MP News: फिल्म देखने के चक्कर में गंवाए ₹2.90 लाख, एक ऐप डाउनलोड करते ही 20 मिनट में खाली हुआ बैंक खाता

MP News: फिल्म देखने के लिए मोबाइल ऐप डाउनलोड करना एक कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। 20 मिनट में पीएनबी खाते से ₹2.90 लाख निकल गए। पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी। राजगढ़- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ शहर से सामने आया साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला, जहां फिल्म देखने के लिए मोबाइल पर एक ऐप डाउनलोड करना कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। ऐप इंस्टॉल होने के 20 मिनट के भीतर उसके पीएनबी खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.90 लाख निकाल लिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है। घटना ब्यावरा के वार्ड क्रमांक-4 की है। पीड़ित ने जब दोबारा मोबाइल चालू किया तो खाते से लगातार पैसे कटने के मैसेज आने लगे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से रकम निकाली। अब साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। कैसे हुई पूरी साइबर ठगी? सिटी थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वार्ड क्रमांक-4 निवासी कपड़ा व्यापारी सुनील लालवानी अपने मोबाइल पर ‘New Hindi Movie’ और ‘Bollywood South Movie’ नाम के ऐप देख रहे थे। इन्हीं में से एक ऐप डाउनलोड करने के तुरंत बाद उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। कुछ देर बाद जब मोबाइल दोबारा चालू हुआ तो पीएनबी खाते से लगातार पैसे कटने के एसएमएस आने लगे। तब तक उनके खाते से करीब ₹2.90 लाख निकाले जा चुके थे। 20 मिनट में पांच से ज्यादा ट्रांजेक्शन पुलिस जांच में पता चला है कि साइबर ठगों ने अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने करीब ₹50 हजार, ₹47 हजार, ₹40 हजार और ₹35 हजार समेत पांच से अधिक ट्रांजेक्शन किए और कुल ₹2.90 लाख निकाल लिए। पूरी वारदात लगभग 20 मिनट के भीतर अंजाम दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाकर मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल कर रही जांच फिलहाल साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों को दी यह सलाह थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी अनजान ऐप को बैंकिंग संबंधी जानकारी या अनावश्यक परमिशन न दें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

Ratlam News: फेसबुक पर 10 लाख के लोन का लालच पड़ा भारी, किसान से ठगे 9.66 लाख रुपए; बैंककर्मी बनकर ठगों ने किया खेल

रतलाम के बिलपांक में फेसबुक पर 10 लाख रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 57 वर्षीय किसान से 9.66 लाख रुपए ठग लिए। बैंककर्मी बनकर क्यूआर कोड के जरिए रकम जमा करवाई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के बिलपांक थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। फेसबुक पर लोन दिलाने का विज्ञापन देखकर एक किसान ठगों के जाल में फंस गया। ठगों ने पहले 10 लाख रुपए का लोन देने का भरोसा दिलाया और बाद में विभिन्न बहानों से करीब 9.66 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? बिलपांक थाना क्षेत्र के बिरमावल निवासी 57 वर्षीय किसान शंकरलाल पाटीदार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने फेसबुक पर अशोक मल्होत्रा नाम के व्यक्ति का एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि जरूरतमंद लोगों को आसानी से लोन उपलब्ध कराया जाता है। विज्ञापन देखने के बाद शंकरलाल ने संपर्क किया और 10 लाख रुपए की जरूरत बताई। इस पर आरोपी ने कहा कि वह 10 लाख नहीं बल्कि 25 लाख रुपए तक का लोन दिला सकता है। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उनके पास कॉल और मैसेज आने लगे। बैंक अधिकारी बनकर रची गई ठगी की साजिश शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ दिनों बाद एक व्यक्ति ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए फोन किया। उसने कहा कि उनके पास इटली की करेंसी में बड़ी रकम उपलब्ध है, जिसे भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए कुछ प्रोसेसिंग चार्ज जमा करना होगा। इसके बाद ठगों ने क्यूआर कोड भेजना शुरू कर दिया। शुरुआत में 2 हजार, 7 हजार और 15 हजार रुपए जमा करवाए गए। धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी गई। 4 अप्रैल से 20 मई के बीच शंकरलाल ने विभिन्न क्यूआर कोड पर कुल 9 लाख 66 हजार 463 रुपए ट्रांसफर कर दिए, लेकिन न तो लोन मिला और न ही जमा की गई राशि वापस मिली। डराकर और भ्रमित कर ऐंठे लाखों रुपए पीड़ित का आरोप है कि पहले उसे बड़े लोन का लालच दिया गया और बाद में विभिन्न टीम सदस्यों ने फोन कर दबाव बनाया। कभी दस्तावेज सत्यापन तो कभी विदेशी करेंसी बदलने के नाम पर पैसे मांगे गए। जब तक उसे ठगी का एहसास हुआ, तब तक लाखों रुपए उसके खाते से निकल चुके थे। पुलिस ने दर्ज किया मामला बिलपांक थाना प्रभारी अयुब खान ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और मोबाइल नंबरों व बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जानकारी खंगाली जा रही है।

