Mobile Data: क्या मोबाइल डेटा होगा महंगा? हर 1GB पर लग सकता है ₹1 टैक्स, जानिए क्या है मामला

Mobile Data भारत में मोबाइल डेटा महंगा हो सकता है। सरकार हर 1GB डेटा पर ₹1 टैक्स लगाने के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। जानिए पूरा मामला और यूजर्स पर इसका कितना असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Mobile Data: भारत में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए आने वाले समय में डेटा महंगा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार मोबाइल डेटा उपयोग पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की संभावना का अध्ययन कर रही है। इसके लिए दूरसंचार विभाग (DoT) को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक समीक्षा बैठक के दौरान मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद सरकार ने दूरसंचार विभाग से यह जांच करने को कहा कि क्या मोबाइल डेटा इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जा सकता है और यदि लगाया जाए तो उसका ढांचा कैसा होगा। हर 1GB डेटा पर लग सकता है ₹1 टैक्स रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें मोबाइल डेटा उपयोग पर प्रति 1GB लगभग ₹1 का अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव शामिल है। अगर यह मॉडल लागू किया जाता है, तो जब भी कोई यूजर मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करेगा, उसे मौजूदा चार्ज के अलावा यह अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि इस तरह का टैक्स लागू होता है तो सरकार को इससे हर साल करीब ₹22,900 करोड़ तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। पहले से लग रहा है 18% GST गौरतलब है कि भारत में मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर पहले से ही 18% जीएसटी लगाया जाता है। यानी यूजर्स टेलीकॉम सेवाओं पर पहले ही टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में यदि मोबाइल डेटा उपयोग पर अलग से टैक्स लागू होता है, तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा अतिरिक्त शुल्क होगा। भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट भारत उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल इंटरनेट की कीमत दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम है। कम कीमतों के कारण देश में वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके चलते डेटा की खपत भी लगातार बढ़ रही है। अभी नहीं हुई कोई आधिकारिक घोषणा हालांकि, इस मामले में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल सरकार ने दूरसंचार विभाग को इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

LPG crisis India: LPG संकट का असर इंटरनेट पर? गैस की किल्लत से मोबाइल नेटवर्क ठप होने की आशंका

LPG crisis India: अमेरिका-ईरान-इजराइल तनाव के बीच भारत में LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। टेलीकॉम कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर संकट लंबा चला तो मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG crisis India: अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। इस तनाव के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर केवल रसोई गैस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ सकता है। टेलीकॉम टावरों के संचालन पर बढ़ सकता है असर दरअसल, कई जगह टेलीकॉम टावरों और डेटा सेंटरों के बैकअप जनरेटर के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो टेलीकॉम कंपनियों को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि कंपनियों के पास बिजली और अन्य ईंधन के विकल्प मौजूद होते हैं, लेकिन लंबे समय तक एलपीजी की कमी रहने पर संचालन लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या भी सामने आ सकती है। DIPA ने सरकार को दी चेतावनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA) के अनुसार, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद तेल कंपनियों ने टेलीकॉम टावर निर्माण से जुड़ी कुछ इकाइयों को एलपीजी की आपूर्ति रोक दी है।हालांकि फिलहाल देश में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन स्थिति लंबी चली तो समस्या बढ़ सकती है। टेलीकॉम टावर निर्माण भी हो सकता है प्रभावित टेलीकॉम टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में गैल्वनाइजेशन प्लांट में जिंक को पिघली हुई अवस्था में बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत होती है।कुछ कंपनियों ने फिलहाल कम लौ पर प्लांट चलाने का विकल्प अपनाया है, लेकिन यदि एलपीजी की कमी जारी रही तो उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। इससे नए टेलीकॉम टावरों के निर्माण में देरी हो सकती है और नेटवर्क विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है। क्यों जरूरी है मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क आज के दौर में टेलीकॉम नेटवर्क केवल कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। 5G नेटवर्क, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन, आपातकालीन सेवाएं, डिजिटल भुगतान, सरकारी ऑनलाइन सेवाएं और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं पूरी तरह इस नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। ऐसे में इसकी निर्बाध उपलब्धता बेहद जरूरी है। सरकार से की गई अहम मांग DIPA ने दूरसंचार विभाग से मांग की है कि टेलीकॉम टावर निर्माण इकाइयों को एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध से छूट दी जाए। साथ ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कीमतों में उछाल और सप्लाई संकट की स्थिति बन सकती है।

PM Kisan: 13 मार्च को आएगी PM किसान की 22वीं किस्त, करोड़ों किसानों के खाते में ट्रांसफर होंगे 2000 रुपये

पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त 13 मार्च को जारी होगी। पात्र किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। जानिए किसे मिलेगा लाभ और कैसे चेक करें अपना स्टेटस। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PM Kisan: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) के तहत देशभर के करोड़ों किसानों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार ने योजना की 22वीं किस्त जारी करने की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सरकार के अनुसार 13 मार्च को पात्र किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी। इस घोषणा के बाद लंबे समय से किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिली है। 2019 में शुरू हुई थी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। यानी हर चार महीने में 2000 रुपये सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। अब तक सरकार किसानों को 21 किस्तें जारी कर चुकी है, जबकि अब 22वीं किस्त जारी होने जा रही है। किसानों को होली से पहले मिली खुशखबरी पिछले कुछ समय से किसानों के बीच यह चर्चा चल रही थी कि फरवरी के अंत तक किस्त जारी हो सकती है। इसके बाद कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि होली से पहले किसानों को किस्त मिल सकती है। अब सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा करते हुए बताया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये की किस्त ट्रांसफर की जाएगी। इन कारणों से अटक सकती है किस्त कुछ किसानों को इस बार किस्त मिलने में परेशानी भी हो सकती है। अगर किसान ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की हैं तो उनकी किस्त रुक सकती है। मुख्य कारण इस प्रकार हैं— इन वजहों से कई किसानों की किस्त अटक सकती है। ऐसे चेक करें अपने खाते की स्थिति किसान आसानी से ऑनलाइन यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं। इसके लिए उन्हें पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद ये स्टेप्स फॉलो करें— रुकी हुई किस्त भी मिल सकती है अगर किसी किसान की किस्त पहले किसी कारण से रुक गई थी और उसने अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, तो भविष्य में उसे किस्त का लाभ मिल सकता है। कुछ मामलों में पहले की रुकी हुई किस्त भी बाद में जारी की जा सकती है, हालांकि यह पूरी तरह जांच और पात्रता पर निर्भर करता है।

Ratlam News: 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत: संपत्तिकर-जलकर के बकायादारों को सरचार्ज में बड़ी छूट

रतलाम में 14 मार्च 2026 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन होगा। संपत्तिकर और जलकर के बकायादारों को सरचार्ज में 100% तक की छूट मिलेगी। जानिए कहां और कैसे जमा करें बकाया राशि। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य शासन के निर्देशानुसार 14 मार्च शनिवार को नेशनल लोक अदालतका आयोजन किया जाएगा। इस दौरान नगर निगम रतलाम द्वारा संपत्तिकर और जलकर के बकायादारों को अधिभार (सरचार्ज) में विशेष छूट का लाभ दिया जाएगा। नगर निगम ने बकाया कर जमा कराने के लिए दो स्थानों पर व्यवस्था की है। पहला काउंटर नगर निगम कार्यालय में फायर स्टेशन भवन के पासऔर दूसरा जिला न्यायालय परिसर में लगाए जाने वाले शिविर में रहेगा। दोनों स्थानों पर कार्यालयीन समय में बकाया राशि जमा की जा सकेगी। संपत्तिकर पर मिलेगी यह छूट नेशनल लोक अदालत में संपत्तिकर के प्रकरणों में निम्नानुसार सरचार्ज में छूट दी जाएगी— जलकर पर मिलेगी यह राहत जलकर के बकायादारों को भी अधिभार में छूट दी जाएगी— नगर निगम के अनुसार यह छूट वन टाइम सेटलमेंट (एक बार) के तहत दी जाएगी और यह केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशिपर ही लागू होगी। साथ ही यह सुविधा केवल 14 मार्च 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत के दिन ही मान्य रहेगी। नगर निगम ने सभी संपत्तिकर और जलकर बकायादारों से अपील की है कि वे 14 मार्च को आयोजित एक दिवसीय लोक अदालत में उपस्थित होकर बकाया राशि जमा करें और अधिभार में दी जा रही छूट का लाभ उठाएं।

मिडिल ईस्ट युद्ध से तेल 100 डॉलर पार, भारत में महंगाई का खतरा बढ़ा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गई है। भारत में महंगाई और LPG-पेट्रोल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया, जिसके चलते तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ने लगा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 42% ज्यादा है। इससे भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता है तो इससे महंगाई में 30 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है और आर्थिक विकास दर में करीब 15 बेसिस पॉइंट्स की कमी आ सकती है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ परिवहन लागत भी बढ़ती है, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर संकट से बढ़ी चिंता खाड़ी क्षेत्र एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। साल 2025 में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला करीब 87% कच्चा तेल और 86% LNG एशियाई देशों में ही पहुंचा था। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने से सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी बढ़ गया है। LPG की कीमतों पर भी असर मिडिल ईस्ट संकट का असर अब घरेलू गैस पर भी दिखने लगा है। हाल ही में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जो करीब एक साल बाद पहली वृद्धि है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और देश में 90% से ज्यादा LPG मिडिल ईस्ट से आयात होती है। सरकार क्या कदम उठा सकती है? सरकार पहले भी तेल की कीमतों के झटके को कम करने के लिए टैक्स में कटौती जैसे कदम उठा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो सरकार को फिर से टैक्स में राहत, रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। आम लोगों पर क्या असर होगा? तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है।

