बंद हो अवैध मांस और लाउड स्पीकर: जिम्मेदारों ने ताक पर रखे मुख्यमंत्री के आदेश, हिंदू जागरण मंच ने दसौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। प्रदेश का मुखिया बनते ही डॉ. मोहन यादव ने मांस विक्रय और लाउड स्पीकर्स पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए थे। उस दौरान ताबड़तोड़ प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। लेकिन समय बितने के बाद उन आदेशों का पालन कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। ना ही जिम्मेदार इस पर कोई ध्यान दे रहे है। अब तक मंदिर व मस्जिदों में बजने वाले लाउड स्पीकर्स के डेसिबल मापने की मशीनें नहीं लग पाई है। ना ही मांस के अवैध कारोबार पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है। ऐसे में अब हिंदू जागरण मंच ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को जागरण मंच का प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर भास्कर लक्षाकार से मिला और ज्ञापन सौंपा। मंच के जगदीश पाटीदार ने बताया की मुख्यमंत्री द्वारा धर्मस्थलों पर लगाए गए लाउड स्पीकरों को हटाने और शहरी क्षेत्रों में अवैध रुप से संचालित की जा रही मांस दुकानों व स्लाटर हाउसों को बन्द करने के निर्देश दिए गए थे। परन्तु राज्य शासन के सुस्पष्ट निर्देशों के बावजूद उक्त दोनो ही गतिविधियां धडल्ले से जारी है। इसके साथ ही शासकीय भूमियों पर अवैध मजारें बनाकर कब्जा किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा इस प्रकार की अवैध फर्जी मजारों को भी हटाने के निर्देश दिए गए है। मगर जिला प्रशासन इन सभी निर्देशों को ताक पर रखकर अवहेलना कर रहा है। हिन्दू जागरण मंच की इस मांग पर तत्काल कार्यवाही की जाए अन्यथा हिन्दू जागरण मंच को इन मुद्दों पर आन्दोलन करने के लिए बाध्य होना पडेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। ज्ञापन के दौरान मंच के राजेश कटारिया, कमलेश ग्वालियरी, वैभव व्यास, कुलदीप माहेश्वरी, सिद्धार्थ पंड्या, महावीर चौहान, पृथ्वी रंगशाही,कार्तिक पाटीदार, नंदकिशोर मीणा आदि पदाधिकारी मौजूद रहे। यह मांगे रखी गई ज्ञापन में1. प्रदेश के मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने पदभार ग्रहण  करते ही पहला आदेश इसी सम्बन्ध में जारी किया था कि धर्मस्थलों पर बिना अनुमति बजाए जा रहे लाउड स्पीकरों को हटाया जाए। अपने आदेश में मुख्यमंत्री डा. यादव ने यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन भी धर्मस्थलों पर बिना अनुमति के लाउड स्पीकर बजाए जा रहे है,उन्हे तुरंत जब्त किया जाए। साथ ही जिन धर्मस्थलों पर प्रशासन से अनुमति लेकर लाउड स्पीकर बजाए जा रहे है,उनकी ध्वनि का स्तर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सीमा में रखा जाए और इसके लिए प्रशासन को धर्मगुरुओं और धर्मस्थलों के संचालकों से चर्चा करने के निर्देश दिए गए थे। 2. जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के निर्देशों पर पूरा अमल नहीं किया। प्रशासन द्वारा किसी भी धर्मस्थल पर लगे लाउड स्पीकरों की अनुमति की जांच नहीं की गई। इसके विपरित सभी धर्मो के धर्मगुरुओं की बैठक लेकर उन्हे कम आवाज में लाउड स्पीकर बजाने के निर्देश दे दिए गए। मुख्यमंत्री जी ने ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के लिए थाना स्तर पर टीम बनाने के निर्देश भी दिए थे। परन्तु ऐसी कोई टीम गठित नहीं की गई। 