MP News: इंदौर मेट्रो के आसपास होगा बड़ा बदलाव, 31 किमी कॉरिडोर पर बनेंगे 4 TOD क्लस्टर, हाईराइज डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

MP News: इंदौर मेट्रो के 31.32 किमी रूट के आसपास 4 TOD क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। जानिए किन इलाकों में होगा हाईराइज डेवलपमेंट और क्या होंगे बड़े बदलाव। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर शहर आने वाले वर्षों में एक नए शहरी विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना के साथ अब शहर में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) की योजना को भी गति दी जा रही है। इसका उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के आसपास आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं वाले क्षेत्रों का विकास करना है। 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे में विशेष विकास क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ शहर के विकास की दिशा भी बदल सकती है। इसके लिए पहले चरण में चार प्रमुख क्लस्टर तैयार किए गए हैं। Indore Metro TOD Corridor क्या है? ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) ऐसा शहरी विकास मॉडल है, जिसमें मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाता है। इस मॉडल का उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। पहले चरण में इन 4 क्लस्टर में होगा विकास शुरुआत में मेट्रो रूट के प्रमुख स्टेशनों को जोड़ते हुए चार क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। पहला क्लस्टर दूसरा क्लस्टर तीसरा क्लस्टर चौथा क्लस्टर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास क्या-क्या बदलेगा? TOD योजना लागू होने के बाद मेट्रो रूट के आसपास कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रमुख विकास कार्य शहरवासियों और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव TOD कॉरिडोर तैयार करने वाली एजेंसी अरुप (Arup) शहर के नागरिकों, शहरी योजनाकारों और संबंधित विशेषज्ञों से सुझाव भी लेगी। इन सुझावों के आधार पर विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर मॉडल तैयार हो सके। मास्टर प्लान के साथ होगा समन्वय इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) के इंदौर रीजनल सेंटर द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि TOD योजना को इंदौर के नए मास्टर प्लान और रीजनल प्लान के साथ जोड़ा जाएगा। आईटीपीआई इंदौर रीजनल सेंटर की सचिव प्रकृति सेठी और चेयरमैन डी. एल. गोयल के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर TOD से जुड़े नियमों और विकास संबंधी प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि परियोजना प्रभावी ढंग से लागू हो सके। विशेषज्ञों ने साझा किए अंतरराष्ट्रीय अनुभव कार्यक्रम में अरुप कंसल्टेंसी फर्म के विशेषज्ञ जिग्नेश मेहता और रोमी राय ने विभिन्न शहरों में लागू TOD मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास क्लस्टर आधारित विकास से शहरी यातायात, भूमि उपयोग और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

MP News: किसानों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला, अब 60% मूंग खरीदेगी; ई-टोकन व्यवस्था भी फिलहाल स्थगित

MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की मांग मानते हुए मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% कर दी है। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख भी बढ़ी, ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। किसानों की मांग और जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए अब पात्र किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 25 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी जाएगी। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के हजारों मूंग उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग और खरीदी की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई जाएगी। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, ओबीसी कल्याण मंत्री कृष्णा गौर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। MP मूंग खरीदी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव बैठक के बाद कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का प्रावधान है। इसी नियम के आधार पर पहले किसानों की उपज का केवल 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की लगातार मांग और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने फैसला बदला और अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक MSP पर खरीदा जाएगा। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख बढ़ाई गई सरकार ने किसानों को अधिक समय देने के लिए खरीदी प्रक्रिया की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों को मिलेगा फायदा सरकार के अनुसार नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह निर्णय किसानों के लिए काफी राहत लेकर आएगा। औसतन यह करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक की खरीदी के बराबर माना जा रहा है, जिससे अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा। खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल बंद किसानों की दूसरी बड़ी मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी। जब तक समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक खाद वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा। किसानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मुख्य फैसले एक नजर में सरकार का क्या कहना है? कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। किसानों की मांग और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।

MP News: फिल्म देखने के चक्कर में गंवाए ₹2.90 लाख, एक ऐप डाउनलोड करते ही 20 मिनट में खाली हुआ बैंक खाता

