Ratlam News: इंदौर–दाहोद रेल परियोजना में तेजी, पीथमपुर–धार ट्रैक का टॉवर वेगन से परीक्षण शुरू

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल अंतर्गत बहुप्रतीक्षित इंदौर–दाहोद नई रेल लाइन परियोजना अब तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में टीही से धार के बीच निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जबकि इंदौर से टीही तक का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। वीडियो देखे रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए टीही–धार खंड को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कार्य किया जा रहा है। टीही से पीथमपुर के बीच टनल निर्माण अभी शेष है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ट्रैक मशीन (टीटीएम) को सड़क मार्ग से लाकर ट्रैक पर उतारा गया। इस मशीन के जरिए पीथमपुर से धार तक ट्रैक की पैकिंग और आवश्यक मरम्मत कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसके बाद अब ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा जांच के लिए टॉवर वेगन से परीक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 23 मार्च से 26 मार्च 2026 के बीच टॉवर वेगन को निर्धारित गति से चलाकर ट्रैक की स्थिरता और सुरक्षा का परीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहले ही ट्रैक के आसपास न जाने की एडवाइजरी जारी की है। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण की निगरानी स्वयं मुख्य इंजीनियर (निर्माण) धीरज कुमार कर रहे हैं, जो मुंबई से इंदौर पहुंचे हैं। उन्होंने 23 मार्च को पीथमपुर से धार तक टॉवर वेगन के माध्यम से ट्रैक का निरीक्षण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। खास बात यह है कि इंदौर–दाहोद रेल लाइन पर पहली बार टॉवर वेगन चलाकर परीक्षण किया गया, जो इस परियोजना की तेज प्रगति को दर्शाता है। रेलवे प्रशासन का लक्ष्य है कि पीथमपुर–धार खंड को जल्द से जल्द तैयार कर रेल सेवा शुरू की जाए। साथ ही समानांतर रूप से टनल निर्माण कार्य भी तेजी से जारी रहेगा। क्षेत्र को मिलेगा बड़ा फायदा इस रेल परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर से धार के बीच यात्रा आसान, सुरक्षित और तेज हो जाएगी। साथ ही यह परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक विकास, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

1 अप्रैल से HDFC Bank के नियम बदलेंगे: UPI ATM विड्रॉल पर लगेगा चार्ज, जानिए पूरी डिटेल

1 अप्रैल 2026 से HDFC Bank के ATM और UPI विड्रॉल नियम बदल रहे हैं। अब UPI कैश निकासी भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल होगी। जानिए नए चार्ज, लिमिट और बचने के तरीके। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।  HDFC Bank New Rules April 2026:नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक HDFC Bank अपने ग्राहकों के लिए अहम बदलाव करने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में बड़ा परिवर्तन लागू होगा, जिसका सीधा असर करोड़ों ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। अब तक एटीएम से UPI के जरिए कैश निकालना (UPI Withdrawal) एक अलग सुविधा मानी जाती थी, लेकिन नए नियमों के तहत इसे भी आपकी मंथली फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल कर दिया गया है। UPI विड्रॉल अब फ्री लिमिट में शामिल 1 अप्रैल से लागू नए नियम के अनुसार: फ्री लिमिट खत्म होते ही लगेगा चार्ज मेट्रो vs नॉन-मेट्रो: अलग लिमिट ग्राहकों पर क्या होगा असर? इस बदलाव के बाद: कैसे बचें अतिरिक्त चार्ज से?

Instagram DM Privacy Update: 8 मई से हटेगा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, प्राइवेट मैसेज पर बढ़ेगी निगरानी?

