास, मयंक पाठक, मनोज परमार, अनिल मूणत, जयंत जैन, तुषार पोरवाल और आयुष कोठारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ये सभी लोग अपने-अपने स्तर पर पुलिस को अलग से जानकारी उपलब्ध कराएंगे। माणक चौक थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला माणक चौक थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर क्रमांक 370/2026 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी)के तहत प्रकरण कायम किया है। मामले की जांच उप निरीक्षक शांतिलाल चौहान को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान बैंक ट्रांजैक्शन, अनुबंध और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि जांच में अन्य पीड़ितों के आरोप भी सही पाए जाते हैं तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Ratlam News: रतलाम पुलिस का कमाल! CEIR पोर्टल से खोज निकाले 15 गुम मोबाइल, मालिकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

रतलाम पुलिस ने CEIR पोर्टल की मदद से 15 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को लौटाए। जानिए CEIR पोर्टल कैसे करता है चोरी या गुम मोबाइल की तलाश। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए रतलाम की औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने एक बार फिर सराहनीय कार्य किया है। CEIR पोर्टल की मदद से पुलिस ने आम नागरिकों के 15 गुम मोबाइल फोन खोजकर उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। लंबे समय बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आई और उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर सराहना की। वीडियो देखे CEIR पोर्टल की मदद से मिली बड़ी सफलता रतलाम पुलिस द्वारा गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना औद्योगिक क्षेत्र की प्रभारी निरीक्षक गायत्री सोनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के Central Equipment Identity Register (CEIR) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने IMEI नंबर और अन्य तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करते हुए विभिन्न स्थानों से 15 गुम मोबाइल फोन बरामद किए। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने और मोबाइल के वास्तविक स्वामित्व का सत्यापन करने के बाद सभी मोबाइल उनके असली मालिकों को सौंप दिए गए। मोबाइल वापस मिलते ही लोगों ने जताई खुशी आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं बल्कि बैंकिंग, सरकारी दस्तावेज, डिजिटल भुगतान, फोटो, संपर्क और निजी जानकारियों का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। ऐसे में मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने रतलाम पुलिस और औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए उनकी सक्रियता की सराहना की। इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक गायत्री सोनी, उपनिरीक्षक ध्यानसिंह सोलंकी, आरक्षक विजय पंवार, किशन वर्मा, मनीष परिहारऔर पवन मेहता की विशेष भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने भी टीम के प्रयासों की सराहना की। क्या है CEIR पोर्टल? CEIR पोर्टल क्या करता है? CEIR (Central Equipment Identity Register) भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल फोन गुम या चोरी हो जाता है, तो वह CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर अपने मोबाइल के IMEI नंबर को ब्लॉक करा सकता है। इसके बाद यदि उस मोबाइल में कोई अन्य सिम कार्ड उपयोग किया जाता है तो तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस उसकी लोकेशन और उपयोग की जानकारी प्राप्त कर मोबाइल की तलाश कर सकती है। मोबाइल गुम होने पर क्या करें? रतलाम पुलिस की अपील रतलाम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल गुम या चोरी होने की स्थिति में देरी न करें और तत्काल पुलिस को सूचना देने के साथ CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से पुलिस लगातार गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

Ratlam News: रतलाम फायरिंग केस: पूर्व बजरंग दल नेता समेत 3 फरार आरोपियों पर ₹10-10 हजार का इनाम, संपत्ति की जांच भी शुरू