3. जिला प्रशासन द्वारा ली गई बैठक का असर यह हुआ कि जिले के सभी मन्दिरों पर लगे हुए लाउड स्पीकरों की आवाज तो कम हो गई लेकिन मस्जिदों पर लगे लाउड स्पीकरों की आवाज दो तीन दिन कम रखने के बाद फिर से बढा दी गई है। वर्तमान में समस्त मस्जिदों पर बेहद तेज आवाज में दिन में पांच बार अजान दी जाने लगी है। जिससे लोगों को काफी कष्ट होता है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन करते हुए सुबह साढे पांच बजे तेज आवाज में अजान दी जाती है,जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सुबह 6 बजे से पहले किसी भी स्थिति में लाउड स्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता है। 4. हिन्दू जागरण मंच की मांग है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आदेश का अक्षरश: पालन करवाया जाए। प्रशासन द्वारा प्रत्येक धर्मस्थल पर लगे लाउड स्पीकर की अनुमति की जांच करवाई जाए और बिना अनुमति चलाए जा रहे लाउड स्पीकरों को जब्त किया जाए। हिन्दू जागरण मंच को इस बात की पूरी आशंका है कि किसी भी मस्जिद द्वारा लाउड स्पीकर बजाने के लिए विधिवत अनुमति नहीं ली गई है। 5. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव द्वारा शहरों में खुले रुप से मांस विक्रय किए जाने को भी प्रतिबन्धित किया गया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर शुरुआती एक दो दिन तो कार्यवाही का नाटक किया गया परन्तु वास्तविकता यह है कि शहर में अनेक अवैध दुकानों पर खुलेआम मांस का अवैध विक्रय किया जा रहा है। 6. हिन्दू जागरण मंच को मिली जानकारी के अनुसार शहर में कई अवैध स्लाटर हाउसों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही अवैध रुप से मांस विक्रय की दुकाने चलाई जा रही है। बिना लायसेंस के चलाई जा रही इस मांस विक्रय की दुकानों और अवैध रुप से संचालित किए जा रहे स्लाटर हाउसों की जांच की जाना आïवश्यक है। 7. हिन्दू जागरण मंच को मिली जानकारी के अनुसार,पूरे जिले में अनेक स्थानों पर गौवध किया जा रहा है और ग्र्राम पंचायतों द्वारा इन मांस विक्रे ताओं को अवैध प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे है। ग्र्रामीण क्षेत्रों में हर पांच छ: किमी पर मुख्य मार्गों पर मुर्गे और बकरे के नाम पर अवैध गौवंश और पाडे का मांस विक्रय किया जा रहा है। कई मन्दिरों और स्कूलों के पास अवैध मांस दुकानें संचालित की जा रही है। हिन्दू जागरण मंच की मांग है कि अवैध मांस विक्रय,गौवंश हत्या और अवैध स्लाटर हाउसों की जांच करवा कर इनपर प्रभावी रुप से रोक लगाई जाए। 8. जिले भर में अनेक शासकीय भूमियों पर अवैध फर्जी मजारें बनाकर शासकीय भूमियों पर कब्जा किया जा रहा है। शासकीय भूमियों पर नकली मजारें बनाई जा रही है और फिर धीरे धीरे इन्हे विस्तारित कर पक्का निर्माण कर जमीन पर पूरी तरह कब्जा किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा इस प्रकार के अवैध कब्जों को हटाने के भी निर्देश दिए गए है। परन्तु इस दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है।  9. शहर के आसपास के कई इलाकों में शासकीय भूमियों पर नकली मजारें बनाई गई है। बजंली हवाई पïट्टी के पास इसी तरह की नकली मजार बनाई गई है,जो धीरे धीरे आसपास की काफी जमीन पर फैला दी … Read more

भाजपा में बड़ा बदलाव : हाईकमान ने प्रदीप उपाध्याय को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी, मंत्री काश्यप ने दी बधाई