Ratlam News: रतलाम में 47 लाख का साइबर फ्रॉड लिंक, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में 3 गिरफ्तार

तमिलनाडु के कोयंबटूर में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से 67 लाख की ठगी, 47 लाख रतलाम के बैंक खाते में ट्रांसफर। पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुए बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में रतलाम कनेक्शन सामने आया है। ठगी गई करीब 67.75 लाख रुपए की राशि में से 47.75 लाख रुपए रतलाम के एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इस मामले में रतलाम पुलिस ने खाताधारक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोयंबटूर के व्यक्ति से 67 लाख की ठगी मामले के अनुसार, कोयंबटूर निवासी केसी श्रीधर ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया और 67,75,301 रुपए की ठगी कर ली। जांच में सामने आया कि ठगी की राशि का एक बड़ा हिस्सा रतलाम के फेडरल बैंक खाते में जमा हुआ है, जिससे अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ। रतलाम के तीन आरोपी गिरफ्तार रतलाम पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि यह बैंक खाता माणकचौक निवासी प्रथम मित्तल (23) के नाम पर है। 25 मार्च 2026 को उसके खाते में 47,75,301 रुपए जमा हुए थे। पूछताछ में प्रथम ने बताया कि उसने अपने साथियों हेमंत रायक उर्फ मोनू और शुभम रेडा के कहने पर कमीशन के लालच में अपना खाता उपलब्ध कराया था। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। म्यूल अकाउंट का हुआ इस्तेमाल जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उक्त बैंक खाता “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे अकाउंट का उपयोग साइबर अपराधी ठगी के पैसे को छिपाने और ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग से बचने के लिए करते हैं। पुलिस कर रही नेटवर्क की तलाश पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार, इस मामले में अन्य राज्यों से जुड़े साइबर अपराधियों की भी तलाश की जा रही है। NCRP और I4C पोर्टल के जरिए डेटा एनालिसिस कर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि— किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

रॉयल कॉलेज में कानूनी जागरूकता व साइबर अपराध पर कार्यशाला, विद्यार्थियों को बताए गए ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के तरीके

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और कानूनी जानकारी की आवश्यकता को देखते हुए रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड एडवांस्ड स्टडीज में “कानूनी जागरूकता एवं साइबर अपराध” विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में अभिभाषक संघ के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शर्मा, तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में अधिवक्ता प्रतीक गौतम एवं अधिवक्ता पंकज रजक उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “आज के समय में डेटा सबसे बड़ी पूंजी है और इसकी सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। कानूनी जानकारी के अभाव में लोग आसानी से साइबर अपराध का शिकार हो जाते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों को बैंक विवरण, ओटीपी साझा न करने की सलाह दी और डीपफेक व हनीट्रैप जैसे नए साइबर खतरों से सतर्क रहने का संदेश दिया। अधिवक्ता प्रतीक गौतम ने सोशल मीडिया, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के दौरान होने वाली कानूनी भूलों की जानकारी देते हुए कहा कि लापरवाही से किया गया एक पोस्ट भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। वहीं अधिवक्ता पंकज रजक ने ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने एवं वैधानिक प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष सोनी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में रॉयल महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापकगण उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. अमित शर्मा, प्रो. कपिल केरोल, प्रो. मृदुला उपाध्याय, प्रो. समीक्षा मेहरा, प्रो. ममता यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संदीप सिद्ध द्वारा किया गया।