Instagram DM Privacy Update: Instagram ने डायरेक्ट मैसेज से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन हटाने का फैसला लिया है। 8 मई 2026 से लागू होने वाले इस अपडेट के बाद प्राइवेट चैट की सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं। जानिए पूरा मामला। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Instagram DM Privacy Update: दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक Instagram के करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने डायरेक्ट मैसेज (DM) से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर को हटाने जा रही है। यह बदलाव 8 मई 2026 से लागू होगा। इस अपडेट के बाद इंस्टाग्राम पर भेजे जाने वाले मैसेज पहले की तरह पूरी तरह प्राइवेट नहीं रहेंगे। यानी तकनीकी रूप से कंपनी चाहे तो यूजर्स के मैसेज को एक्सेस कर सकती है। 2023 में शुरू हुआ था एन्क्रिप्टेड चैट फीचर रिपोर्ट्स के मुताबिक इंस्टाग्राम ने दिसंबर 2023 में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर की शुरुआत की थी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी बातचीत को सिर्फ मैसेज भेजने वाला और रिसीव करने वाला ही पढ़ सके। लेकिन अब इस फीचर को हटाने के बाद यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़ी अतिरिक्त सुरक्षा समाप्त हो जाएगी। यूजर्स अपनी चैट और मीडिया डाउनलोड कर सकते हैं इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta Platforms ने कहा है कि एन्क्रिप्शन बंद होने से पहले यूजर्स अपनी मौजूदा चैट और मीडिया फाइल्स डाउनलोड कर सकते हैं। आखिर Meta ने यह फैसला क्यों लिया? हालांकि Meta ने आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे ऑनलाइन सुरक्षा और सरकारी नियमों का दबाव हो सकता है। दुनिया के कई देशों की सरकारें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियम लागू करने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि एन्क्रिप्टेड चैट्स के जरिए बच्चों के शोषण या गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़ा कंटेंट ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। नए नियमों का भी असर यूरोपियन यूनियन का प्रस्तावित EU Chat Control Regulation और ब्रिटेन का Online Safety Act 2023 सोशल मीडिया कंपनियों को संदिग्ध और अवैध कंटेंट को स्कैन करने और हटाने के लिए बाध्य करता है। ऐसे में एन्क्रिप्शन हटाने से Meta के लिए इन नियमों का पालन करना आसान हो सकता है। क्या WhatsApp और Messenger पर भी पड़ेगा असर? इस फैसले के बाद यूजर्स के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या Meta के अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp और Facebook Messenger पर भी भविष्य में ऐसे बदलाव हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल कंपनी ने इन ऐप्स के एन्क्रिप्शन को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की है।

Mobile Data: क्या मोबाइल डेटा होगा महंगा? हर 1GB पर लग सकता है ₹1 टैक्स, जानिए क्या है मामला

Mobile Data भारत में मोबाइल डेटा महंगा हो सकता है। सरकार हर 1GB डेटा पर ₹1 टैक्स लगाने के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। जानिए पूरा मामला और यूजर्स पर इसका कितना असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Mobile Data: भारत में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए आने वाले समय में डेटा महंगा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार मोबाइल डेटा उपयोग पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की संभावना का अध्ययन कर रही है। इसके लिए दूरसंचार विभाग (DoT) को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक समीक्षा बैठक के दौरान मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद सरकार ने दूरसंचार विभाग से यह जांच करने को कहा कि क्या मोबाइल डेटा इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जा सकता है और यदि लगाया जाए तो उसका ढांचा कैसा होगा। हर 1GB डेटा पर लग सकता है ₹1 टैक्स रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें मोबाइल डेटा उपयोग पर प्रति 1GB लगभग ₹1 का अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव शामिल है। अगर यह मॉडल लागू किया जाता है, तो जब भी कोई यूजर मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करेगा, उसे मौजूदा चार्ज के अलावा यह अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि इस तरह का टैक्स लागू होता है तो सरकार को इससे हर साल करीब ₹22,900 करोड़ तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। पहले से लग रहा है 18% GST गौरतलब है कि भारत में मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर पहले से ही 18% जीएसटी लगाया जाता है। यानी यूजर्स टेलीकॉम सेवाओं पर पहले ही टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में यदि मोबाइल डेटा उपयोग पर अलग से टैक्स लागू होता है, तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा अतिरिक्त शुल्क होगा। भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट भारत उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल इंटरनेट की कीमत दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम है। कम कीमतों के कारण देश में वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके चलते डेटा की खपत भी लगातार बढ़ रही है। अभी नहीं हुई कोई आधिकारिक घोषणा हालांकि, इस मामले में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल सरकार ने दूरसंचार विभाग को इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

LPG crisis India: LPG संकट का असर इंटरनेट पर? गैस की किल्लत से मोबाइल नेटवर्क ठप होने की आशंका