जानिए कुछ बड़ी बातें, जिससे उपाध्याय जिलाध्यक्ष की दौड़ में रहे आगे! पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। रतलाम भाजपा को नया जिलाध्यक्ष आखिरकार मिल गया। भाजपा हाईकमान ने जिला महामंत्री और कद्दावर भाजपा नेता प्रदीप उपाध्याय को जिलाध्यक्ष घोषित किया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने शुक्रवार रात 8 बजे करीब 4 नए जिलाध्यक्ष की सूची जारी की। जिसमें रतलाम सहित बालाघाट, बुराहनपुर व छतरपुर शामिल है। आपको बता दे राजेंद्रसिंह लुनेरा के कार्यकाल से भाजपा संगठन काफी नाराज चल रहा था। ऐसे में भाजपा लगातार जिले को नया चेहरा देने की जुगत में लगी थी। चुनाव से पहले ही संगठन ने अपनी खोज शुरू कर दी थी। मगर चुनाव के कारण यह प्रक्रिया टाल दी गई थी। गौरतलब है की इस दौड़ में रतलाम के कई नेता भी जुगत में लगे थे। मगर सभी के अरमानों पर उपाध्याय की घोषणा के बाद पानी फिर गया। जिले के नवनियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय को कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप ने अंगवस्त्र पहनाकर बधाई दी और मिठाई खिलाई। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष उपाध्याय ने नियुक्ति पर मंत्री काश्यप का आभार व्यक्त किया। पार्टी के जिला, मंडल, मोर्चा एवं प्रकोष्ठ केे पदाधिकारी सहित कई कार्यकर्ताओं ने  उपाध्याय का स्वागत कर उन्हें बधाई दी।

प्रथम आगमन : रतलामवासियों ने किया अपने मंत्री का भव्य स्वागत, 6 घंटे से अधिक चला चेतन्य काश्यप का रोड शो

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। कैबिनेट में जगह मिलने के बाद रतलाम पहुंचे मंत्री चेतन्य काश्यप का भव्य स्वागत शहरवासियों ने किया। जगह – जगह मंच लगाकर लोगों ने अपने नेता के लिए पुष्पवर्षा की। इस दौरान चेतन्य काश्यप ने भी खुली जीप में सवार होकर जनता का अभिवादन किया। काश्यप का स्वागत का सिलसिला तो बदनावर से ही शुरू हो चुका था। रतलाम शहर में भी प्रवेश करते ही कई मंचों से उनका स्वागत हुआ। कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित रोड शो करीब 3 बजे शुरू हुआ जो देर रात 9 बजे तक चला। जनता के स्वागत के बाद विसाजी मेंशन पहुंचे काश्यप ने जनता व कार्यकर्ताओं का धन्यवाद देते हुए कहा की कैबिनेट मंत्री के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने जो मुझे दायित्व दिया है, वह पूरे रतलाम का सम्मान है। इससे शहरवासियों का गौरव बढ़ा है। प्रदेश में रतलाम का गौरव बढ़े, ऐसे कार्य करेंगे। आमजन और कार्यकर्ताओं की भावनाओं, अपेक्षाओं एवं सपनों को पूरा करेंगे। चुनाव में भाजपा ने जो संकल्प पत्र रखा था, उसे पूरा करेंगे। मोदीजी की गारंटी को भी पूरा करेंगे और प्रदेश को नई ऊॅचाईयों पर ले जाएंगे। सभा से पूर्व काश्यप भारत माता चौराहा अलकापुरी से धोलावाड़ ऑफिस विनोबा नगर, बीमा हॉस्पिटल, गांधी नगर, लक्ष्मणपुरा चौराहा, डॉट की पुल, दो बत्ती चौराहा, दिलबहार चौराहा होते हुए स्टेशन रोड़ स्थित वीसाजी मेन्शन पहुंचे। मार्ग में जगह-जगह उनके काफीले को रोककर शहरवासियों ने उत्साह एवं उल्लास से आत्मीय स्वागत किया। काश्यप जब दिलबहार चौराहा से अपने निवास पर पहुंचे तो दिवाली जैसा जश्न मना। जोरदार आतिशबाजी के बीच श्रीमती नीता काश्यप ने तिलक लगाकर स्वागत किया। मार्ग में भी जगह-जगह कहीं मंचों से तो कहीं घरों से लोगों ने पुष्पवर्षा कर अपनी खुशियॉं जताई। वीसाजी मेंशन में आयोजित धन्यवाद सभा में काश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी के मन में एमपी है और हमारा दायित्व है कि हम प्रदेश की सभी 29 सीटें भाजपा को विजयश्री दिलाकर उन्हें सौंपे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रूप में प्रदेश को ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसका रतलाम से गहरा नाता है। कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्हें जो दायित्व दिया गया है, उसे वे पूरी शिद्दत से पूरा करेंगे। सभा में भाजपा जिला प्रभारी प्रदीप पाण्डेय ने कहा मोदीजी के मन में एमपी है तो भैयाजी के मन में