Cyber Fraud: यूट्यूब एड के जरिए 1 करोड़ की ठगी: रायगढ़ पुलिस ने श्रीनगर से पकड़ा अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग फ्रॉड गैंग

रायगढ़- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Cyber Fraud: रायगढ़ पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी ट्रेडिंग ऐप और यूट्यूब विज्ञापनों के जरिए देशभर में लाखों निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पीड़ित दंपत्ति से 1.08 करोड़ की ठगी ढिमरापुर, रायगढ़ निवासी एक उद्योगकर्मी दंपत्ति ने यूट्यूब पर मिले शेयर ट्रेडिंग विज्ञापन पर क्लिक किया। कॉलर ने खुद को “यूके इंडिया चैनल” से जुड़ा बताते हुए पीड़ितों को एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया और निवेश शुरू करवाया।20 मई 2025 से 30 अगस्त 2025 के बीच दंपत्ति ने विभिन्न खातों में कुल ₹1,08,44,025 जमा कर दिए। जुलाई में 32 लाख जमा करने के बाद ऐप में दिखाया गया कि उनका निवेश बढ़कर ₹42 करोड़ हो चुका है। लेकिन जब दंपत्ति ने रकम निकालने की कोशिश की तो उनसे ₹5 लाख ब्रोकरेज शुल्क मांगा गया। शुल्क जमा करने के बाद कॉलर गायब हो गया और पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ। 7 सितंबर को थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 460/2025 धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। देशभर में 200 से ज्यादा शिकायतें जांच में खुलासा हुआ कि जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई थी, उनके खिलाफ देशभर में 200 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतेंपहले से दर्ज थीं। इन खातों में ₹10 करोड़ से ज्यादा की संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिली। पुलिस की टीम ने श्रीनगर में दबोचे 4 आरोपी एसपी दिव्यांग पटेल के निर्देश पर सीएसपी मयंक मिश्रा व साइबर सेल डीएसपी अनिल विश्वकर्मा की टीम को जांच सौंपी गई। बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों के विश्लेषण में पता चला कि पीड़ितों के ₹32.50 लाख सीधे श्रीनगर निवासी यासीर शॉफी चारलू के खाते में भेजे गए थे। विशेष टीम ने श्रीनगर में छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया— गिरफ्तार आरोपी इनके कब्जे से 4 मोबाइल फोन जब्त किए गए। गिरोह ने रकम को अलग-अलग खातों में बांटकर नकद में परिवर्तित किया था। नई धाराएं जोड़ी गईं, रकम रिकवरी जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 111, 3(5) BNS और 66(D) आईटी एक्ट भी जोड़ी गई है।पुलिस पीड़ितों की 1.08 करोड़ रुपये की पूरी राशि रिकवर कराने के लिए प्रयास कर रही है।

कर्नाटक में 2 करोड़ की ऑनलाइन ठगी: MP के तीन युवक गिरफ्तार, रिफंड मांगने पर दी जान से मारने की धमकी