रतलाम फायरिंग केस में बड़ा अपडेट। सराफा व्यापारी के घर फायरिंग मामले में पूर्व बजरंग दल नेता विनोद उर्फ वीनू शर्मा समेत तीन फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित। पुलिस ने संपत्ति की जांच भी शुरू की। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के चर्चित सराफा व्यापारी फायरिंग केस में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए तीन फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनामघोषित किया है। इनमें पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक विनोद उर्फ वीनू शर्मा, वसीम उर्फ पांडू और अदनान मुकाती शामिल हैं। पुलिस अब इन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी संपत्ति की भी जांच कर रही है। 19 जून को सराफा व्यापारी के घर हुई थी फायरिंग 19 जून को रतलाम के डीडी नगर थाना क्षेत्र स्थित सैफी नगर में सराफा व्यापारी कमल सोनी के घर पर दो बाइकों से पहुंचे चार बदमाशों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी थी। सभी आरोपी चेहरे पर कपड़ा बांधकर आए थे और वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई। अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में विनीत उर्फ चुचु, भोला, अजय उर्फ गट्टू, रवींद्र और कन्हैया नायक शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि फायरिंग की पूरी साजिश विनोद उर्फ वीनू शर्मा के कहने पर रची गई थी। पूर्व बजरंग दल नेता समेत तीन आरोपी अब भी फरार पुलिस के अनुसार पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक विनोद उर्फ वीनू शर्मा, वसीम उर्फ पांडू और अदनान मुकाती अभी भी फरार हैं। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने तीनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। जानकारी के मुताबिक, फरार आरोपी वसीम उर्फ पांडू वर्ष 2017 के चर्चित तरुण सांखला हत्याकांड में भी नामजद आरोपी रह चुका है। 40 लाख की सुपारी लेकर कराई गई थी फायरिंग पुलिस जांच में सामने आया कि सराफा व्यापारी कमल सोनी के बेटे दिव्यांश सोनी और आदित्य सोमानी के बीच एमसीएक्स कारोबार से जुड़े करीब 1 करोड़ रुपये के लेन-देन का विवाद चल रहा था। दिव्यांश द्वारा आदित्य सोमानी के खिलाफ मामला दर्ज कराने के अगले ही दिन फायरिंग की घटना हुई। व्यापारी कमल सोनी ने आरोप लगाया था कि वीनू शर्मा रुपये की वसूली के लिए लगातार धमका रहा था और फायरिंग की धमकी भी दी थी। जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि कथित रूप से 40 लाख रुपये की सुपारी लेकर बदमाशों के जरिए इस वारदात को अंजाम दिलाया गया। पुलिस का बयान डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव ने बताया कि तीनों फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। उनकी गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी पुलिस टीमों ने दबिश दी है। साथ ही आरोपियों की संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और मजबूत किया जा सके।

MP News: इंदौर चाकूबाजी केस में बड़ा फैसला: मुख्य आरोपी को 1 साल की जेल, दो सह-आरोपी बरी

इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत का बड़ा फैसला। मुख्य आरोपी आयूष खोवारे को 1 साल के सश्रम कारावास की सजा, जबकि दो सह-आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया। जानिए पूरा मामला। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी आयूष खोवारे को दोषी करार दिया है। षष्टम अपर सत्र न्यायाधीश अयाज मोहम्मद की अदालत ने आरोपी को खतरनाक हथियार से हमला करने के मामले में एक वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने क्या फैसला सुनाया? अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1) और 126(2) के तहत आयूष खोवारे को दोषी मानते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 118(1) के तहत 2,000 रुपये और धारा 126(2) के तहत 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सह-आरोपी सुमित चौहान और देवेन्द्र उर्फ सागर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। इस कारण दोनों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। क्या था पूरा मामला? अभियोजन के अनुसार, 18 अक्टूबर 2024 की रात करीब 11 बजे फरियादी आयूष पटेल अपने साथी सुमित चौहान के साथ दुकान बंद कर स्कूटी से घर लौट रहा था। इसी दौरान राऊ थाना क्षेत्र स्थित छोगाला रेस्टोरेंट के पास पुरानी रंजिश के चलते मोटरसाइकिल पर आए आयूष खोवारे और देवेन्द्र उर्फ सागर ने उसका रास्ता रोक लिया। आरोप था कि देवेन्द्र ने फरियादी की आंखों में मिर्च पाउडर डाला, जबकि आयूष खोवारे ने चाकू से उसकी पीठ पर हमला कर उसे घायल कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। हत्या के प्रयास का आरोप क्यों नहीं हुआ साबित? सुनवाई के दौरान अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि पीड़ित को लगी चोट शरीर के किसी संवेदनशील या जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले अंग पर नहीं थी। इसलिए हत्या के प्रयास का आरोप सिद्ध नहीं हो सका। हालांकि, फरियादी के लगातार एक जैसे बयान और एफएसएल रिपोर्ट में जब्त चाकू पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि ने यह साबित कर दिया कि आयूष खोवारे ने खतरनाक हथियार से हमला किया था। इसी आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराया। दो सह-आरोपी क्यों हुए बरी? अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फरियादी ने सुमित चौहान के खिलाफ कोई ठोस आरोप सिद्ध नहीं किया। वहीं, देवेन्द्र उर्फ सागर द्वारा आंखों में मिर्च पाउडर डालने के आरोप को मेडिकल साक्ष्यों से समर्थन नहीं मिला। चिकित्सकीय परीक्षण में आंखों में लालिमा, सूजन या जलन के कोई स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए। इसी वजह से दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत का अंतिम आदेश न्यायालय ने आदेश दिया कि विचारण के दौरान आयूष खोवारे द्वारा जेल में बिताई गई एक वर्ष आठ माह की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही, वसूल किया गया अर्थदंड पीड़ित को प्रतिकर (मुआवजा) के रूप में प्रदान किया जाएगा। इस फैसले के साथ बहुचर्चित इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने मुख्य आरोपी को सजा सुनाते हुए कानूनी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया, जबकि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो अन्य आरोपियों को राहत प्रदान की।