रतलाम है। अपनी नई जिम्मेदारी के साथ वे शहर को नई ऊॅचाईयों पर लेकर जाएंगे। लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ता इसी जोश और उत्साह के साथ विजय प्राप्त कर नया इतिहास बनाएं। जिलाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह लुनेरा ने कहा कि कैबिनेट मंत्री के रूप में श्री काश्यप का रतलामवासियों ने जो स्वागत किया है, वह ऐतिहासिक एवं अद्भुत है। काश्यप को अब पूरा प्रदेश देखना है, लेकिन वे रतलाम का भी पूरा ध्यान रखेंगे। महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्री काश्यप का कैबिनेट मंत्री बनना रतलाम के लिए गर्व का क्षण है। श्री काश्यप ने जैसे पहले विधायक के रूप में रतलाम का नाम रोशन किया है, वैसे ही अब वे देश-विदेश में मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करेंगे। धन्यवाद सभा में भी विभिन्न समाजजन, कई संस्थाओं, कई संगठनों, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने काश्यप का सम्मान किया। इस दौरान जिला महामंत्री प्रदीप उपाध्याय, निर्मल कटारिया, जिला चुनाव संयोजक बजरंग पुरोहित, विधानसभा संयोजक मनोहर पोरवाल, नंदन जैन, मण्डल अध्यक्ष मयुर पुरोहित, निलेश गांधी, आदित्य डागा, कृष्णकुमार सोनी, विनोद यादव सहित भाजपा प्रदेश, जिला, मण्डल, मोर्चा, प्रकोष्ठ एवं एमआईसी सदस्य एवं पार्षदगण सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पॉलिटिकल ड्रामा : पूंजीपति काश्यप की तारीफ़ों पर उमा को हुआ एतराज!, ट्विटर पर तंज कसने के बाद देना पड़ी सफाई!

पूरे मामले में मंत्री चेतन्य काश्यप ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया, उमा से मिलने पहुंचे उनके घर तो बदले सुर! पब्लिक वार्ता – भोपाल,रतलामजयदीप गुर्जर। हालही में मध्‍यप्रदेश के नवनियुक्त केबिनेट मंत्री चेतन्य काश्‍यप (Madhya Pradesh Minister Chetanya Kasyap) ने अपनी विधायकी का वेतन भत्ता छोड़ने का एलान कर खूब सुर्खियां बटोरी। जिसके बाद उन्हें केबिनेट भी शामिल किया गया। इतने दिनों बाद अब काश्यप के वेतन नहीं लेने के फैसले पर पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती (Former Chief Minister Uma Bharti) ने एक्‍स हैंडल (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी है। उमा भारती (Uma Bharti) ने 5 बिंदुओं का एक बड़ा ट्वीट सुबह 10 बजकर 23 मिनट पर किया। यह ट्वीट उमा भारती ने प्रदेश के मुखिया सीएम डॉ मोहन यादव, संगठन के महामंत्री हितानंद शर्मा व बीजेपी के ऑफिसियल हेंडल को टैग किया। उमा भारती का अपनी ही सरकार और उनके नेताओं को घेरने का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले वो कई मुद्दों पर शिवराज सरकार को घेर चुकी है। इस बार उन्होंने चेतन्य काश्यप के वेतन भत्ते छोड़ने की बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तंज कसा। जिसके बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई। इस मुद्दे पर कई भाजपा नेताओं का दबी जुबान से कहना है की यह कोई विषय नहीं था यह केवल नई सरकार में अटेंशन लेने का एक तरीका था। जैसा कि वह पूर्व में भी कई बार कर चुकी है। हालांकि इस पूरे पॉलिटिकल ड्रामे के बीच मंत्री चेतन्य काश्यप ने किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उमा भारती की और से अपना पक्ष रखते हुए एक प्रेस रिलीज जारी की गई है। जिसमें उन्होंने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश करने की बात कही। उमा ने बिंदुवार ट्वीट में लिखा की 1) हाल ही में मंत्री बने तथा रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चेतन कश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की हैं । अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ़ लिखी थी की वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जो की साल भर का क़रीब 12 लाख होता हैं । 