MP News: फिल्म देखने के लिए मोबाइल ऐप डाउनलोड करना एक कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। 20 मिनट में पीएनबी खाते से ₹2.90 लाख निकल गए। पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी। राजगढ़- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ शहर से सामने आया साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला, जहां फिल्म देखने के लिए मोबाइल पर एक ऐप डाउनलोड करना कपड़ा व्यापारी को भारी पड़ गया। ऐप इंस्टॉल होने के 20 मिनट के भीतर उसके पीएनबी खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.90 लाख निकाल लिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है। घटना ब्यावरा के वार्ड क्रमांक-4 की है। पीड़ित ने जब दोबारा मोबाइल चालू किया तो खाते से लगातार पैसे कटने के मैसेज आने लगे। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से रकम निकाली। अब साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। कैसे हुई पूरी साइबर ठगी? सिटी थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वार्ड क्रमांक-4 निवासी कपड़ा व्यापारी सुनील लालवानी अपने मोबाइल पर ‘New Hindi Movie’ और ‘Bollywood South Movie’ नाम के ऐप देख रहे थे। इन्हीं में से एक ऐप डाउनलोड करने के तुरंत बाद उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। कुछ देर बाद जब मोबाइल दोबारा चालू हुआ तो पीएनबी खाते से लगातार पैसे कटने के एसएमएस आने लगे। तब तक उनके खाते से करीब ₹2.90 लाख निकाले जा चुके थे। 20 मिनट में पांच से ज्यादा ट्रांजेक्शन पुलिस जांच में पता चला है कि साइबर ठगों ने अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने करीब ₹50 हजार, ₹47 हजार, ₹40 हजार और ₹35 हजार समेत पांच से अधिक ट्रांजेक्शन किए और कुल ₹2.90 लाख निकाल लिए। पूरी वारदात लगभग 20 मिनट के भीतर अंजाम दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाकर मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल कर रही जांच फिलहाल साइबर सेल संबंधित यूपीआई आईडी, बैंक खातों और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों को दी यह सलाह थाना प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें। उन्होंने कहा कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी अनजान ऐप को बैंकिंग संबंधी जानकारी या अनावश्यक परमिशन न दें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी पर क्यों बढ़ा विवाद, किसानों का आंदोलन किस बात को लेकर है?

MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। जानिए सरकार मूंग की खेती को क्यों हतोत्साहित कर रही है और किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसानों और सरकार के बीच मूंग खरीदी को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है। राजधानी भोपाल में किसान संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। किसानों का आरोप है कि सरकार समर्थन मूल्य पर उनकी पूरी उपज नहीं खरीद रही, जबकि खेती के दौरान उन्हें भारी लागत उठानी पड़ी है। दूसरी ओर राज्य सरकार का तर्क है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग के बजाय उड़द जैसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की, जिससे खरीदी और भंडारण की समस्या और बढ़ गई। सरकार और किसानों के बीच यही मतभेद अब आंदोलन का मुख्य कारण बन गया है। आइए जानते हैं कि पूरा विवाद आखिर क्या है और दोनों पक्षों की दलीलें क्या हैं। मूंग की खेती को लेकर सरकार की क्या दलील है? राज्य सरकार का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल होता है। इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से पिछले दो वर्षों से किसानों को मूंग की जगह उड़द की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार ने उड़द की समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी और प्रति क्विंटल 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की थी। फिर भी किसानों ने मूंग की खेती क्यों बढ़ाई? किसानों का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग कम समय में तैयार हो जाती है और बेहतर मुनाफा देती है। यही कारण है कि इस वर्ष प्रदेश में लगभग 14.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई की गई। तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार इस सीजन में लगभग 20.16 लाख टन मूंग उत्पादन होने की संभावना है। खरीदी को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ? भारत सरकार ने इस सीजन में 4.54 लाख टन मूंग खरीदी का लक्ष्य तय किया। राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कुल अनुमानित उत्पादन का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। किसानों का आरोप है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन का मानक बहुत कम निर्धारित किया, जिससे उनकी पूरी उपज खरीदी नहीं जा सकी। किसानों की सबसे बड़ी आपत्ति क्या है? किसानों का कहना है कि सरकार ने प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन करीब 1,419 किलोग्राम माना, जबकि वास्तविक उत्पादन 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। उनका कहना है कि ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में लगातार सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कई बार कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। ऐसे में लागत काफी अधिक आती है और सीमित खरीदी से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंदोलन का असर खरीदी पर भी दिखा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मूंग बेचने के लिए 3.47 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था। लेकिन विरोध के चलते केवल करीब 82 हजार किसानों ने ही अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेची। इसे किसान संगठनों ने खरीदी प्रक्रिया के विरोध का संकेत बताया है। गोदामों में पहले से पड़ा है भारी स्टॉक सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग अभी भी सरकारी गोदामों में रखी हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3,000 करोड़ रुपये है। कमजोर गुणवत्ता और बाजार में सीमित मांग के कारण इस स्टॉक की बिक्री भी चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि सरकार अतिरिक्त खरीदी को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। किसान संगठन ने क्या कहा? राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यदि सरकार मूंग को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानती है तो उसमें इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और रसायनों की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार पहले किसानों को मूंग उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करती रही है, तो अब समर्थन मूल्य पर खरीदी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