Ratlam News: रतलाम में नाले से मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, इप्का गेस्ट हाउस के पीछे झाड़ियों में मिला शव; CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

रतलाम में इप्का गेस्ट हाउस के पीछे नाले से एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और CCTV फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम शहर में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब इप्का गेस्ट हाउस के पीछे स्थित नाले से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ। करीब 55 वर्षीय व्यक्ति का शव झाड़ियों के बीच नाले के पानी में औंधे मुंह पड़ा मिला। सूचना मिलते ही स्टेशन रोड थाना पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। रतलाम में नाले से मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, मौके पर पहुंची पुलिस जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे स्थानीय लोगों ने सिटी फोरलेन स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय से कुछ दूरी पर इप्का गेस्ट हाउस के पीछे नाले में शव पड़ा देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची स्टेशन रोड थाना पुलिस ने शव को नाले से बाहर निकलवाया। पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। जिस स्थान पर शव मिला है, उसके पीछे इंदौर रेलवे लाइन भी गुजरती है, इसलिए पुलिस आसपास के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। CCTV फुटेज और पहचान में जुटी पुलिस पुलिस के मुताबिक मृतक ने काले रंग की पैंट और टी-शर्ट पहन रखी थी। दोपहर तक उसकी पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ कर रही है और इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मृतक वहां कैसे पहुंचा। पहचान के लिए आसपास के थानों और गुमशुदगी के मामलों का भी मिलान किया जा रहा है। थाना प्रभारी ने क्या कहा? स्टेशन रोड थाना प्रभारी जितेंद्र जादौन ने बताया कि मृतक की पहचान कराने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में शव पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। हर एंगल से जांच कर रही पुलिस एफएसएल टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस प्राकृतिक मौत, दुर्घटना और अन्य संभावित कारणों सहित हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Ratlam News: रतलाम में 74 लाख का गबन! कृषि साख सहकारी संस्था में बड़ा घोटाला, 68 किसानों के खातों से हेराफेरी

रतलाम के पिपलौदा स्थित शेरपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था में 74.45 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। ऑडिट में अनियमितता सामने आने के बाद प्रबंधक और सहायक प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज, दोनों आरोपी फरार हैं। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील के शेरपुर गांव स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था में 74.45 लाख रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। वर्षों तक चली वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा विशेष ऑडिट के दौरान हुआ। जांच के बाद पिपलौदा थाना पुलिस ने संस्था के तत्कालीन प्रबंधक और सहायक प्रबंधक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल दोनों आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। ऑडिट में पकड़ी गई 74 लाख रुपये से अधिक की गड़बड़ी जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच का है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा पिपलौदा के प्रबंधक अशोक पिता रायचंद मुणिया ने 6 मार्च 2026 को पुलिस को जांच प्रतिवेदन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की थी। भारत सरकार की सहकारी से समृद्धि योजना के तहत पैक्स कम्प्यूटरीकरण के दौरान संस्था के डिजिटल रिकॉर्ड (DCT) और बैलेंस शीट का मिलान किया गया। इस दौरान 86.43 लाख रुपये से अधिक का अंतर सामने आया। इसके बाद संयुक्त आयुक्त सहकारिता बैंक की विशेष ऑडिट टीम ने विस्तृत जांच की, जिसमें 70 सदस्यों के खातों में 74,45,947 रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितता पाई गई। 68 किसानों के खातों में हेरफेर, राशि लेकर नहीं दी रसीद विशेष जांच में सामने आया कि संस्था के तत्कालीन प्रबंधक अशोक बाफना और सहायक प्रबंधक गेंदालाल शर्मा ने कई सदस्यों से नकद राशि जमा करवाई, लेकिन उसकी आधिकारिक रसीद जारी नहीं की। इतना ही नहीं, जमा राशि को संस्था की कैश बुक में भी दर्ज नहीं किया गया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में 68 सदस्यों के खातों में लगभग 74.26 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। ऑडिट टीम ने फर्जी रसीदों और रिकॉर्ड में हेरफेर के भी प्रमाण मिलने की बात कही है। नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं, दोनों अधिकारी निलंबित विशेष ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद बैंक ने दोनों अधिकारियों को राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय में रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। कलेक्टर एवं प्रशासक के निर्देश पर शाखा प्रबंधक अमृतलाल पाटोदी को विस्तृत जांच सौंपी गई। जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद पुलिस कार्रवाई की गई। पुलिस ने दर्ज किया केस, आरोपी फरार पिपलौदा थाना पुलिस ने आरोपी अशोक बाफना (निवासी हसनपालिया, वर्तमान जावरा) और गेंदालाल शर्मा (निवासी सरसाना, पिपलौदा)के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 409 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। पिपलौदा थाना प्रभारी रमेश कोली ने बताया कि दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार तलाश की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की कई सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। सरकार द्वारा सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण और विशेष ऑडिट के बाद ऐसे मामलों का खुलासा तेजी से हो रहा है। शेरपुर संस्था का यह मामला भी ऑडिट प्रक्रिया के दौरान सामने आया, जिसने किसानों की जमा पूंजी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ratlam News: रतलाम में 40 लाख की लूट का 24 घंटे में खुलासा: कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड, ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय बनकर रची थी पूरी साजिश

