MP News: MP के सरकारी स्कूलों के लिए नई सौगात, लगातार 3 साल 100% रिजल्ट पर मिलेगा ₹5 लाख का इनाम

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 साल लगातार 100% बोर्ड रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को ₹5 लाख और प्राचार्यों को ₹1 लाख पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि जो शासकीय विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में आयोजित महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व एवं अलंकरण समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर प्रदेश के पहले ‘गीता भवन’ का भी लोकार्पण हुआ, जिसका निर्माण लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को सम्मानित करना सरकार की प्राथमिकता है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा, नवाचार और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। 100% रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को मिलेगा 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो सरकारी विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार होगा और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में भी सुधार आएगा। राचार्यों को मिलेगा 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री ने लगातार तीन वर्षों तक उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों के लिए भी विशेष पुरस्कार की घोषणा की। ऐसे विद्यालयों के संस्था प्रमुखों को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती पूरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 10,000 नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाकर पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। ‘मिशन बुनियाद’ के तहत AI आधारित पढ़ाई प्रदेश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मिशन बुनियाद’ की शुरुआत की घोषणा भी की। इस योजना के तहत प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों (कक्षा 9वीं से 12वीं) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। उज्जैन में हुआ प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जयिनी ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की ऐतिहासिक भूमि है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि सांदीपनि की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया।

Government Scheme 2026: नौकरी छूटने पर मिलेगी आर्थिक राहत, जानिए क्या है अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

Government Scheme 2026 अगर आपकी ESIC वाली नौकरी छूट गई है तो अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत 90 दिन तक 50% सैलरी मिल सकती है। जानें पात्रता, दस्तावेज और क्लेम प्रक्रिया। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Government Scheme 2026: प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए नौकरी का सुरक्षित रहना हमेशा तय नहीं होता। आर्थिक मंदी, कंपनी की वित्तीय स्थिति या अन्य कारणों से अचानक नौकरी चली जाए तो परिवार की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी स्थिति में अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना बड़ी राहत देने वाली योजना साबित हो सकती है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को नौकरी छूटने के बाद 90 दिनों तक उनकी औसत मजदूरी का 50 प्रतिशत बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है। केंद्र सरकार ने इस योजना की अवधि 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। लोकसभा में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित उत्तर में बताया कि योजना के तहत क्लेम प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। क्या है अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना? अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) ESIC के तहत बीमित कर्मचारियों के लिए शुरू की गई एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका उद्देश्य नौकरी छूटने के बाद कर्मचारियों को कुछ समय तक आर्थिक सहायता देना है, ताकि वे नई नौकरी मिलने तक अपने खर्च पूरे कर सकें। यह योजना पहली बार 1 जुलाई 2018 को प्रायोगिक रूप से लागू की गई थी। शुरुआत में कर्मचारियों को औसत वेतन का 25 प्रतिशत भुगतान किया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। ध्यान दें: इस योजना का लाभ जीवन में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना: एक नजर में योजना का नाम: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) 🏢 संचालित संस्था: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) किसके लिए: ESIC में पंजीकृत निजी क्षेत्र के कर्मचारी मिलने वाला लाभ: औसत वेतन का 50% बेरोजगारी भत्ता लाभ की अवधि: अधिकतम 90 दिन (3 महीने) लाभ कितनी बार मिलेगा: जीवन में सिर्फ एक बार योजना की वर्तमान अवधि: 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 पात्रता: कम से कम 1 वर्ष की नौकरी और ESIC में 78 दिनों का अंशदान क्लेम कब कर सकते हैं: नौकरी छूटने के 30 दिन बाद जरूरी दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, शपथ पत्र और क्लेम फॉर्म भुगतान का तरीका: राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। उदाहरण: यदि आपकी आखिरी मासिक सैलरी ₹20,000 थी, तो पात्र होने पर आपको 3 महीने तक हर महीने ₹10,000 की आर्थिक सहायता मिल सकती है। कौन उठा सकता है योजना का लाभ? इस योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी। नौकरी छूटने के कितने दिन बाद मिलेगा पैसा? योजना के तहत बेरोजगारी भत्ता नौकरी छूटने के 30 दिन बाद देय होता है। यदि पात्रता पूरी होती है तो कर्मचारी क्लेम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की आखिरी मासिक सैलरी 20,000 रुपये थी, तो उसे तीन महीने तक हर महीने 10,000 रुपये तक का भुगतान मिल सकता है। क्लेम करने की प्रक्रिया यदि आपकी नौकरी छूट चुकी है और 30 दिन पूरे हो चुके हैं, तो इन चरणों का पालन करें— क्लेम के लिए जरूरी दस्तावेज क्लेम करते समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी— इन दस्तावेजों को संबंधित ESIC शाखा या DCBO कार्यालय में जमा किया जा सकता है। इच्छुक कर्मचारी डाक के माध्यम से भी दस्तावेज भेज सकते हैं। ESIC से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