रतलाम/मंगलूरु- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। कर्नाटक की मंगलूरु सिटी पुलिस ने मध्यप्रदेश के बिलपांक से तीन युवकों को दो करोड़ की ऑनलाइन ठगी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्त में आए आरोपितों में कुशाग्र जैन (23), सुमित जायसवाल (27) और धार जिले बदनावर निवासी अखिल मंडरा (29) शामिल हैं। पुलिस पहले ही मामले के मुख्य आरोपी अंकित को इंदौर से हिरासत में ले चुकी है। कैसे हुई 2 करोड़ की ठगी? मंगलूरु के रियल एस्टेट और कार ट्रेडिंग व्यवसायी उमर फारुक, निवासी डेरालकट्टे, उल्लाला, को मई 2022 में व्हाट्सऐप पर एक व्यक्ति ने संपर्क किया।उसने अपना नाम अंकित बताया और स्वयं को “डल्टिन रायल कंपनी” का प्रतिनिधि बताते हुए दोगुना पैसा लौटाने की ऑनलाइन स्कीम का लालच दिया। अंकित ने व्हाट्सऐप कॉल में बताया था कि उसके साथी कुशाग्र जैन, सुमित जायसवाल और अखिल मंडरा विदेशों में बड़ा निवेश कर दोगुना रिटर्न दिलाते हैं। तीन महीने तक संपर्क नहीं, फिर मिली धमकी उमर ने पिछले तीन महीनों से रिफंड के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।बाद में अंकित ने खुद बताया कि उसके साथी उसे भी धोखा दे चुके हैं और वह अब साझेदारी में नहीं है। जब उमर ने पैसे वापस मांगने की कोशिश की, तो आरोपितों ने व्हाट्सऐप कॉल पर धमकी दी: “पैसे वापस नहीं करेंगे, पुलिस में शिकायत की तो जहां मिले, जान से मार देंगे।” डर और लगातार धोखाधड़ी के चलते उमर ने पूरी घटना परिवार को बताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कैसे हुई गिरफ्तारी? बिलपांक थाना प्रभारी अय्यूब खान ने बताया कि गुरुवार रात कर्नाटक पुलिस की चार सदस्यीय टीम बिलपांक पहुंची।टीम में एसीपी रविश एस. नायक, एसआई धर्मेंद्र, कांस्टेबल चंद्रशेखर और नवीन कुमाख शामिल थे। टीम ने शुक्रवार को तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर मंगलूरु ले गई, जहां आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई जारी है।

Indore News: बच्चों के अश्लील वीडियो शेयर करने वाला कमल लोबानिया गिरफ्तार, अब खा रहा जेल की हवा!

इंदौर- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Indore News: अमेरिका की Meta Inc. (Facebook/Instagram) से मिली साइबर टिपलाइन सूचना के आधार पर इंदौर निवासी कमल लोबानिया को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर सेंट्रल जेल इंदौर भेजा गया है। आरोपी सोशल मीडिया पर बालक-बालिकाओं के अश्लील वीडियो (CSEAM: Child Sexual Exploitative and Abuse Material) डाउनलोड कर उन्हें विभिन्न ग्रुपों में शेयर करता था। मेटा ने दी थी आरोपी की जानकारी अमेरिका की मेटा कंपनी ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार को सूचना दी थी कि इंदौर का एक व्यक्ति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिग बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो शेयर कर रहा है। यह शिकायत Cyber Tipline (USA) के माध्यम से राज्य सायबर सेल, इंदौर को प्राप्त हुई थी। साइबर सेल की कार्रवाई राज्य सायबर पुलिस जोन इंदौर द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन नयन” के तहत निरीक्षक अंजू पटेल, सउनि रामप्रकाश बाजपेई और आरक्षक रमेश भिड़े की टीम ने आरोपी का तकनीकी विश्लेषण कर लोकेशन ट्रेस की। आरोपी कमल लोबानिया (उम्र 31 वर्ष, निवासी इंदौर) को पकड़कर पूछताछ की गई, जिसमें उसने स्वीकार किया कि उसने Facebook/Instagram ग्रुपों से बाल अश्लील सामग्री डाउनलोड कर WhatsApp पर अन्य लोगों को शेयर किया था। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड जप्त किया है।मामले में आईटी एक्ट की धारा 67, 67A, 67B के तहत अपराध क्रमांक 168/25 दर्ज किया गया है। सराहनीय भूमिका साइबर सेल ने दी चेतावनी राज्य साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि—

Data Leak:इतिहास का सबसे बड़ा पासवर्ड लीक! 16 अरब अकाउंट्स डार्क वेब पर बिकने को तैयार, क्या आपका भी डेटा खतरे में है?