रतलाम में 40 लाख रुपये की लूट का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। कर्मचारी ने व्हाट्सएप के “OK” मैसेज से साथियों को बुलाकर ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की वेशभूषा में वारदात करवाई। पूरी रकम बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम में 40 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट की गुत्थी को पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया है। इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि फरियादी का ही कर्मचारी पूरी वारदात का मास्टरमाइंड निकला। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लूटी गई पूरी 40 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। वीडियो देखे क्या है पूरा मामला? 30 जून 2026 को शहर सराय निवासी मनीष पटवा ने थाना स्टेशन रोड में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि शराब व्यवसायी गौरव शर्मा की विभिन्न दुकानों से एकत्र करीब 40 लाख रुपये की नकदी उनके कार्यालय पहुंचाई गई थी। राशि कार्यालय कर्मचारी फरदीन और उसके पिता फिरोज खान को सौंप दी गई। दोनों रकम गिनने के बाद उसे काले बैग में रखकर घर की ऊपरी मंजिल पर ले जा रहे थे। तभी ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की वेशभूषा पहने और चेहरे पर कपड़ा बांधे एक युवक ने जान से मारने की धमकी देकर 40 लाख रुपये से भरा बैग लूट लिया और फरार हो गया। घटना के बाद थाना स्टेशन रोड पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 309(4) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। व्हाट्सएप के “OK” मैसेज से शुरू हुई लूट की प्लानिंग जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसमें कर्मचारी फरदीन की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान उसने पूरा षड्यंत्र कबूल कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि जैसे ही 40 लाख रुपये उसके पास पहुंचे, उसने अपने साथियों को व्हाट्सएप पर केवल “OK” मैसेज भेजकर संकेत दिया। पहले से तय योजना के अनुसार उसका भाई फैज और साथी असबाब ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की वेशभूषा पहनकर स्कूटी से मौके पर पहुंचे और लूट की वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। पुलिस के अनुसार आरोपी असबाब पहले ब्लिंकिट में काम कर चुका था। इसी वजह से उसने शक से बचने के लिए कंपनी की डिलीवरी ड्रेस का इस्तेमाल किया। 40 लाख रुपये की पूरी रकम बरामद पुलिस ने आरोपी फरदीन की निशानदेही पर उसके घर और आरोपी असबाब के घर के स्टोर रूम से घटना में लूटी गई पूरी 40 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी फैज और असबाब की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। साथ ही दोनों आरोपियों के अन्य जिलों में आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा? पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार लाल एवं राकेश पंद्रो के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र घनघोरिया के नेतृत्व में थाना स्टेशन रोड पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस मामले का खुलासा किया। थाना प्रभारी निरीक्षक जितेन्द्रपाल सिंह जादौन सहित थाना और साइबर सेल की टीम की त्वरित कार्रवाई से महज 24 घंटे में पूरे मामले का खुलासा संभव हो सका।

Ratlam News: हेड कॉन्स्टेबल रिश्वत कांड: 50 हजार की घूस लेते पकड़ा गया पुलिसकर्मी, कोर्ट ने भेजा जेल