August Rules 2026: 1 August 2026 से बदलेंगे कई अहम नियम, जानिए LPG, बैंक, ITR और तत्काल टिकट से जुड़े सभी अपडेट

August Rules 2026: 1 अगस्त 2026 से LPG सिलेंडर, बैंक छुट्टियां, तत्काल टिकट, ITR, क्रेडिट कार्ड और ATM नियमों में बदलाव हो सकते हैं। जानिए कौन-कौन से नए नियम आपकी जेब पर असर डालेंगे। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। August Rules 2026: हर नए महीने की शुरुआत कुछ नए बदलाव लेकर आती है। इस बार भी 1 अगस्त 2026 से ऐसे कई नियम लागू होने जा रहे हैं जिनका असर सीधे आम लोगों की जेब, बैंकिंग सेवाओं और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है। एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों से लेकर बैंकों की छुट्टियों, रेलवे के तत्काल टिकट, ITR फाइलिंग, क्रेडिट कार्ड और डिजिटल बैंकिंग तक कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यदि अगस्त महीने में आपका बैंक, गैस बुकिंग या टैक्स से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो इन नियमों की जानकारी पहले से होना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। नीचे जानिए 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाले प्रमुख बदलाव। 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाले प्रमुख बदलाव 1. एलपीजी सिलेंडर के नए दाम जारी होंगे हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां घरेलू (14.2 किलोग्राम) और कमर्शियल (19 किलोग्राम) एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी करती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव होता है तो इसका असर सिलेंडर की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए 1 अगस्त को घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की नई कीमतों पर सभी की नजर रहेगी। 2. तत्काल टिकट बुकिंग में नई व्यवस्था रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए काउंटर पर टोकन सिस्टम लागू किया है। अब यात्रियों को पहले टोकन मिलेगा और नंबर आने पर टिकट बुक किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ और धक्का-मुक्की को कम करना है। 3. अगस्त महीने की बैंक छुट्टियां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बैंक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार अगस्त महीने में स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार सहित कई अवसरों पर अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। यदि आपको बैंक शाखा जाकर कोई जरूरी काम करना है, तो छुट्टियों की सूची पहले जरूर देख लें। 4. ATM और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर रखें नजर हालांकि ATM, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, लेकिन कुछ बैंक समय-समय पर अपने शुल्क, मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा या अन्य नियमों में बदलाव कर सकते हैं। इसलिए अपने बैंक द्वारा जारी आधिकारिक सूचना पर नजर रखना बेहतर रहेगा। 5. क्रेडिट कार्ड के नियम बदल सकते हैं हर महीने कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव करते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं— यदि आप नियमित रूप से क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं, तो अपने बैंक की नई शर्तें जरूर जांच लें। 6. ईंधन की कीमतों में भी हो सकता है बदलाव एलपीजी के अलावा विमान ईंधन (ATF) सहित अन्य ईंधन की कीमतों में भी बदलाव संभव है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर नई दरें तय की जाती हैं। यदि ATF महंगा होता है तो भविष्य में हवाई यात्रा की लागत पर भी असर पड़ सकता है। 7. ITR भरने वालों के लिए महत्वपूर्ण तारीख जिन करदाताओं को ITR-3 और ITR-4 फॉर्म भरना है तथा जिनके खातों का ऑडिट आवश्यक नहीं है, उनके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। 8. होम लोन और EMI पर भी रह सकती है नजर अगस्त महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होने की संभावना है। यदि रेपो रेट में कोई बदलाव होता है तो इसका असर— की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

MP News: इंदौर मेट्रो के आसपास होगा बड़ा बदलाव, 31 किमी कॉरिडोर पर बनेंगे 4 TOD क्लस्टर, हाईराइज डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