LPG crisis India: अमेरिका-ईरान-इजराइल तनाव के बीच भारत में LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। टेलीकॉम कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर संकट लंबा चला तो मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG crisis India: अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। इस तनाव के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर केवल रसोई गैस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ सकता है। टेलीकॉम टावरों के संचालन पर बढ़ सकता है असर दरअसल, कई जगह टेलीकॉम टावरों और डेटा सेंटरों के बैकअप जनरेटर के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो टेलीकॉम कंपनियों को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि कंपनियों के पास बिजली और अन्य ईंधन के विकल्प मौजूद होते हैं, लेकिन लंबे समय तक एलपीजी की कमी रहने पर संचालन लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या भी सामने आ सकती है। DIPA ने सरकार को दी चेतावनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA) के अनुसार, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद तेल कंपनियों ने टेलीकॉम टावर निर्माण से जुड़ी कुछ इकाइयों को एलपीजी की आपूर्ति रोक दी है।हालांकि फिलहाल देश में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन स्थिति लंबी चली तो समस्या बढ़ सकती है। टेलीकॉम टावर निर्माण भी हो सकता है प्रभावित टेलीकॉम टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में गैल्वनाइजेशन प्लांट में जिंक को पिघली हुई अवस्था में बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत होती है।कुछ कंपनियों ने फिलहाल कम लौ पर प्लांट चलाने का विकल्प अपनाया है, लेकिन यदि एलपीजी की कमी जारी रही तो उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। इससे नए टेलीकॉम टावरों के निर्माण में देरी हो सकती है और नेटवर्क विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है। क्यों जरूरी है मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क आज के दौर में टेलीकॉम नेटवर्क केवल कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। 5G नेटवर्क, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन, आपातकालीन सेवाएं, डिजिटल भुगतान, सरकारी ऑनलाइन सेवाएं और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं पूरी तरह इस नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। ऐसे में इसकी निर्बाध उपलब्धता बेहद जरूरी है। सरकार से की गई अहम मांग DIPA ने दूरसंचार विभाग से मांग की है कि टेलीकॉम टावर निर्माण इकाइयों को एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध से छूट दी जाए। साथ ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कीमतों में उछाल और सप्लाई संकट की स्थिति बन सकती है।

PM Kisan: 13 मार्च को आएगी PM किसान की 22वीं किस्त, करोड़ों किसानों के खाते में ट्रांसफर होंगे 2000 रुपये

पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त 13 मार्च को जारी होगी। पात्र किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। जानिए किसे मिलेगा लाभ और कैसे चेक करें अपना स्टेटस। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PM Kisan: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) के तहत देशभर के करोड़ों किसानों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार ने योजना की 22वीं किस्त जारी करने की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सरकार के अनुसार 13 मार्च को पात्र किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी। इस घोषणा के बाद लंबे समय से किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिली है। 2019 में शुरू हुई थी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। यानी हर चार महीने में 2000 रुपये सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। अब तक सरकार किसानों को 21 किस्तें जारी कर चुकी है, जबकि अब 22वीं किस्त जारी होने जा रही है। किसानों को होली से पहले मिली खुशखबरी पिछले कुछ समय से किसानों के बीच यह चर्चा चल रही थी कि फरवरी के अंत तक किस्त जारी हो सकती है। इसके बाद कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि होली से पहले किसानों को किस्त मिल सकती है। अब सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा करते हुए बताया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये की किस्त ट्रांसफर की जाएगी। इन कारणों से अटक सकती है किस्त कुछ किसानों को इस बार किस्त मिलने में परेशानी भी हो सकती है। अगर किसान ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की हैं तो उनकी किस्त रुक सकती है। मुख्य कारण इस प्रकार हैं— इन वजहों से कई किसानों की किस्त अटक सकती है। ऐसे चेक करें अपने खाते की स्थिति किसान आसानी से ऑनलाइन यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं। इसके लिए उन्हें पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद ये स्टेप्स फॉलो करें— रुकी हुई किस्त भी मिल सकती है अगर किसी किसान की किस्त पहले किसी कारण से रुक गई थी और उसने अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, तो भविष्य में उसे किस्त का लाभ मिल सकता है। कुछ मामलों में पहले की रुकी हुई किस्त भी बाद में जारी की जा सकती है, हालांकि यह पूरी तरह जांच और पात्रता पर निर्भर करता है।

Ratlam News: 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत: संपत्तिकर-जलकर के बकायादारों को सरचार्ज में बड़ी छूट

