ईरान-इजरायल युद्ध से तेल संकट! क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

डिजिटल डेस्क- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल सप्लाई लाइन होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। कच्चा तेल 110 डॉलर पार जाने का खतरा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में ही तेल कीमतों में तेजी देखी जा चुकी है, जो आने वाले दिनों में बड़े आर्थिक संकट का संकेत है। क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर बदलाव का असर देश पर पड़ता है। हालांकि फिलहाल राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियां छोटे उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ आम जनता पर नहीं डालतीं। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो: यानी सीधे तौर पर आपकी जेब पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी। भारत का मास्टर प्लान: सप्लाई नहीं होगी बंद इस संभावित संकट से निपटने के लिए भारत ने पहले से ही बैकअप प्लान तैयार कर लिया है: 1. वैकल्पिक समुद्री रास्ते:भारतीय तेल कंपनियां अब सऊदी अरब और यूएई के उन बंदरगाहों का उपयोग करेंगी जो युद्ध प्रभावित क्षेत्र से दूर हैं। 2. नए देशों से तेल खरीद:भारत अब खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी कच्चा तेल खरीदने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. रिफाइनरी की कंटिंजेंसी योजना:देश की रिफाइनरी कंपनियों ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष इमरजेंसी प्लान तैयार किया है, ताकि किसी भी हालत में पेट्रोल-डीजल की कमी न हो। भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो: हालांकि सरकार और तेल कंपनियों की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है।

US-Israel Strike Iran: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर विरोधाभासी दावे, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

डिजिटल डेस्क- पब्लिक वार्ता, न्यूज डेस्क। US- Israel Strike Iran: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम और विरोधाभासी खबरें सामने आ रही हैं। एक ओर ईरानी सरकारी मीडिया के कुछ हिस्सों ने उनकी मौत की पुष्टि का दावा किया है, तो वहीं देश की अन्य प्रमुख एजेंसियों ने इन खबरों को खारिज करते हुए उन्हें जीवित बताया है। इस बीच मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। रविवार (1 मार्च 2026) को सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में खामेनेई समेत उनके परिवार के चार सदस्यों—बेटी, दामाद और पोती—की भी मौत हो गई। ईरानी चैनल प्रेस टीवी ने दावा किया कि उनकी मौत के बाद देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई है। हालांकि, ईरान की अन्य प्रमुख समाचार एजेंसियों—तसनीम और मेहर—ने इन खबरों का खंडन किया है। इन एजेंसियों के अनुसार, 1989 से ईरान का नेतृत्व कर रहे खामेनेई सुरक्षित और जीवित हैं। इन विरोधाभासी दावों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने बताया कि हमले के बाद खामेनेई का शव बरामद किया गया है, लेकिन इस दावे की अब तक किसी स्वतंत्र स्रोत या आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर दावा किया कि खामेनेई एक सैन्य ऑपरेशन में मारे गए हैं। ट्रंप ने उन्हें “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक” बताते हुए उनकी मौत को न्याय करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में शांति स्थापित होने तक बमबारी जारी रह सकती है। इजरायल-अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान ने भी कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर इस खबर को लेकर सतर्कता और चिंता दोनों बनी हुई हैं, क्योंकि किसी भी आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि का अभी इंतजार किया जा रहा है।

New Rules: 1 मार्च से बदलेंगे नियम: LPG, ट्रेन टिकट, UPI और सिम बाइंडिंग से आपकी जेब पर असर