MP News: इंदौर मेट्रो के 31.32 किमी रूट के आसपास 4 TOD क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। जानिए किन इलाकों में होगा हाईराइज डेवलपमेंट और क्या होंगे बड़े बदलाव। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर शहर आने वाले वर्षों में एक नए शहरी विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना के साथ अब शहर में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) की योजना को भी गति दी जा रही है। इसका उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के आसपास आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं वाले क्षेत्रों का विकास करना है। 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे में विशेष विकास क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ शहर के विकास की दिशा भी बदल सकती है। इसके लिए पहले चरण में चार प्रमुख क्लस्टर तैयार किए गए हैं। Indore Metro TOD Corridor क्या है? ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) ऐसा शहरी विकास मॉडल है, जिसमें मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाता है। इस मॉडल का उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। पहले चरण में इन 4 क्लस्टर में होगा विकास शुरुआत में मेट्रो रूट के प्रमुख स्टेशनों को जोड़ते हुए चार क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। पहला क्लस्टर दूसरा क्लस्टर तीसरा क्लस्टर चौथा क्लस्टर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास क्या-क्या बदलेगा? TOD योजना लागू होने के बाद मेट्रो रूट के आसपास कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रमुख विकास कार्य शहरवासियों और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव TOD कॉरिडोर तैयार करने वाली एजेंसी अरुप (Arup) शहर के नागरिकों, शहरी योजनाकारों और संबंधित विशेषज्ञों से सुझाव भी लेगी। इन सुझावों के आधार पर विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर मॉडल तैयार हो सके। मास्टर प्लान के साथ होगा समन्वय इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) के इंदौर रीजनल सेंटर द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि TOD योजना को इंदौर के नए मास्टर प्लान और रीजनल प्लान के साथ जोड़ा जाएगा। आईटीपीआई इंदौर रीजनल सेंटर की सचिव प्रकृति सेठी और चेयरमैन डी. एल. गोयल के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर TOD से जुड़े नियमों और विकास संबंधी प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि परियोजना प्रभावी ढंग से लागू हो सके। विशेषज्ञों ने साझा किए अंतरराष्ट्रीय अनुभव कार्यक्रम में अरुप कंसल्टेंसी फर्म के विशेषज्ञ जिग्नेश मेहता और रोमी राय ने विभिन्न शहरों में लागू TOD मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास क्लस्टर आधारित विकास से शहरी यातायात, भूमि उपयोग और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

MP News: किसानों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला, अब 60% मूंग खरीदेगी; ई-टोकन व्यवस्था भी फिलहाल स्थगित

MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की मांग मानते हुए मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% कर दी है। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख भी बढ़ी, ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। किसानों की मांग और जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए अब पात्र किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 25 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी जाएगी। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के हजारों मूंग उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग और खरीदी की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई जाएगी। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, ओबीसी कल्याण मंत्री कृष्णा गौर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। MP मूंग खरीदी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव बैठक के बाद कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का प्रावधान है। इसी नियम के आधार पर पहले किसानों की उपज का केवल 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की लगातार मांग और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने फैसला बदला और अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक MSP पर खरीदा जाएगा। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख बढ़ाई गई सरकार ने किसानों को अधिक समय देने के लिए खरीदी प्रक्रिया की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों को मिलेगा फायदा सरकार के अनुसार नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह निर्णय किसानों के लिए काफी राहत लेकर आएगा। औसतन यह करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक की खरीदी के बराबर माना जा रहा है, जिससे अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा। खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल बंद किसानों की दूसरी बड़ी मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी। जब तक समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक खाद वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा। किसानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मुख्य फैसले एक नजर में सरकार का क्या कहना है? कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। किसानों की मांग और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।

Ayushman Card Online Apply: घर बैठे बनाएं आयुष्मान कार्ड, पाएं ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज

Ayushman Card Online Apply: आयुष्मान कार्ड ऑनलाइन कैसे बनाएं? जानिए पात्रता, जरूरी दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया, फायदे और ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज पाने का आसान तरीका। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ayushman Card Online Apply: महंगी स्वास्थ्य सेवाओं के दौर में किसी गंभीर बीमारी का इलाज कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट बन जाता है। ऐसे समय में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। अब अच्छी बात यह है कि पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। यदि आपका नाम योजना की लाभार्थी सूची में शामिल है, तो आप अपने मोबाइल फोन से ही कुछ आसान चरणों में डिजिटल आयुष्मान कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि Ayushman Card Online Apply कैसे करें, कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की जरूरत होगी और आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या है, तो यहां पूरी जानकारी दी गई है। क्या है आयुष्मान कार्ड? आयुष्मान कार्ड, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत जारी किया जाने वाला डिजिटल हेल्थ कार्ड है। यह कार्ड पात्र लाभार्थियों को देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा देता है। कार्ड में लाभार्थी की पहचान आधार और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी होती है, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। आयुष्मान कार्ड के प्रमुख फायदे हर साल ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। कैशलेस सुविधा अस्पताल में इलाज के दौरान जेब से भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ी बीमारियों का इलाज सर्जरी, अस्पताल में भर्ती, जांच, दवाइयों और डिस्चार्ज के बाद की देखभाल का खर्च भी योजना में शामिल है। पूरे देश में सुविधा देशभर के हजारों सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में योजना का लाभ लिया जा सकता है। परिवार के सभी पात्र सदस्य शामिल योजना में पात्र परिवार के सदस्यों की संख्या या आयु की अलग सीमा लागू नहीं होती। कौन बनवा सकता है आयुष्मान कार्ड? यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों के लिए है। लाभार्थियों का चयन मुख्यतः: के आधार पर किया जाता है। ध्यान दें: केवल बीपीएल कार्ड होना पर्याप्त नहीं है। योजना का लाभ लेने के लिए आपका नाम लाभार्थी सूची में होना जरूरी है। आवेदन से पहले रखें ये जरूरी दस्तावेज मोबाइल से ऐसे करें Ayushman Card Online Apply Step 1: पात्रता जांचें सबसे पहले PM-JAY Beneficiary Portal पर जाकर अपना नाम खोजें। यदि आपका नाम सूची में दिखाई देता है, तभी आगे की प्रक्रिया पूरी करें। Step 2: Ayushman App डाउनलोड करें Google Play Store या Apple App Store से National Health Authority का आधिकारिक Ayushman App डाउनलोड करें। Step 3: मोबाइल नंबर से लॉगिन करें मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP के जरिए सत्यापन पूरा करें। Step 4: परिवार की जानकारी खोजें राज्य चुनने के बाद आधार, राशन कार्ड, फैमिली आईडी या PM-JAY ID के माध्यम से अपना रिकॉर्ड खोजें। Step 5: e-KYC पूरा करें अपने नाम पर क्लिक करें और OTP आधारित आधार e-KYC पूरी करें। Step 6: आयुष्मान कार्ड डाउनलोड करें सत्यापन पूरा होने के बाद आपका डिजिटल आयुष्मान कार्ड डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा। अगर सूची में नाम नहीं मिले तो क्या करें? यदि आपका नाम लाभार्थी सूची में नहीं मिलता है, तो आप: आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

MP News: फिल्म देखने के चक्कर में गंवाए ₹2.90 लाख, एक ऐप डाउनलोड करते ही 20 मिनट में खाली हुआ बैंक खाता

MP News: फिल्म देखने के लिए मोबाइल ऐप डाउनलोड करना एक कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। 20 मिनट में पीएनबी खाते से ₹2.90 लाख निकल गए। पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी। राजगढ़- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ शहर से सामने आया साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला, जहां फिल्म देखने के लिए मोबाइल पर एक ऐप डाउनलोड करना कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। ऐप इंस्टॉल होने के 20 मिनट के भीतर उसके पीएनबी खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.90 लाख निकाल लिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है। घटना ब्यावरा के वार्ड क्रमांक-4 की है। पीड़ित ने जब दोबारा मोबाइल चालू किया तो खाते से लगातार पैसे कटने के मैसेज आने लगे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से रकम निकाली। अब साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। कैसे हुई पूरी साइबर ठगी? सिटी थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वार्ड क्रमांक-4 निवासी कपड़ा व्यापारी सुनील लालवानी अपने मोबाइल पर ‘New Hindi Movie’ और ‘Bollywood South Movie’ नाम के ऐप देख रहे थे। इन्हीं में से एक ऐप डाउनलोड करने के तुरंत बाद उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। कुछ देर बाद जब मोबाइल दोबारा चालू हुआ तो पीएनबी खाते से लगातार पैसे कटने के एसएमएस आने लगे। तब तक उनके खाते से करीब ₹2.90 लाख निकाले जा चुके थे। 20 मिनट में पांच से ज्यादा ट्रांजेक्शन पुलिस जांच में पता चला है कि साइबर ठगों ने अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने करीब ₹50 हजार, ₹47 हजार, ₹40 हजार और ₹35 हजार समेत पांच से अधिक ट्रांजेक्शन किए और कुल ₹2.90 लाख निकाल लिए। पूरी वारदात लगभग 20 मिनट के भीतर अंजाम दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाकर मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल कर रही जांच फिलहाल साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों को दी यह सलाह थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी अनजान ऐप को बैंकिंग संबंधी जानकारी या अनावश्यक परमिशन न दें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी पर क्यों बढ़ा विवाद, किसानों का आंदोलन किस बात को लेकर है?

MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। जानिए सरकार मूंग की खेती को क्यों हतोत्साहित कर रही है और किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसानों और सरकार के बीच मूंग खरीदी को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। राजधानी भोपाल में किसान संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। किसानों का आरोप है कि सरकार समर्थन मूल्य पर उनकी पूरी उपज नहीं खरीद रही, जबकि खेती के दौरान उन्हें भारी लागत उठानी पड़ी है। दूसरी ओर राज्य सरकार का तर्क है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग के बजाय उड़द जैसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की, जिससे खरीदी और भंडारण की समस्या और बढ़ गई। सरकार और किसानों के बीच यही मतभेद अब आंदोलन का मुख्य कारण बन गया है। आइए जानते हैं कि पूरा विवाद आखिर क्या है और दोनों पक्षों की दलीलें क्या हैं। मूंग की खेती को लेकर सरकार की क्या दलील है? राज्य सरकार का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल होता है। इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग की जगह उड़द की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार ने उड़द की समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी और प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की थी। फिर भी किसानों ने मूंग की खेती क्यों बढ़ाई? किसानों का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग कम समय में तैयार हो जाती है और बेहतर मुनाफा देती है। यही कारण है कि इस वर्ष प्रदेश में लगभग 14.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई की गई। तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार इस सीजन में लगभग 20.16 लाख टन मूंग उत्पादन होने की संभावना है। खरीदी को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ? भारत सरकार ने इस सीजन में 4.54 लाख टन मूंग खरीदी का लक्ष्य तय किया। राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कुल अनुमानित उत्पादन का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। किसानों का आरोप है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन का मानक बहुत कम निर्धारित किया, जिससे उनकी पूरी उपज खरीदी नहीं जा सकी। किसानों की सबसे बड़ी आपत्ति क्या है? किसानों का कहना है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन करीब 1,419 किलोग्राम माना, जबकि वास्तविक उत्पादन 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। उनका कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में लगातार सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कई बार कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। ऐसे में लागत काफी अधिक आती है और सीमित खरीदी से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंदोलन का असर खरीदी पर भी दिखा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मूंग बेचने के लिए 3.47 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था। लेकिन विरोध के चलते केवल करीब 82 हजार किसानों ने ही अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेची। इसे किसान संगठनों ने खरीदी प्रक्रिया के विरोध का संकेत बताया है। गोदामों में पहले से पड़ा है भारी स्टॉक सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग अभी भी सरकारी गोदामों में रखी हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये है। कमजोर गुणवत्ता और बाजार में सीमित मांग के कारण इस स्टॉक की बिक्री भी चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि सरकार अतिरिक्त खरीदी को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। किसान संगठन ने क्या कहा? राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यदि सरकार मूंग को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानती है तो उसमें इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और रसायनों की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार पहले किसानों को मूंग उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती रही है, तो अब समर्थन मूल्य पर खरीदी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

MP News: एमपी के छात्रों को बड़ी राहत! निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस घटाने की तैयारी, सालाना शुल्क 35 हजार करने का प्रस्ताव