रतलाम में 14 मार्च 2026 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन होगा। संपत्तिकर और जलकर के बकायादारों को सरचार्ज में 100% तक की छूट मिलेगी। जानिए कहां और कैसे जमा करें बकाया राशि। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और राज्य शासन के निर्देशानुसार 14 मार्च शनिवार को नेशनल लोक अदालतका आयोजन किया जाएगा। इस दौरान नगर निगम रतलाम द्वारा संपत्तिकर और जलकर के बकायादारों को अधिभार (सरचार्ज) में विशेष छूट का लाभ दिया जाएगा। नगर निगम ने बकाया कर जमा कराने के लिए दो स्थानों पर व्यवस्था की है। पहला काउंटर नगर निगम कार्यालय में फायर स्टेशन भवन के पासऔर दूसरा जिला न्यायालय परिसर में लगाए जाने वाले शिविर में रहेगा। दोनों स्थानों पर कार्यालयीन समय में बकाया राशि जमा की जा सकेगी। संपत्तिकर पर मिलेगी यह छूट नेशनल लोक अदालत में संपत्तिकर के प्रकरणों में निम्नानुसार सरचार्ज में छूट दी जाएगी— जलकर पर मिलेगी यह राहत जलकर के बकायादारों को भी अधिभार में छूट दी जाएगी— नगर निगम के अनुसार यह छूट वन टाइम सेटलमेंट (एक बार) के तहत दी जाएगी और यह केवल वित्तीय वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशिपर ही लागू होगी। साथ ही यह सुविधा केवल 14 मार्च 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत के दिन ही मान्य रहेगी। नगर निगम ने सभी संपत्तिकर और जलकर बकायादारों से अपील की है कि वे 14 मार्च को आयोजित एक दिवसीय लोक अदालत में उपस्थित होकर बकाया राशि जमा करें और अधिभार में दी जा रही छूट का लाभ उठाएं।

मिडिल ईस्ट युद्ध से तेल 100 डॉलर पार, भारत में महंगाई का खतरा बढ़ा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गई है। भारत में महंगाई और LPG-पेट्रोल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया, जिसके चलते तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ने लगा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 42% ज्यादा है। इससे भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता है तो इससे महंगाई में 30 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है और आर्थिक विकास दर में करीब 15 बेसिस पॉइंट्स की कमी आ सकती है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ परिवहन लागत भी बढ़ती है, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर संकट से बढ़ी चिंता खाड़ी क्षेत्र एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। साल 2025 में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला करीब 87% कच्चा तेल और 86% LNG एशियाई देशों में ही पहुंचा था। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने से सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी बढ़ गया है। LPG की कीमतों पर भी असर मिडिल ईस्ट संकट का असर अब घरेलू गैस पर भी दिखने लगा है। हाल ही में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जो करीब एक साल बाद पहली वृद्धि है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और देश में 90% से ज्यादा LPG मिडिल ईस्ट से आयात होती है। सरकार क्या कदम उठा सकती है? सरकार पहले भी तेल की कीमतों के झटके को कम करने के लिए टैक्स में कटौती जैसे कदम उठा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो सरकार को फिर से टैक्स में राहत, रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। आम लोगों पर क्या असर होगा? तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है।

Indian Railways PPP Policy: भारतीय रेलवे की PPP पॉलिसी में बदलाव की तैयारी, निवेश और प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बढ़ावा