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं । 2) चेतन कश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियाँ की शिक्षा पर खर्च करें । 3) हमे यह याद रखना पड़ेगा की सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और ना वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं । 4) एक बार सांसद वरुण गाँधी ने कहा था की सांसदों को तनखा एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए । वरुण गाँधी ऐसा कर सकते है क्यूँकि वो हज़ारो करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है । अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए । 5) अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन कश्यप जैसे पूँजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की तनखा एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए । ट्वीट के बाद मचा बवालकाश्यप के लिए किए गए इस ट्वीट के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया। उमा भारती को अचानक काश्यप पर हमलावर होता देख हर कोई नेता हैरान था। उमा भारती के पास जब हाईकमान से फोन घनघनाए तो दोपहर 3 बजे बाद उमा भारती ने अपने ट्वीट पर सफाई पेश करते हुए एक और ट्वीट किया। यह बाद में एडिट भी हुआ। हालांकि उमा ने अपना पिछला ट्वीट नहीं हटाया। अपने दूसरे ट्वीट में उमा भारती ने वरुण गांधी और वीडी शर्मा को टैग कर लिखा की 1) जो मुझे आशंका थी वही हुआ । कुछ लोगों ने मेरी बातों का ग़लत मतलब निकाल ही लिया । लोकतंत्र में अमीर हो ग़रीब, सबको सांसद या विधायक होने का अधिकार है ।2) स्वयं मैं जब आठ वर्ष की थी तब से आज तक मैंने सुविधा संपन्न जीवन जिया है । मैं सरकार से प्राप्त सुविधाओं का पात्रता एवं आवश्यकता के अनुसार उपयोग करती हूँ । कभी कभी किसी संस्था, कोई असहाय महिला या किसी बच्चे की शिक्षा की सुविधा के लिए मैं चेक से ही राशि देती हूँ । लेकिन सरकार को कुछ वापिस नहीं करती ।3) रतलाम के विधायक जो अभी मंत्री बने हैं वह बहुत बड़े व्यवसायी एवं बहुत बड़े दानी भी है और मुझे उनसे कोई तकलीफ़ नहीं है। वरुण गाँधी एवं उनके इस विवरण को सुनकर की वो सांसद या विधायक की सुविधा नहीं लेते। तो यह बड़ी बात नहीं है किंतु जिन जनप्रतिनिधियों का जीवन यापन एवं अतिथि सेवा इन्ही सुविधाओं से होतीहै  वह स्वयं को छोटा अनुभव करेंगे जब की ऐसा नहीं है। सब बराबर है। जनता सबको वोट देती है। और पहुंच गए काश्यपट्विटर वार के बाद मंत्री काश्यप उमा भारती से मिलने उनके निवास जा पहुंचे। शाम करीब 5 बजे ट्वीट कर उमा भारती ने इसकी जानकारी दी। उमा ने ट्वीट कर लिखा की  1. रतलाम से विधायक एवं हाल ही में बने प्रदेश सरकार के मंत्री श्री चैतन्य कश्यप मेरे दूसरे ट्वीट के जवाब में स्वयं उपस्थित हो गए। 2. चैतन्य कश्यप जी को मैं 20 साल से जानती हूं वह बहुत बड़े व्यवसायी, बहुत बड़े दानी एवं समाजसेवी हैं। 3. वह अपने व्यवसाय से प्राप्त लाभ का बहुत बड़ा हिस्सा दान करते हैं किंतु फिर भी मैंने अपना सुझाव दोहराया कि वह अपने वेतन एवं भत्ते सरकार को वापस करने की जगह पर दान की राशि में शामिल कर लिया करें उन्होंने इस पर कहा कि वह इस पर विचार करेंगे। 4. मैंने उन्हें सफल मंत्री बनने के लिए शुभकामनाएं तथा आशीर्वाद भी दिया।

FAKE MESSAGE : विधायक काश्यप पर सैलाना की प्रत्याशी संगीता चारेल का आरोप!, अब हुई पुलिस को शिकायत, आखिर क्या है पूरा मामला ?