1 मार्च 2026 से LPG सिलेंडर, रेलवे टिकट बुकिंग, UPI पेमेंट, सिम बाइंडिंग और बैंक मिनिमम बैलेंस से जुड़े कई नियम बदलने जा रहे हैं, जानिए आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। New Rules: हर महीने की तरह मार्च 2026 की शुरुआत भी आम लोगों की जेब से जुड़ी कई अहम बदलाव लेकर आ रही है। 1 मार्च से एलपीजी गैस, रेलवे टिकट, डिजिटल पेमेंट, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा असर आपकी मंथली बजट पर पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि 1 मार्च से कौन-कौन से नियम बदलने जा रहे हैं और आपको क्या सावधानी रखनी चाहिए। 1. LPG सिलेंडर के दाम में बदलाव की संभावना हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा होती है। पिछले कुछ महीनों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ही बदलाव देखने को मिला है। 2. रेलवे टिकट बुकिंग का नियम बदलेगा 1 मार्च से ट्रेन टिकट बुकिंग से जुड़ा बड़ा बदलाव लागू हो सकता है। 3. सिम बाइंडिंग का नया नियम लागू डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नया सिम बाइंडिंग सिस्टम लागू कर रही है। इस नियम का मकसद फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाना है। 4. UPI पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा 1 मार्च से बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन और सुरक्षित किए जा रहे हैं। 5. बैंक मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस के नियमों में राहत दी है। 6. CNG, PNG और ATF की कीमतें भी बदल सकती हैं हर महीने की तरह 1 मार्च को पेट्रोलियम कंपनियां CNG, PNG और ATF के दाम रिवाइज करती हैं।

New Rules: 1 मार्च से WhatsApp पर SIM-बाइंडिंग नियम लागू, बिना SIM नहीं चलेगा ऐप

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। New Rules: देश में 1 मार्च 2026 से मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए नियम के तहत अब WhatsApp, Telegram और Signal जैसे OTT मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को SIM-बाइंडिंग सिस्टम लागू करना अनिवार्य होगा। यानी अब ये ऐप्स केवल उसी मोबाइल फोन में काम करेंगे जिसमें वही असली SIM मौजूद होगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। क्या है SIM-बाइंडिंग नियम? सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी मैसेजिंग ऐप्स को यूज़र के मोबाइल नंबर और SIM के बीच सीधा लिंक स्थापित करना होगा। इससे फर्जी नंबरों, नकली अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। WhatsApp Web और Telegram Web यूजर्स के लिए नया नियम नए नियम के तहत Web वर्ज़न इस्तेमाल करने वालों को भी बदलाव झेलना पड़ेगा: कंपनियों को करना होगा पालन Meta Platforms (WhatsApp की पेरेंट कंपनी) पहले से इस फीचर पर काम कर रही है। कुछ बीटा वर्ज़न में SIM वेरिफिकेशन की टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है। इसी तरह Telegram और Signal को भी अपने सिस्टम में SIM-चेकिंग फीचर जोड़ना होगा। यूज़र्स को क्यों हो रही परेशानी? नए नियम से कई यूज़र्स की रोजमर्रा की आदतें बदल सकती हैं: सुरक्षा बनाम प्राइवेसी पर बहस सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल फ्रॉड, फेक अकाउंट और साइबर अपराध को रोकने के लिए जरूरी है। इससे अपराधियों की पहचान करना आसान होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि कुछ प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे यूज़र की निजी जानकारी और डिजिटल स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। यूज़र्स क्या करें? 1 मार्च से पहले ये जरूरी तैयारी कर लें: अंतिम बात 1 मार्च 2026 से यह नियम लागू होने के बाद यदि कंपनियाँ इसका पालन नहीं करती हैं तो उन पर जुर्माना या तकनीकी कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार इसे डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन इसका असर सीधे करोड़ों यूज़र्स की रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी पर पड़ेगा।

MP News: महाकाल मंदिर में संध्या-शयन आरती पर ₹250 फीस, ‘Pay & Enter’ मॉडल पर सियासी घमासान