Indian Railways PPP Policy: भारतीय रेलवे की PPP पॉलिसी में बदलाव की तैयारी, निवेश और प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बढ़ावा

Indian Railways PPP Policy: भारतीय रेलवे 10 साल पुरानी PPP पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कंसेशन पीरियड 50 साल तक बढ़ाने और जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी रेलवे लेने के प्रस्ताव से रेलवे प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश बढ़ेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Indian Railways PPP Policy: यात्रियों की सुविधाओं और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रेलवे अब अपनी 10 साल पुरानी प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (PPP) पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य निजी निवेशकों को ज्यादा सुरक्षा देना, जोखिम कम करना और रेलवे प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना है। रेलवे की नई रणनीति के तहत दो बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे प्राइवेट कंपनियों के लिए रेलवे परियोजनाओं में निवेश करना पहले से ज्यादा आसान और आकर्षक हो जाएगा। 50 साल तक बढ़ सकता है कंसेशन पीरियड फिलहाल रेलवे के PPP प्रोजेक्ट्स में कंसेशन पीरियड 20 से 35 साल के बीच होता है। अब रेलवे इसे बढ़ाकर 50 साल तक करने का प्रस्तावला रहा है। इससे निजी कंपनियों को अपने निवेश की लागत निकालने के लिए ज्यादा समय मिलेगा और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का भरोसा भी बढ़ेगा। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw पहले ही गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) के लिए 50 साल का कंसेशन पीरियड घोषित कर चुके हैं, जिसे इस नई पॉलिसी की शुरुआत माना जा रहा है। जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी रेलवे की होगी मौजूदा व्यवस्था में PPP प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और खर्च का बोझ निजी कंपनियों पर पड़ता है, जबकि जमीन रेलवे की होती है। इस कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी हो जाती है। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार अब जमीन अधिग्रहण की पूरी जिम्मेदारी रेलवे खुद ले सकता है। यह कदम हाईवे प्रोजेक्ट्स के अनुभव को देखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। 35 हजार करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स रेलवे ने मार्च 2028 तक PPP मॉडल के तहत 15 बड़े प्रोजेक्ट्स को चुना है, जिनकी कुल लागत करीब 35,817 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में नई रेल लाइन बिछाना, ट्रैक डबल करना और स्टेशन रीडेवलपमेंट जैसे काम शामिल हैं। वहीं, 2012 की मौजूदा PPP पॉलिसी के तहत दिसंबर 2025 तक 18 प्रोजेक्ट्स (16,686 करोड़ रुपये) पूरे हो चुके हैं, जबकि 7 प्रोजेक्ट्स (16,362 करोड़ रुपये) पर अभी काम जारी है। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा फायदा नई PPP पॉलिसी लागू होने से रेलवे प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश बढ़ेगा, काम की गति तेज होगी और रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही देश में लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Ratlam News: रतलाम में रंगपंचमी गैर जुलूस 8 मार्च को, सुबह 7 से रात 10 बजे तक रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रंगपंचमी पर्व के अवसर पर 8 मार्च 2026 को रतलाम जागृति मंच द्वारा परंपरागत गैर जुलूस निकाला जाएगा। यह गैर सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए रतलाम यातायात पुलिस ने विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। जानकारी के अनुसार गैर में शामिल लोग धानमंडी स्थित रानी जी के मंदिर पर एकत्रित होंगे। यहां से जुलूस गणेश देवरी, न्यू क्लॉथ मार्केट, जमनालाल स्वीट्स, महालक्ष्मी मंदिर, घांस बाजार चौराहा, चौमुखी पुल, चांदनी चौक, तोपखाना, हरदेवलाला पिपली होते हुए फिर रानी जी के मंदिर पहुंचेगा। इसके बाद नाहरपुरा चौराहा और डालूमोदी चौराहा पहुंचकर गैर का समापन किया जाएगा। यातायात पुलिस के अनुसार जुलूस के दौरान कई मार्गों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों का डायवर्जन किया जाएगा। रानी जी के मंदिर क्षेत्र में भीड़ को देखते हुए नाहरपुरा चौराहा, शहीद चौक और हरदेवलाला पिपली से मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों का मार्ग परिवर्तित रहेगा। गणेश देवरी क्षेत्र में जुलूस के पहुंचने के दौरान बजाज खाना, तोपखाना और चौमुखी पुल से गणेश देवरी की ओर जाने वाले वाहनों को दूसरे मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं न्यू क्लॉथ मार्केट, घांस बाजार चौराहा, डालूमोदी बाजार, कलाईगर मार्ग और खैराती वास क्षेत्र में भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। चौमुखी पुल और चांदनी चौक क्षेत्र में जुलूस प्रवेश के समय त्रिपोलिया गेट, बाजना बस स्टैंड, गौशाला रोड और गणेश देवरी से आने वाले वाहनों का भी मार्ग परिवर्तन रहेगा। बजाज खाना से हरदेवलाला पिपली की ओर जुलूस पहुंचने के दौरान नीम चौक, आबकारी चौराहा और मोमीनपुरा की ओर से आने वाले वाहनों को भी डायवर्ट किया जाएगा। यातायात पुलिस के अनुसार यह ट्रैफिक व्यवस्था 8 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक लागू रहेगी। इस दौरान शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पुलिस ने शहर की आम जनता से अपील की है कि रंगपंचमी के दौरान तय किए गए मार्ग परिवर्तन का पालन करें और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी लोग सुरक्षित और सुचारू रूप से पर्व का आनंद ले सकें।