MP News: एमपी के छात्रों को बड़ी राहत! निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस घटाने की तैयारी, सालाना शुल्क 35 हजार करने का प्रस्ताव

MP News: मध्य प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना करने का प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलने पर लाखों छात्रों को सस्ती इंजीनियरिंग शिक्षा का लाभ मिल सकता है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो छात्रों को सालाना फीस में बड़ी राहत मिल सकती है। शुल्क विनियामक समिति (FRC) को भेजे गए प्रस्ताव में कई निजी संस्थानों ने वार्षिक शिक्षण शुल्क को घटाकर 35 हजार रुपये करने की मांग की है। मौजूदा समय में अधिकांश निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस 40 हजार से 60 हजार रुपये के बीच है। फीस कम होने से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों के लिए भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधिक किफायती हो सकती है। इससे निजी कॉलेजों में लंबे समय से खाली रह रही सीटों के भरने की भी उम्मीद जताई जा रही है। क्यों घटाई जा रही है इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस? प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग संस्थान पिछले कई वर्षों से छात्रों की कमी का सामना कर रहे हैं। प्रवेश कम होने के कारण कॉलेजों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में 58 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर, इस दौरान केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हुआ है। निजी कॉलेजों में पिछले वर्षों के दौरान औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाया, जबकि सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। कॉलेजों का क्या है तर्क? फीस कम करने का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का कहना है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से प्रति छात्र खर्च लगातार बढ़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि यदि फीस कम होगी तो— विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं छात्रों की संख्या घटने का कारण? शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इंजीनियरिंग में दाखिले कम होने के पीछे कई वजहें हैं। प्रमुख कारण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी यदि प्रस्ताव मंजूर होता है ध्यान दें: फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय शुल्क विनियामक समिति (FRC) की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। शुल्क विनियामक समिति की मंजूरी का इंतजार कॉलेजों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अब शुल्क विनियामक समिति विचार करेगी। यदि समिति इसे मंजूरी देती है तो आगामी शैक्षणिक सत्र में नई फीस लागू की जा सकती है। हालांकि अभी तक समिति की ओर से अंतिम निर्णय जारी नहीं किया गया है।

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी की मौत का खुलासा, हत्या को हादसा दिखाने की रची गई साजिश

MP News: इंदौर में बैंक कर्मचारी पलक काशिव हत्याकांड का बड़ा खुलासा। प्रेमी ने शादी से इनकार पर गला घोंटा, फिर पेट्रोल डालकर आग लगाई और हादसा दिखाने की साजिश रची। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर में निजी बैंक की कर्मचारी पलक काशिव की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में इसे गैस रिसाव और आग से जुड़ा हादसा माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और साइबर जांच ने पूरी कहानी बदल दी। पुलिस के मुताबिक यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी मयंक शाक्य शादी के लिए लगातार दबाव बना रहा था। जब पलक ने शादी से इनकार कर दिया तो उसने कथित तौर पर उसकी हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करने की बात भी पुलिस के सामने कही है। इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच की मदद से हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। कैसे सामने आई हत्या की सच्चाई? पलक काशिव का शव सोमवार को तपेश्वरी क्षेत्र स्थित फ्लैट में मिला था। परिवार के लोग दो दिनों से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। जब मकान मालिक फ्लैट पहुंचा तो पलक मृत अवस्था में मिली। मौके पर गैस का बर्नर खुला था और गैस का रिसाव हो रहा था। रसोई में कटी हुई सब्जियां भी रखी थीं। शुरुआती हालात देखकर ऐसा लगा कि किसी घरेलू हादसे में उसकी मौत हुई होगी। इसी आधार पर पुलिस ने पहले दुर्घटना की संभावना मानकर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच की दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक नकाबपोश युवक तेज़ी से कॉलोनी से निकलता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने पलक के परिचित लोगों की जानकारी जुटाई और साइबर टीम की मदद से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की। तकनीकी जांच में मयंक शाक्य की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। दतिया से गिरफ्तारी, पूछताछ में कबूल किया अपराध पुलिस ने आरोपी मयंक शाक्य को दतिया से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पहले पलक का गला दबाया। जब वह बेहोश हो गई तो उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घटना को हादसा साबित करने के लिए गैस का बर्नर भी खुला छोड़ दिया, ताकि ऐसा लगे कि आग गैस रिसाव से लगी थी। गाने के शौक ने कराई थी दोनों की मुलाकात जांच में यह भी सामने आया कि पलक और मयंक की पहचान स्टार मेकर्स ऐप के जरिए हुई थी। दोनों को गाने का शौक था और इसी प्लेटफॉर्म पर उनकी दोस्ती हुई थी। समय के साथ दोनों संपर्क में आए, लेकिन शादी को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए। पुलिस जांच में क्या-क्या सामने आया? मुख्य तथ्य