रतलाम के औद्योगिक क्षेत्र थाने के हेड कॉन्स्टेबल तपेश गोसाई को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते राजस्थान ACB ने गिरफ्तार किया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया है। जानिए पूरा मामला। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम पुलिस के औद्योगिक क्षेत्र थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल तपेश गोसाई को रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट ने जेल भेज दिया है। राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सोमवार रात भीलवाड़ा के एक होटल में उसे 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार बुधवार को आरोपी पुलिसकर्मी पर निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। वीडियो देखे क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, हेड कॉन्स्टेबल तपेश गोसाई ने जमीन धोखाधड़ी के आरोपी मोहम्मद लियाकत (70) से पूछताछ के दौरान मारपीट नहीं करने और जांच में राहत देने के बदले 1 लाख 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले ही 10 हजार रुपए की पहली किस्त दे चुका था। इसके बाद सोमवार को भीलवाड़ा के एक होटल में 50 हजार रुपए की दूसरी किस्त लेते समय राजस्थान ACB की टीम ने तपेश गोसाई को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिमांड पर आरोपी को लेकर भीलवाड़ा पहुंची थी रतलाम पुलिस धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार मोहम्मद लियाकत को कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद रतलाम पुलिस की टीम 28 जून को उसे लेकर भीलवाड़ा गई थी। टीम में ASI कैलाश सैनी, हेड कॉन्स्टेबल तपेश गोसाई और एक अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस टीम भीलवाड़ा के एक होटल में रुकी हुई थी। इसी दौरान लियाकत के परिजनों से रिश्वत लेते समय ACB ने जाल बिछाकर तपेश गोसाई को गिरफ्तार कर लिया। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस टीम आरोपी लियाकत को वापस रतलाम ले आई। जानिए क्या था जमीन धोखाधड़ी का मामला यह मामला रतलाम के व्यापारी रतन जांगिड़ की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, भीलवाड़ा निवासी मोहम्मद लियाकत ने रतलाम स्थित बंद पड़ी एक ऑयल मिल और उससे जुड़ी जमीन का 11 करोड़ 10 लाख रुपए में सौदा कराने का दावा किया था। आरोप है कि लियाकत ने 25 लाख 76 हजार रुपए अग्रिम राशि के रूप में ले लिए, लेकिन न तो जमीन का अनुबंध कराया और न ही वास्तविक मालिक से मुलाकात कराई। शिकायत के आधार पर रतलाम पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल राजस्थान में रतलाम पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल के रिश्वत लेते पकड़े जाने की घटना के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आरोपी पुलिसकर्मी पर निलंबन की कार्रवाई जल्द हो सकती है।

Ratlam News: UCO बैंक FD फ्रॉड: आउटसोर्स कर्मचारी पर 5 एफडी तोड़कर लाखों की धोखाधड़ी का आरोप, पीड़िता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग

रतलाम में UCO बैंक के आउटसोर्स कर्मचारी पर महिला ग्राहक की 5 एफडी तोड़कर राशि निकालने का आरोप लगा है। पीड़िता ने पुलिस और बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम में UCO बैंक FD फ्रॉड का मामला सामने आया है। एक महिला ग्राहक ने बैंक के आउटसोर्स (बीसी) कर्मचारी पर उसकी पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़कर राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि शिकायत और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो आरोपी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है और न ही उसकी जमा राशि वापस मिली है। मामले में महिला ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। क्या है पूरा मामला? प्राप्त जानकारी के अनुसार, आभा लोढ़ा, पति संजय लोढ़ा, निवासी टाटा नगर, रतलाम का यूको बैंक में खाता है। उन्होंने बैंक में पांच एफडी करवाई थीं, जिनके नंबर 712638, 712639, 712481, 712482 और 712483 बताए गए हैं। महिला का आरोप है कि बैंक में बीसी (आउटसोर्स) कर्मचारी के रूप में कार्यरत राहुल राठौड़ ने धोखाधड़ी करते हुए उनकी सभी एफडी समय से पहले तोड़ दीं और पूरी राशि निकाल ली। इस कथित गड़बड़ी की जानकारी उन्हें 30 मई 2026 को मिली। एफआईआर के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप पीड़िता के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने माणकचौक थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद एफआईआर भी दर्ज हुई। हालांकि उनका आरोप है कि अब तक आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एफडी की राशि अभी तक वापस नहीं मिली है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अन्य ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी का दावा आवेदन में पीड़िता ने दावा किया है कि आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी ने बैंक के अन्य ग्राहकों के साथ भी इसी तरह की कथित धोखाधड़ी की है। ऐसे में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि सभी प्रभावित ग्राहकों को न्याय मिल सके। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में बैंक को नोटिस दिए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने क्या की मांग? आभा लोढ़ा ने प्रशासन से मांग की है कि— नोट: यह खबर पीड़िता द्वारा दिए गए लिखित आवेदन और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा जांच एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।

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