LPG Price Hike: घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा, मध्यप्रदेश में 900 रुपए के पार पहुंचे दाम

LPG गैस सिलेंडर महंगा हो गया है। घरेलू सिलेंडर 60 रुपए lPऔर कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपए बढ़ा। मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर में कीमत 900 रुपए के पार पहुंची। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG Price Hike: देशभर में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी ने आम लोगों के बजट पर असर डाल दिया है। 7 मार्च 2026 से घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपए महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 853 रुपए से बढ़कर 913 रुपए हो गई है। वहीं मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल और इंदौर में भी सिलेंडर की कीमत 900 रुपए के पार पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी अप्रैल 2025 के बाद पहली बार की गई है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बढ़े दाम बताया जा रहा है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण हुई है। विशेष रूप से इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इस स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिसके चलते तेल कंपनियों को गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने पड़े। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। एमपी में भी बढ़े गैस सिलेंडर के दाम मध्यप्रदेश में गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 900 रुपए से ज्यादा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में गैस सिलेंडर के दाम और बढ़ सकते हैं। कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस पर पड़ सकता है। इंदौर के सराफा बाजार और छप्पन दुकान जैसे फूड हब में काम करने वाले कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी लागत बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। बड़े शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की नई कीमतें FAQ एलपीजी सिलेंडर के दाम क्यों बढ़े? एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष माना जा रहा है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। मध्यप्रदेश में सिलेंडर की नई कीमत क्या है? मध्यप्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा हो गया है और भोपाल-इंदौर में इसकी कीमत 900 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। कमर्शियल सिलेंडर कितना महंगा हुआ? कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपए की बढ़ोतरी की गई हैLPG Price Hike:

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण: समय, सूतक काल और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे आम तौर पर ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जिस दिन होलिका दहन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में इस ग्रहण का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। वहीं सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले, यानी सुबह 6:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते। चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें? (Do’s) ग्रहण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से खास माना जाता है। इस समय कुछ सकारात्मक कार्य करना शुभ माना गया है— चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें? (Don’ts) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ कार्यों से बचना जरूरी बताया गया है— वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 3 मार्च 2026 का यह चंद्र ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। जहां वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक घटना मानते हैं, वहीं धार्मिक मान्यताओं में इसे आध्यात्मिक शुद्धि और सावधानी का समय माना जाता है। इस दिन सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए सकारात्मक कार्यों पर ध्यान देना, मन को शांत रखना और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्थाओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। ओपनिंग के दौरान सेंसेक्स में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 500 अंकों से अधिक टूट गया। इस भारी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है और करीब 17.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा बाजार कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 3.30 फीसदी यानी 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर खुला, जो करीब 11 महीने का निचला स्तर है। सुबह के सत्र में हल्की रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 80,500 के आसपास ही कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24,645 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर भी पिछले कई महीनों का लोअर लेवल माना जा रहा है। इन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर दिखा। खासकर रियल्टी, ऑटो, आईटी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। टॉप लूजर शेयरों में शामिल रहे: वहीं बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच डिफेंस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे वेस्ट एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल में उछाल, भारत के लिए बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6% बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5.5% की तेजी के साथ 70 डॉलर के करीब पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। 17.50 लाख करोड़ का निवेशकों को झटका शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख करोड़ रुपए था, जो सोमवार को गिरकर 4.45 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज कुछ घंटों में निवेशकों के 17.50 लाख करोड़ रुपए डूब गए। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि: फिलहाल बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने की संभावना है और निवेशकों की नजर अब पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है।

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