Ratlam News: रतलाम में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लाखों रुपये का डोडाचूरा बरामद

Ratlam News: रतलाम के बड़ावदा थाना क्षेत्र में पुलिस ने 290 किलो डोडाचूरा और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की। कार्रवाई के दौरान दो आरोपी मौके से फरार हो गए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बड़ावदा थाना पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली से 290 किलोग्राम डोडाचूरा बरामद किया है। जब्त किए गए मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 14 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ट्रैक्टर लेकर भाग निकला। पीछा किए जाने पर चालक और उसका साथी ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए। पुलिस ने वाहन की तलाशी ली तो ट्रॉली में प्लास्टिक के कट्टों में भरा डोडाचूरा मिला। फिलहाल पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। गश्त के दौरान पुलिस को देखकर भागे आरोपी जावरा एसडीओपी संदीप कुमार के अनुसार, बड़ावदा थाना पुलिस की टीम नियमित रात्रि गश्त पर थी। इसी दौरान एक बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली संदिग्ध स्थिति में दिखाई दी। जब पुलिस ने वाहन रोकने का संकेत दिया तो चालक तेजी से वाहन लेकर भाग निकला। पुलिस टीम ने पीछा किया, जिसके बाद आरोपी ग्राम सिंदुरकिया स्थित शासकीय मिडिल स्कूल के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर झाड़ियों की ओर भाग गए। 13 कट्टों में मिला 290 किलो डोडाचूरा पुलिस ने मौके पर छोड़ी गई ट्रॉली की तलाशी ली। जांच के दौरान ट्रॉली में रखे 13 प्लास्टिक के कट्टों में अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा मिला। तौल कराने पर इसका कुल वजन 290 किलोग्राम निकला। पुलिस के अनुसार इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 14.50 लाख रुपये है। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज बरामद डोडाचूरा और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली को पुलिस ने जब्त कर लिया है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अब ट्रैक्टर-ट्रॉली के मालिक और फरार आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। संभावित ठिकानों पर दबिश पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी कार्रवाई के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही वाहन के स्वामित्व और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

Ratlam News: रतलाम में वन भूमि विवाद बना खूनी संघर्ष, पहाड़ी पर युवक की गला रेतकर हत्या, पिता और भाई भी घायल