उज्जैन- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में संध्या और शयन आरती को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर समिति ने इन दोनों आरतियों में शामिल होने के लिए प्रति श्रद्धालु ₹250 शुल्क और अनिवार्य ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम लागू कर दिया है। इसके बाद “Pay & Enter” मॉडल को लेकर आस्था और व्यवस्था के बीच बहस छिड़ गई है। क्या है नई व्यवस्था? मंदिर समिति के अनुसार अब श्रद्धालुओं को संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से स्लॉट बुक करना होगा। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी। मंदिर समिति का पक्ष मंदिर प्रबंधन का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू करने से दलाल प्रथा खत्म होगी और दर्शन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। साथ ही चलित दर्शन की व्यवस्था भी जारी रहेगी ताकि अधिक से अधिक भक्तों को दर्शन का लाभ मिल सके। विपक्ष का हमला: “आस्था पर शुल्क” प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “भगवान के दरबार में भी टिकट लगाना श्रद्धालुओं का अपमान है” और इसे आस्था के खिलाफ बताया। बीजेपी के भीतर भी असहमति इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी विरोध की आवाज उठी है। आलोट से बीजेपी विधायक और पूर्व सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय ने इस फैसले को खेदजनक बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को इसका विरोध करना चाहिए। सरकार ने लिया संज्ञान मामले में प्रदेश के धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि यह निर्णय मंदिर समिति का है, लेकिन सरकार इस पर संज्ञान लेगी और चर्चा के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार सनातन परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध है। भक्ति बनाम फीस: बड़ा सवाल महाकाल की नगरी में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धार्मिक आस्था भी शुल्क आधारित मॉडल पर चलेगी? एक ओर व्यवस्था और पारदर्शिता का तर्क दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर आम श्रद्धालु इसे “आस्था पर आर्थिक बोझ” मान रहे हैं।

Ratlam News: रतलाम औद्योगिक क्षेत्र थाना का एसपी ने किया निरीक्षण, त्योहारों से पहले हाई अलर्ट

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार ने 21 फरवरी 2026 को थाना औद्योगिक क्षेत्र रतलाम का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने थाना क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, लंबित अपराधों और पुलिस कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की। वीडियो देखिए निरीक्षण के दौरान एसपी अमित कुमार ने थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र रघुवंशी एवं स्टाफ के साथ बैठक कर क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने थाना परिसर का भ्रमण कर हवालात, शस्त्रागार, रिकॉर्ड रूम सहित सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की जांच की। ड्यूटी रजिस्टर, एफआईआर और शिकायत रजिस्टर का भी बारीकी से अवलोकन किया गया। त्योहारों को लेकर विशेष सतर्कता के निर्देश एसपी ने आगामी त्योहारों होली, धुलेंडी, रंगपंचमी और रमजान को देखते हुए पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही रात्रि गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। हवालात और संसाधनों की जांच निरीक्षण के दौरान हवालात की साफ-सफाई, बंदियों के खान-पान और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई। इसके अलावा थाना में उपलब्ध बलवा ड्रिल सामग्री और आपातकालीन संसाधनों का भी निरीक्षण किया गया। पुलिस वाहनों में आवश्यक उपकरणों को हर समय तैयार रखने के निर्देश दिए गए। फरियादियों के साथ बेहतर व्यवहार पर जोर एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि थाना आने वाले फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जाए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आमजन के साथ अच्छा व्यवहार करने और हर संभव मदद करने के लिए प्रेरित किया। आदतन अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश पुलिस अधीक्षक ने शहर के सभी थाना प्रभारियों को आदतन अपराधियों, हिस्ट्रीशीटर और गुंडा तत्वों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। महिला एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने, लंबित मामलों के त्वरित निराकरण, अवैध शराब, मादक पदार्थ और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।

MP News: मध्य प्रदेश के IAS अवि प्रसाद की तीसरी शादी चर्चा में, दो पूर्व पत्नियां भी हैं कलेक्टर

भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने हाल ही में तीसरी शादी की है। खास बात यह है कि उनकी तीनों पत्नियां भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी रही हैं और दो पूर्व पत्नियां वर्तमान में जिले की कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। 11 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क में हुआ विवाह जानकारी के अनुसार, अवि प्रसाद ने 11 फरवरी 2026 को कूनो नेशनल पार्क में 2017 बैच की आईएएस अधिकारी अंकिता धाकरे से विवाह किया। अंकिता धाकरे वर्तमान में राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं। इस शादी की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से हो रही है। कौन हैं IAS अवि प्रसाद? आईएएस अवि प्रसाद वर्तमान में मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे प्रदेश के कई जिलों में जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर रह चुके हैं। कटनी में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने कुपोषण के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर पहचान बनाई थी। पहली शादी: रिजु बाफना से, अब शाजापुर कलेक्टर अवि प्रसाद ने पहली शादी 2014 बैच की आईएएस अधिकारी रिजु बाफना से की थी। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला और दोनों का तलाक हो गया। वर्तमान में रिजु बाफना शाजापुर जिले की कलेक्टर हैं। दूसरी शादी: मिशा सिंह से, अब रतलाम कलेक्टर पहली पत्नी से अलग होने के बाद अवि प्रसाद ने 2016 बैच की आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से दूसरी शादी की। यह रिश्ता करीब चार साल चला और बाद में दोनों अलग हो गए। मिशा सिंह वर्तमान में रतलाम जिले की कलेक्टर हैं। तीसरी पत्नी अंकिता धाकरे: डिप्टी सेक्रेटरी पद पर तीसरी पत्नी अंकिता धाकरे 2017 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और फिलहाल राज्य मंत्रालय (प्रशासनिक सेवा) में डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हैं। वे मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की रहने वाली हैं। मूल निवास आईएएस अवि प्रसाद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के निवासी हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा, आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। हालांकि, इस विषय में अवि प्रसाद या अंकिता धाकरे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा है।

Toll Plaza: टोल प्लाजा के गंदे टॉयलेट की फोटो भेजें, FASTag में पाएं 1000 रुपये का इनाम

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Toll Plaza: लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टोल प्लाजा पर रुकना आम बात है, लेकिन वहां के गंदे और अस्वच्छ टॉयलेट यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए National Highways Authority of India (NHAI) ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका नाम है ‘क्लीन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज’। इस पहल का उद्देश्य हाईवे पर साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर बनाना और यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। क्या है ‘क्लीन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज’? इस योजना के तहत यदि कोई यात्री किसी टोल प्लाजा पर गंदा टॉयलेट देखता है, तो वह उसकी फोटो खींचकर शिकायत दर्ज करा सकता है।यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता को 1,000 रुपये का रिचार्ज सीधे उसके FASTag खाते में दिया जाएगा। कैसे करें शिकायत? शिकायत दर्ज करने के लिए आपको NHAI का आधिकारिक ऐप राजमार्ग यात्रा (Rajmarg Yatra App) डाउनलोड करना होगा। स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: यह जानकारी शिकायत की जांच और ट्रैकिंग के लिए जरूरी है। शिकायत के बाद क्या होगा? योजना का उद्देश्य इस पहल का मकसद सिर्फ इनाम देना नहीं, बल्कि: कब तक मिलेगी यह सुविधा? यह योजना 30 जून 2026 तक लागू रहेगी।यानी इस तारीख तक आप गंदे टॉयलेट की फोटो भेजकर इनाम पाने का मौका ले सकते हैं। यात्रियों के लिए खास सलाह अगर आप हाईवे पर यात्रा कर रहे हैं और किसी टोल प्लाजा पर गंदगी देखते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।एक फोटो लेकर शिकायत दर्ज करें और स्वच्छता अभियान में अपना योगदान दें – साथ ही 1000 रुपये का फायदा भी पाएं।