Indian Railways PPP Policy: भारतीय रेलवे 10 साल पुरानी PPP पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कंसेशन पीरियड 50 साल तक बढ़ाने और जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी रेलवे लेने के प्रस्ताव से रेलवे प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश बढ़ेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Indian Railways PPP Policy: यात्रियों की सुविधाओं और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रेलवे अब अपनी 10 साल पुरानी प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (PPP) पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य निजी निवेशकों को ज्यादा सुरक्षा देना, जोखिम कम करना और रेलवे प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना है। रेलवे की नई रणनीति के तहत दो बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे प्राइवेट कंपनियों के लिए रेलवे परियोजनाओं में निवेश करना पहले से ज्यादा आसान और आकर्षक हो जाएगा। 50 साल तक बढ़ सकता है कंसेशन पीरियड फिलहाल रेलवे के PPP प्रोजेक्ट्स में कंसेशन पीरियड 20 से 35 साल के बीच होता है। अब रेलवे इसे बढ़ाकर 50 साल तक करने का प्रस्तावला रहा है। इससे निजी कंपनियों को अपने निवेश की लागत निकालने के लिए ज्यादा समय मिलेगा और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का भरोसा भी बढ़ेगा। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw पहले ही गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) के लिए 50 साल का कंसेशन पीरियड घोषित कर चुके हैं, जिसे इस नई पॉलिसी की शुरुआत माना जा रहा है। जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी रेलवे की होगी मौजूदा व्यवस्था में PPP प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और खर्च का बोझ निजी कंपनियों पर पड़ता है, जबकि जमीन रेलवे की होती है। इस कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी हो जाती है। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार अब जमीन अधिग्रहण की पूरी जिम्मेदारी रेलवे खुद ले सकता है। यह कदम हाईवे प्रोजेक्ट्स के अनुभव को देखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। 35 हजार करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स रेलवे ने मार्च 2028 तक PPP मॉडल के तहत 15 बड़े प्रोजेक्ट्स को चुना है, जिनकी कुल लागत करीब 35,817 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में नई रेल लाइन बिछाना, ट्रैक डबल करना और स्टेशन रीडेवलपमेंट जैसे काम शामिल हैं। वहीं, 2012 की मौजूदा PPP पॉलिसी के तहत दिसंबर 2025 तक 18 प्रोजेक्ट्स (16,686 करोड़ रुपये) पूरे हो चुके हैं, जबकि 7 प्रोजेक्ट्स (16,362 करोड़ रुपये) पर अभी काम जारी है। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा फायदा नई PPP पॉलिसी लागू होने से रेलवे प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश बढ़ेगा, काम की गति तेज होगी और रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही देश में लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Ratlam News: रतलाम में रंगपंचमी गैर जुलूस 8 मार्च को, सुबह 7 से रात 10 बजे तक रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रंगपंचमी पर्व के अवसर पर 8 मार्च 2026 को रतलाम जागृति मंच द्वारा परंपरागत गैर जुलूस निकाला जाएगा। यह गैर सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए रतलाम यातायात पुलिस ने विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। जानकारी के अनुसार गैर में शामिल लोग धानमंडी स्थित रानी जी के मंदिर पर एकत्रित होंगे। यहां से जुलूस गणेश देवरी, न्यू क्लॉथ मार्केट, जमनालाल स्वीट्स, महालक्ष्मी मंदिर, घांस बाजार चौराहा, चौमुखी पुल, चांदनी चौक, तोपखाना, हरदेवलाला पिपली होते हुए फिर रानी जी के मंदिर पहुंचेगा। इसके बाद नाहरपुरा चौराहा और डालूमोदी चौराहा पहुंचकर गैर का समापन किया जाएगा। यातायात पुलिस के अनुसार जुलूस के दौरान कई मार्गों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों का डायवर्जन किया जाएगा। रानी जी के मंदिर क्षेत्र में भीड़ को देखते हुए नाहरपुरा चौराहा, शहीद चौक और हरदेवलाला पिपली से मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों का मार्ग परिवर्तित रहेगा। गणेश देवरी क्षेत्र में जुलूस के पहुंचने के दौरान बजाज खाना, तोपखाना और चौमुखी पुल से गणेश देवरी की ओर जाने वाले वाहनों को दूसरे मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। वहीं न्यू क्लॉथ मार्केट, घांस बाजार चौराहा, डालूमोदी बाजार, कलाईगर मार्ग और खैराती वास क्षेत्र में भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। चौमुखी पुल और चांदनी चौक क्षेत्र में जुलूस प्रवेश के समय त्रिपोलिया गेट, बाजना बस स्टैंड, गौशाला रोड और गणेश देवरी से आने वाले वाहनों का भी मार्ग परिवर्तन रहेगा। बजाज खाना से हरदेवलाला पिपली की ओर जुलूस पहुंचने के दौरान नीम चौक, आबकारी चौराहा और मोमीनपुरा की ओर से आने वाले वाहनों को भी डायवर्ट किया जाएगा। यातायात पुलिस के अनुसार यह ट्रैफिक व्यवस्था 8 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक लागू रहेगी। इस दौरान शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पुलिस ने शहर की आम जनता से अपील की है कि रंगपंचमी के दौरान तय किए गए मार्ग परिवर्तन का पालन करें और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी लोग सुरक्षित और सुचारू रूप से पर्व का आनंद ले सकें।

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