Ratlam News: रतलाम के बाजना थाना क्षेत्र के कागलीखोरा गांव में वन विभाग की जमीन के विवाद में 18 वर्षीय युवक की हत्या कर दी गई। पिता और भाई घायल, पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के बाजना थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह वन विभाग की जमीन को लेकर चला आ रहा विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। कागलीखोरा गांव की पहाड़ी पर खेती की हकाई करने पहुंचे एक परिवार पर हमला कर दिया गया, जिसमें 18 वर्षीय युवक की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई। हमले में मृतक के पिता और बड़े भाई भी घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर बाजना थाना पुलिस, एफएसएल टीम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच वन विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। कागलीखोरा गांव की पहाड़ी पर हुआ हमला पुलिस के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे लक्ष्मण (18) पुत्र बादरिया अपने पिता बादरिया और बड़े भाई नारायण (20) के साथ गांव की पहाड़ी पर वन भूमि की हकाई करने पहुंचे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के 6 से 7 लोग वहां पहुंचे। बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में लक्ष्मण के गले पर गंभीर वार किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पिता और भाई भी हमले में घायल हो गए। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से देर से पहुंची सूचना घटना जिस इलाके में हुई, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण पुलिस को तत्काल सूचना नहीं मिल सकी। करीब 10:30 बजे डायल-112 के माध्यम से पुलिस को हत्या की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही बाजना थाना प्रभारी रविंद्र दंडोतिया पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद रतलाम से एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल भी घटनास्थल पहुंचे और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बाजना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां दोपहर में पोस्टमार्टम कराया गया। वन विभाग की जमीन को लेकर पुराना विवाद पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच गांव की पहाड़ी पर स्थित वन विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। इसी पुराने विवाद ने मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हमले के पीछे की परिस्थितियों को भी खंगाल रही है। छह आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज बाजना थाना पुलिस ने हत्या सहित अन्य धाराओं में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दर्ज आरोपियों में शामिल हैं— पुलिस के अनुसार सभी आरोपी एक ही परिवार के सदस्य हैं। कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा? बाजना थाना प्रभारी रविंद्र दंडोतिया ने बताया कि मृतक की उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। परिजन उसकी उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बता रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने कहा कि डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मामले के सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच की जा रही है।

MP News: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल तक सहमति से बने संबंध को नहीं माना दुष्कर्म

MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल तक सहमति से बने संबंधों को दुष्कर्म नहीं मानते हुए केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज रेप की FIR और लंबित आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सहमति से बने संबंधों और दुष्कर्म के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दो बालिग अपनी स्वतंत्र इच्छा से लंबे समय तक संबंध में रहे हैं और सहमति किसी झूठे वादे, धमकी या दबाव के आधार पर नहीं ली गई है, तो ऐसे मामले में दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर भोपाल निवासी एक केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनाया। यह निर्णय सहमति (Consent) और झूठे विवाह के वादे से जुड़े मामलों में कानूनी दृष्टिकोण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ता एक केंद्रीय कर्मचारी है, जिसके खिलाफ उसकी विवाहित सहकर्मी ने भोपाल के छोला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया। साथ ही शादी का झांसा देकर करीब चार वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था और मामला ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन था। हाईकोर्ट ने किन तथ्यों पर दिया फैसला? सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों का विस्तृत परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता: अदालत ने यह भी माना कि दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे और रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने महिला को ब्लैकमेल किया, धमकाया या झूठे विवाह के वादे से उसकी सहमति प्राप्त की। अदालत ने क्या कहा? न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि यदि दो बालिग बिना किसी दबाव, भय या झूठे प्रलोभन के अपनी स्वतंत्र इच्छा से लंबे समय तक संबंध में रहते हैं, तो केवल बाद में विवाद उत्पन्न होने से उस संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने का आदेश दिया। फैसले का कानूनी महत्व यह फैसला इस सिद्धांत को दोहराता है कि दुष्कर्म के मामलों में प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है। यदि सहमति स्वतंत्र रूप से दी गई हो और उसे धोखे, धमकी, दबाव या झूठे विवाह के वादे से प्राप्त न किया गया हो, तो अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेती है।

MP News: मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख किसानों को ₹3,300 करोड़ की बड़ी सौगात

MP News: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता राशि ट्रांसफर की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को खंडवा में आयोजित राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹3,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित की। नई कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से किसान, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। ₹3,300 करोड़ की राशि सीधे किसानों के खातों में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डिजिटल सिंगल-क्लिक प्रणाली के जरिए 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹3,300 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की। सरकार का कहना है कि यह आर्थिक सहायता किसानों को खेती से जुड़े खर्च पूरे करने और बेहतर कृषि तकनीक अपनाने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, “राज्य के सभी किसानों को बहुत-बहुत बधाई। हमारी सरकार हर स्थिति में आपके साथ मजबूती से खड़ी है।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। कृषि प्रदर्शनी का किया निरीक्षण कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने कृषि मशीनरी, आधुनिक खेती की तकनीकों और विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शकों और किसानों से बातचीत कर खेती में नवाचारों की जानकारी ली। इस दौरान खंडवा जिले के कई प्रगतिशील किसानों को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

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