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। चुनाव के बाद अब सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले धुरंधर एक्टिव हो चुके है। एक ऐसा ही मामला रतलाम में सामने आया है। जहां सैलाना से पूर्व विधायक व 2023 में विधानसभा प्रत्याशी रही संगीता चारेल के नाम से एक फर्जी मैसेज फॉरवर्ड किया जा रहा है। यह मैसेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हुए चारेल तक पहुंचा। जिसे देखने के बाद वे खुद आश्चर्य में पड़ गई। दरअसल इस वायरल मैसेज में रतलाम विधायक चेतन्य काश्यप पर निर्दलीय विधायक कमलेश्वर डोडियार को मदद करने का आरोप लगाया गया है। आगे उसमें लिखा गया की संगीता चारेल ने संगठन को शिकायत की और कहा की मुझे मंत्री बनने से रोकने के लिए कमलेश्वर डोडियार को करोड़ो रूपये की मदद की, जिससे बीजेपी सैलाना में हार गई। मैसेज में दावा किया गया की मामला हाईकमान तक जा पहुंचा है। मैसेज के मिलते ही संगीता चारेल हरकत में आई और उन्होंने अपने पार्टी नेताओं को इससे अवगत करवाया। जिसके बाद पुलिस कप्तान राहुल कुमार लोढा के पास पहुंचकर उन्होंने लिखित शिकायत की। श्रीमती चारेल ने बताया कि व्हाट्सएप्प पर उन्हे जानकारी मिली कि उनके नाम से रतलाम विधायक चेतन्य काश्यप पर निर्दलीय विधायक कमलेश्वर डोडियार पर मदद करने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर उनके द्वारा संगठन को शिकायत करने की भ्रामक सूचना भी प्रसारित हुई है। श्रीमती चारेल के अनुसार जनता का निर्णय सर्वमान्य है। मेरे नाम से भ्रम फैलाया जा रहा है। मैंने केन्द्र, प्रदेश या संगठन मे ऐसी कोई शिकायत नही की गई। इस संबंध मे पुलिस को शिकायत का यह भ्रम फैलाने वालों की कार्रवाई की मांग की।

वाह विधायक जी! : एमपी के इस विधायक की चारो और चर्चा, कारण सरकारी वेतन – भत्ते और पेंशन को मना कर देना

सिफारिशों से भी दूर रहते है चेतन्य काश्यप, टोल टैक्स और पुलिस चालान तक भरता है यह विधायक! पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। मध्यप्रदेश के भाजपा विधायक ने सदन में एक अनोखी मिसाल पेश की। चेतन्य काश्यप ने विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन नहीं लेने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने खर्चा उठने में सक्षम है इसलिए यह राशि विधानसभा कोष में जमा कर दी जाए। काश्यप तीसरी बार रतलाम शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए हैं और उन्होंने एक बार फिर से विधायक के रूप में सरकार से कोई वेतन, भत्ते और पेंशन नहीं लेने का ऐलान किया है। आपको बता दे इससे पहले के उनके दो कार्यकाल में भी उन्होंने किसी प्रकार का कोई सरकारी लाभ नहीं लिया था। बता दें कि प्रत्येक विधायक को प्रति माह लगभग 70 हजार के वेतन भत्ते मिलते हैं। इसके अलावा रेलवे कूपन और हवाई यात्राएं एवं आजीवन पेंशन व चिकित्सा भत्ता जैसी अन्य सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में कश्यप ने सभी सुविधा का त्याग करते हुए कहा कि यह राशि प्रदेश के विकास पर व्यय हो। राष्ट्र सेवा और जनहित मेरा ध्येय – विधायक काश्यपविधानसभा में भी उन्होंने पहले ही वक्तव्य में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना यह निर्णय रख दिया। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जब ईश्वर की कृपा से वे जनहित के कार्य करने में सक्षम हैं, तो उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन-भत्ते और पेंशन का उपयोग शासन द्वारा जनहित में सीधे किया जाए।