EPFO Rules: तीन साल बाद बंद नहीं होता PF का ब्याज, 58 साल की उम्र तक मिलती रहेगी कमाई – EPFO ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। EPFO Rules: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर लंबे समय से चल रही एक बड़ी गलतफहमी पर EPFO ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। कई लोगों को अब तक यह भ्रम था कि नौकरी छोड़ने के तीन साल बाद PF खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, नौकरी छोड़ने या बदलने के बाद भी EPF खाते में जमा राशि पर 58 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है, चाहे खाते में नया योगदान हो या न हो। यानी अगर किसी कर्मचारी ने नौकरी छोड़ दी है और PF की राशि नहीं निकाली है, तो वह पैसा खाली नहीं पड़ा रहता, बल्कि उस पर हर साल घोषित दर से ब्याज जुड़ता रहता है। उदाहरण से समझें नियम अगर कोई कर्मचारी 40 वर्ष की उम्र में नौकरी छोड़ देता है और अपना PF नहीं निकालता, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। उसका EPF खाता अगले 18 वर्षों तक यानी 58 साल की उम्र तक ब्याज कमाता रहेगा। यह नियम सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है। 58 साल के बाद क्या होता है? EPFO के नियमों के मुताबिक, जैसे ही PF धारक की उम्र 58 वर्ष पूरी होती है, उसका EPF खाता ‘इनऑपरेटिव अकाउंट’ की श्रेणी में चला जाता है। इसके बाद उस खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। इसलिए EPFO सलाह देता है कि 58 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद PF की राशि निकाल लेना ही बेहतर होता है। 58 साल तक नौकरी करने वालों के लिए अलग नियम जो कर्मचारी 58 वर्ष की आयु तक लगातार नौकरी में बने रहते हैं और रिटायर होते हैं, उनके लिए नियम थोड़ा अलग है। ऐसे कर्मचारियों के EPF खाते पर रिटायरमेंट के बाद अगले 3 साल यानी 61 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है। हालांकि 61 साल पूरे होते ही यह खाता भी इनऑपरेटिव हो जाता है। तीन साल वाला नियम क्यों बना भ्रम? पहले यह नियम था कि अगर EPF खाते में लगातार तीन साल तक कोई योगदान नहीं होता, तो उसे इनऑपरेटिव मान लिया जाता था। इसी वजह से यह गलतफहमी फैल गई कि तीन साल बाद ब्याज मिलना बंद हो जाता है। लेकिन EPFO ने इस नियम में बदलाव कर दिया है और अब इनऑपरेटिव खातों पर भी 58 साल की उम्र तक ब्याज दिया जाता है। क्या करना समझदारी है? अगर कोई कर्मचारी लंबे समय तक नौकरी में नहीं है और आगे योगदान की संभावना नहीं है, तो वह PF राशि को नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर कर सकता है या नियमों के अनुसार निकाल सकता है। हालांकि, हड़बड़ी में PF निकालने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 58 साल तक उस पर ब्याज मिलता रहेगा।

UGC के नए नियमों पर बवाल: जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बने कानून का क्यों हो रहा विरोध, जानें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। UGC New Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा 2026 में लागू किए गए नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध शुरू हो गया है। जहां एक ओर इन नियमों को जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जनरल कैटेगरी के छात्र और संगठन इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं। क्या हैं UGC के नए नियम? UGC के नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कमेटी SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी जातिगत भेदभाव की शिकायतों को सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी।कमेटी में SC-ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य कैंपस में समानता का माहौल बनाना और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। UGC को ये नियम क्यों लाने पड़े? ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लाए गए हैं। वर्ष 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UGC को 2012 के पुराने नियमों को अपडेट कर सख्त और प्रभावी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे।कोर्ट ने कहा था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न रोकने के लिए केवल दिशानिर्देश नहीं, बल्कि ठोस निगरानी तंत्र जरूरी है। किस रिपोर्ट के आधार पर बने नए नियम? UGC ने सुप्रीम कोर्ट और संसदीय समिति के सामने जो रिपोर्ट पेश की, उसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।रिपोर्ट के अनुसार— हालांकि 90% से अधिक मामलों का निपटारा किया गया, लेकिन पेंडिंग मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी। वर्ष 2019-20 में जहां 18 मामले लंबित थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या 108 तक पहुंच गई। नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा क्या है? UGC के नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार, जो उनकी गरिमा या शिक्षा में समानता को प्रभावित करे, उसे भेदभाव माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। विरोध और हंगामे की वजह क्या है? नए नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी (सवर्ण) छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि नियमों में केवल SC, ST और OBC छात्रों के भेदभाव की बात की गई है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों को संरक्षण से बाहर रखा गया है।विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें की जा सकती हैं, जिससे कैंपस में तनाव बढ़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जिसमें इसे UGC एक्ट और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है। कुल मिलाकर क्या है पूरा मामला? UGC ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अपने आंकड़ों के आधार पर नए नियम लागू किए हैं, जिनका मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।लेकिन दूसरी ओर, जनरल कैटेगरी के छात्रों को आशंका है कि ये नियम एकतरफा हैं और उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।यही वजह है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसे लेकर विरोध, प्रदर्शन और बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है।

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