MP News: मध्य प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना करने का प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलने पर लाखों छात्रों को सस्ती इंजीनियरिंग शिक्षा का लाभ मिल सकता है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो छात्रों को सालाना फीस में बड़ी राहत मिल सकती है। शुल्क विनियामक समिति (FRC) को भेजे गए प्रस्ताव में कई निजी संस्थानों ने वार्षिक शिक्षण शुल्क को घटाकर 35 हजार रुपये करने की मांग की है। मौजूदा समय में अधिकांश निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस 40 हजार से 60 हजार रुपये के बीच है। फीस कम होने से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों के लिए भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधिक किफायती हो सकती है। इससे निजी कॉलेजों में लंबे समय से खाली रह रही सीटों के भरने की भी उम्मीद जताई जा रही है। क्यों घटाई जा रही है इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस? प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग संस्थान पिछले कई वर्षों से छात्रों की कमी का सामना कर रहे हैं। प्रवेश कम होने के कारण कॉलेजों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में 58 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर, इस दौरान केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हुआ है। निजी कॉलेजों में पिछले वर्षों के दौरान औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाया, जबकि सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। कॉलेजों का क्या है तर्क? फीस कम करने का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का कहना है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से प्रति छात्र खर्च लगातार बढ़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि यदि फीस कम होगी तो— विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं छात्रों की संख्या घटने का कारण? शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इंजीनियरिंग में दाखिले कम होने के पीछे कई वजहें हैं। प्रमुख कारण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी यदि प्रस्ताव मंजूर होता है ध्यान दें: फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय शुल्क विनियामक समिति (FRC) की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। शुल्क विनियामक समिति की मंजूरी का इंतजार कॉलेजों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अब शुल्क विनियामक समिति विचार करेगी। यदि समिति इसे मंजूरी देती है तो आगामी शैक्षणिक सत्र में नई फीस लागू की जा सकती है। हालांकि अभी तक समिति की ओर से अंतिम निर्णय जारी नहीं किया गया है।

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी की मौत का खुलासा, हत्या को हादसा दिखाने की रची गई साजिश

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी पलक काशिव हत्याकांड का बड़ा खुलासा। प्रेमी ने शादी से इनकार पर गला घोंटा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगाई और हादसा दिखाने की साजिश रची। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर में निजी बैंक की कर्मचारी पलक काशिव की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में इसे गैस रिसाव और आग से जुड़ा हादसा माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और साइबर जांच ने पूरी कहानी बदल दी। पुलिस के मुताबिक यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी मयंक शाक्य शादी के लिए लगातार दबाव बना रहा था। जब पलक ने शादी से इनकार कर दिया तो उसने कथित तौर पर उसकी हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करने की बात भी पुलिस के सामने कही है। इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच की मदद से हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। कैसे सामने आई हत्या की सच्चाई? पलक काशिव का शव सोमवार को तपेश्वरी क्षेत्र स्थित फ्लैट में मिला था। परिवार के लोग दो दिनों से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। जब मकान मालिक फ्लैट पहुंचा तो पलक मृत अवस्था में मिली। मौके पर गैस का बर्नर खुला था और गैस का रिसाव हो रहा था। रसोई में कटी हुई सब्जियां भी रखी थीं। शुरुआती हालात देखकर ऐसा लगा कि किसी घरेलू हादसे में उसकी मौत हुई होगी। इसी आधार पर पुलिस ने पहले दुर्घटना की संभावना मानकर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच की दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक नकाबपोश युवक तेज़ी से कॉलोनी से निकलता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने पलक के परिचित लोगों की जानकारी जुटाई और साइबर टीम की मदद से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की। तकनीकी जांच में मयंक शाक्य की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। दतिया से गिरफ्तारी, पूछताछ में कबूल किया अपराध पुलिस ने आरोपी मयंक शाक्य को दतिया से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पहले पलक का गला दबाया। जब वह बेहोश हो गई तो उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घटना को हादसा साबित करने के लिए गैस का बर्नर भी खुला छोड़ दिया, ताकि ऐसा लगे कि आग गैस रिसाव से लगी थी। गाने के शौक ने कराई थी दोनों की मुलाकात जांच में यह भी सामने आया कि पलक और मयंक की पहचान स्टार मेकर्स ऐप के जरिए हुई थी। दोनों को गाने का शौक था और इसी प्लेटफॉर्म पर उनकी दोस्ती हुई थी। समय के साथ दोनों संपर्क में आए, लेकिन शादी को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए। पुलिस जांच में क्या-क्या सामने आया? मुख्य तथ्य

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