कश्यप ने सदन में कहा कि राष्ट्र सेवा और जनहित मेरा ध्येय है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं राजनीति में आया हूं। किशोरावस्था से ही समाज सेवा के कार्यों में अग्रसर हूं तथा कई सेवा संस्थानों में प्रकल्पों का संचालन कर रहा हूं। ईश्वर ने इस योग्य बनाया है कि जनसेवा में थोड़ा सा योगदान कर सकूं। इसी तारतम्य में विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन-भत्ते एवं पेंशन नहीं लेने का निश्चय किया है। पिछली दो विधानसभा में भी भत्ते नहीं लिए थे। मैं चाहता हूं कि मुझे प्राप्त होने वाले भत्ते एवं पेंशन का राजकीय कोष से आहरण न हो ताकि उस राशि का सदुपयोग प्रदेश के विकास एवं जनहित के कार्य हो सकें। सिफारिशों से दूरी रखते है काश्यपआमतौर पर एक राजनेता अपने लिए व कार्यकर्ताओं के लिए सहज ही सिफारिशें करते नजर आते है। मगर रतलाम के विधायक चेतन्य काश्यप का तौर तरीका बाकियों से अलग है। पुलिस थानों पर उनके नाम से की गई सिफारिशों को वो सिरे से इंकार कर देते है। उनके करीबी के अनुसार नियम व कायदे के पक्के विधायक काश्यप किसी कार्यकर्ता की गाड़ी का चालान अगर कट जाए तो वे नाराज कार्यकर्ता को बुलाकर खुद से चालान भरने की बात कहते हुए कार्यकर्ताओं को नियम पालन की नसीहत देकर मना लेते है। यही कारण है की पुलिस के सामने कोई भाजपाई विधायक जी का रोब नहीं दिखा पाता है। यहां तक की उनके नाम से टोल से गाड़ियां तक नहीं छोड़ी जाती है, जिसका कारण है कि वे खुद टोल टैक्स चुकाते है। विधायक काश्यप अपने फाउंडेशन के माध्यम से अनेक सेवा कार्यों को करते आ रहे है। जिससे गरीबों व कई समाज में वंचित लोगों को सहारा व प्रोत्साहन मिला है।

यह गलत है! : मुस्लिम महिला का भाजपा को वोट देना पड़ा महंगा, गुस्साए देवर ने कर दी पिटाई, देखे वीडियो

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के सामने पहुंची पीड़ित महिला, भय्या ने लाडली बहना को दिलाया न्याय का भरोसा! पब्लिक वार्ता – भोपाल,जयदीप गुर्जर। कहने को तो एमपी अजब है और गजब है। लेकिन कभी कभी एमपी में ऐसे गजब मामले सामने आते है जो एमपी की साख दाव पर लगा देते है। एक ऐसा ही मामला सीएम शिवराजसिंह चौहान के सामने आया। उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक मुस्लिम महिला से मुलाकात की, जिसे उसके देवर ने सिर्फ इसलिए पीटा था क्योंकि उसने बीजेपी को वोट दिया और वह जीत की खुशियां मना रही थी। सीएम ने ट्वीट में कहा की, ‘मजबूत लोकतंत्र के लिए बीजेपी को अपना मत देने पर मेरी एक बहन को उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित करने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित कर उचित कार्रवाई करने को कहा है। इसके साथ ही पीड़ित बहन को पूरी सुरक्षा व आर्थिक मदद भी दी जाएगी। मेरी बहन, तुम किसी बात की चिंता मत करना, तुम्हारा भाई सदैव तुम्हारे साथ है।’ कौन है यह मुस्लिम महिला?मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित महिला समीना बी से मुलाकात की। बीजेपी को वोट देने के कारण समीना को उनके देवर जावेद खां ने पीटा था। समीना अपने बच्चों के साथ सीएम हाउस में शिवराज से मिलने पहुंची। इस दौरान सीएम ने उनसे बात की और बच्चों को प्यार दिया। सीएम ने आश्वासन दिया कि वह महिला की सुरक्षा और सम्मान पर कोई आंच नहीं आने देंगे। बता दें कि मामला सीहोर जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के बरखेड़ा हसन गांव का है, जहां समीना बी नाम की महिला के साथ इसलिए मारपीट की गई थी क्योंकि उसने बीजेपी को वोट दिया था। यह घटना 4 दिसंबर की है, जिसकी शिकायत उसने पुलिस में भी की। 8 दिसंबर यानी शुक्रवार को महिला कलेक्टर के पास शिकायत लेकर पहुंची। उसका आरोप है कि अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। वहीं, देवर की गिरफ्तारी को लेकर पीड़िता ने कलेक्टर से गुहार लगाई। जिसके बाद मामला सीएम तक पहुंचा और उन्होंने महिला से शनिवार को मुलाकात की। कब हुई थी घटना ?