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Data Leak: दुनिया अब तक के सबसे बड़े साइबर हमले की चपेट में आ गई है। गूगल, फेसबुक, सरकारी पोर्टल्स, गिटहब, और ईमेल सर्विसेस – कोई भी सुरक्षित नहीं बचा। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 16 अरब से ज्यादा पासवर्ड्स का एक विशाल डाटाबेस लीक होकर डार्क वेब पर बिक्री के लिए मौजूद है। इस लीक में शामिल है: लीक डाटा साफ-सुथरे फॉर्मेट में, वेबसाइट लिंक, यूजरनेम और पासवर्ड के साथ मौजूद है। इससे हैकर्स के लिए किसी भी अकाउंट को एक्सेस करना बेहद आसान हो जाता है। क्या बोले एक्सपर्ट्स? गूगल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यूजर्स अब ट्रेडिशनल पासवर्ड छोड़कर ‘पासकी’ जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं।FBI ने अलर्ट जारी किया है— फिशिंग ईमेल, अंजान लिंक और संदिग्ध मैसेज से बचें। अभी करें ये जरूरी स्टेप्स:  क्या आपका डेटा लीक हुआ? अब वक्त है सचेत रहने का। अगर आपने वर्षों से पासवर्ड नहीं बदला है, तो आज ही बदलें। सिर्फ एक कमजोर पासवर्ड, आपकी पूरी डिजिटल जिंदगी खतरे में डाल सकता है।

Cyber Fraud: चारधाम यात्रा के नाम पर साइबर फ्रॉड से रहें सतर्क, फर्जी वेबसाइटों और स्कैम कॉल्स से बढ़ा खतरा

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Cyber Fraud: जैसे-जैसे चारधाम यात्रा का सीजन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रतलाम पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राकेश खाखा के मार्गदर्शन में साइबर क्राइम सेल रतलाम द्वारा आमजन को साइबर ठगी से बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साइबर सेल द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इन दिनों साइबर अपराधी चारधाम यात्रा बुकिंग के नाम पर फर्जी वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्रोफाइलों और व्हाट्सऐप नंबरों के जरिए लोगों से ठगी कर रहे हैं। खासकर केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग, होटल, गेस्ट हाउस, टैक्सी सेवा और धार्मिक टूर पैकेज जैसी सुविधाओं के नाम पर लोगों से ऑनलाइन पेमेंट करवा कर फर्जी टिकट भेज दिए जाते हैं या फिर पैसे मिलने के बाद संपर्क ही तोड़ दिया जाता है। ऐसे करते हैं फ्रॉड: खुद को साइबर ठगी से बचाने के लिए रखें ये सावधानियां: यदि ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें: साइबर सेल रतलाम की अपील है कि लोग सजग रहें और किसी भी अनजान लिंक या ऑफर के झांसे में न आएं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

Cyber Security Tips: शादी की पत्रिका या योजनाओं की मोबाइल एप्लिकेशन ना करे डाऊनलोड, रतलाम पुलिस ने बताया कैसे रहें सावधान!