महिला के साथ मारपीट की घटना 4 दिसंबर को सामने आई थी। महिला का कहना है कि वह बीजेपी की जीत पर खुशियां मना रही थी। इसी दौरान देवर गाली-गलौच करने लगा और जब महिला ने विरोध किया तो देवर ने मारपीट की। हालांकी महिला का कहना है कि उसने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने देवर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ धारा 294, 323, 506, 34 के तहत में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है की मामले की जांच कर रही है तथा जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

नेता या बिचौलिया? : भाजपा के तथाकथित उम्मीदवार मुकेश पंचोला का ऑडियो – वीडियो वायरल, नोट की गड्डी लेते दिखे नेताजी

नेता या बिचौलिया? : भाजपा के तथाकथित उम्मीदवार मुकेश पंचोला का ऑडियो – वीडियो वायरल, नोट की गड्डी लेते दिखे नेताजी आलोट/रतलाम – पब्लिक वार्ता, विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेशभर में चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है। सत्ताधारी और विपक्षी दल के नेता टिकट के जुगाड़ में मन लगाकर जुट गए है। चुनावी माहौल में अब वायरल होने का ट्रेंड भी शुरू हो चुका है। रतलाम के आलोट विधानसभा क्षेत्र के तथाकथित भाजपा उम्मीदवार का रुपये लेते वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। भाजपा के इस नेता का नाम मुकेश पंचोला है। वायरल वीडियो में कुछ लोग किसी काम को करवाने की बात को लेकर रुपये देते नजर आ रहे है। वहीं मुकेश पंचोला भी उनका काम पहले ही किसी अधिकारी से करवा देने की बात करते नजर आ रहे है। वीडियो में एक व्यक्ति नोटों की गड्डी गिनकर मुकेश की और बढ़ाता है और मुकेश पंचोला उसे सोफे पर रखवाकर उसे ढक देते है। इस वीडियो में मुकेश यह भी कहते नजर आ रहे है कि में नेता नहीं हूं वरना यह सारा भृष्टाचार खत्म कर देता। इस बार मुझे जितवाओ सब भृष्टाचार खत्म कर दूंगा। जानकारी के अनुसार वर्तमान में मुकेश पंचोला के पास जिला उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा का पद है। वहीं पंचोला पिछले विधनसभा चुनाव में निर्दलीय हाथ आजमा चुके है। इस बार नेताजी भाजपा से टिकट चाहने की पूरी चाह रख रहे है। सूत्रों की माने तो लेन देन का यह मामला राजस्व विभाग के किसी अधिकारी से जुड़ा है। [embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=G1vI1xjKk2M[/embedyt] वीडियो के अलावा एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें मुकेश द्वारा वायरल वीडियो को रूकवाने की बात की जा रही है। पूरे मामले में भाजपा के नेता व तथाकथित उम्मीदवार मुकेश पंचोला ने पब्लिक वार्ता से बातचीत में बताया कि उक्त व्यक्ति ने मुझे किसी काम को करवाने के लिए बीच में रखकर लेन देन की थी, यह बातचीत करने के बाद मेरे पास आये थे। ऐसा कोई मामला नहीं है। हालांकि किस काम को लेकर और रुपये किसको देना थे आदि सवालों से पंचोला बचते नजर आए। बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ताधारी पार्टी के नेता सत्ता के दम खम पर अब बिचौलियों की भूमिका का निर्वहन कर रहे है? अगर ऐसा है तो पूरा घटनाक्रम भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करने वाली सत्ताधारी पार्टी की परत को उजागर कर देने वाला है। उक्त मामले में रूपये देने वाले व्यक्ति की कोई जानकारी अब तक सामने निकल कर नहीं आई है। [embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=bNyeutqiYe4[/embedyt] (DISCLAIMER : पब्लिक वार्ता न्यूज वायरल वीडियो और ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नही करता है।)