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Cyber Security Tips : सायबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए रतलाम पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा के मार्गदर्शन में सायबर क्राइम सेल रतलाम द्वारा आम जनता को सायबर ठगी के नए-नए तरीकों के प्रति जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान में सायबर अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही एक नई चाल लोगों के बीच चिंता का विषय बन गई है। सायबर अपराधी मोबाइल एप्लिकेशन (.apk) और एक्से फाइल (.exe) के जरिए धोखाधड़ी कर रहे हैं। यहां इस तरह के धोखाधड़ी से बचने के उपायों पर विस्तार से जानिए; कैसे होती है APK फाइल के जरिए धोखाधड़ी?   – सायबर अपराधी .apk फाइल का इस्तेमाल कर लोगों के फोन तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।   – ये फाइलें अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों के माध्यम से, अनजानी वेबसाइटों से या व्हाट्सएप पर किसी लिंक के जरिए भेजी जाती हैं।   – कई बार ये फाइलें शादी के निमंत्रण, पीएम किसान योजना या पीएम आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं के नाम पर होती हैं, जिससे लोग इन्हें आसानी से डाउनलोड कर लेते हैं। हैकर्स का तरीका क्या है?   – हैकर्स व्हाट्सएप के माध्यम से apk फाइलें भेजते हैं, जो किसी सरकारी योजना, निमंत्रण कार्ड या अन्य आकर्षक सामग्री का रूप धारण कर भेजी जाती हैं।   – कई बार ये फाइलें परिचित व्यक्तियों के नंबर से आती हैं, जिनका व्हाट्सएप हैक हो चुका होता है। इस कारण लोग इन फाइलों पर अधिक विश्वास कर लेते हैं।   – जैसे ही आप इस apk फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करते हैं, यह आपके फोन पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेती है। APK फाइल के खतरों से कैसे बचें?   – व्हाट्सएप सिक्योरिटी: अपने व्हाट्सएप अकाउंट की सुरक्षा के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन सेटिंग्स को इनेबल रखें। इससे आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा।   – विश्वास से बचें: किसी परिचित व्यक्ति के व्हाट्सएप नंबर से भी अगर इस तरह की फाइल आती है, तो इसे बिना जांचे-परखे न खोलें। सुनिश्चित करें कि फाइल की वैधता को पहचान लें।   – विश्वसनीय स्रोत से ही डाउनलोड करें: किसी भी एप्लिकेशन को केवल गूगल प्ले स्टोर या आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। APK फाइल खोलने के बाद क्या होता है?   – जब आप apk फाइल को खोलते हैं, तो यह आपके फोन में ऑटो-इंस्टॉल हो जाती है और आपके डिवाइस का कंट्रोल सायबर अपराधी के हाथों में चला जाता है।   – अपराधी आपके फोन के मैसेज को पढ़ सकते हैं, जिनमें OTP, PIN जैसी सेंसिटिव फाइनेंशियल इनफॉर्मेशन हो सकती है।   – वे आपके फोन से अनाधिकृत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या फंड ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे आपका आर्थिक नुकसान हो सकता है। अगर गलती से APK फाइल इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?   – तुरंत अपने फोन का इंटरनेट कनेक्शन ऑफ करें ताकि अपराधी और डेटा का एक्सेस न ले सकें।   – जितना जल्दी हो सके अपने बैंक में संपर्क कर अपने खाते को फ्रीज करवा दें ताकि किसी भी अनाधिकृत ट्रांजेक्शन से बचा जा सके।   – फोन में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें या गूगल प्ले स्टोर से “कवच-2” जैसे सुरक्षा ऐप का उपयोग करें, जो हानिकारक या छिपी हुई apk फाइलों की पहचान कर उन्हें डिलीट कर सकता है। व्हाट्सएप पर आने वाली फाइलों को सुरक्षित तरीके से जांचें   – अगर किसी सरकारी योजना या शादी के निमंत्रण के नाम पर कोई फाइल आए तो उसे खुलने से पहले ध्यान से जांचें।   – व्हाट्सएप सेटिंग्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन को सक्षम करें ताकि आपका अकाउंट सुरक्षित रहे और हैकर्स आपके अकाउंट का दुरुपयोग न कर सकें। धोखाधड़ी होने पर तुरंत क्या करें?   – किसी भी प्रकार की सायबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाने पर तुरंत सायबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।   – अपने नजदीकी पुलिस थाने या सायबर सेल पर जाकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराएं ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। सायबर सुरक्षा सलाह में बताई गई इन सावधानियों को अपनाकर आप अपने डेटा और आर्थिक जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं। तकनीक के युग में सुरक्षित रहना हमारी अपनी जिम्मेदारी है, इसलिए किसी भी अनजान फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करने से पहले सावधान रहें।

0%