MP News: मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ा, पांच साल बाद लागू हुई नई दरें; जानिए किस बस का कितना बढ़ा किराया

MP News: मध्य प्रदेश में पांच साल बाद बस किराए में 60% तक बढ़ोतरी लागू हो गई है। जानिए नई किराया दरें, किस बस का कितना किराया बढ़ा और भोपाल-इंदौर का नया किराया। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब यात्रा पहले की तुलना में महंगी हो गई है। राज्य सरकार ने करीब पांच साल बाद यात्री बसों के किराए में संशोधन करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। सबसे बड़ा बदलाव साधारण बसों के किराए में हुआ है, जहां प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाकर 2 रुपये कर दिया गया है। नई अधिसूचना के साथ ही बढ़ा हुआ किराया तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सरकार का कहना है कि लंबे समय से बढ़ती परिचालन लागत और डीजल की कीमतों को देखते हुए किराया संशोधित किया गया है। दूसरी ओर, बस ऑपरेटर लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। पांच साल बाद क्यों बढ़ाया गया बस किराया? आखिरी बार अप्रैल 2021 में बस किराए में संशोधन किया गया था। तब से डीजल, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और कर्मचारियों के खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। बस संचालकों का कहना था कि पुराने किराए पर संचालन करना मुश्किल होता जा रहा था। इसी बीच बस ऑपरेटर संगठनों ने 7 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इससे पहले ही राज्य सरकार ने नई किराया दरों की अधिसूचना जारी कर दी। साधारण बस का नया किराया नई व्यवस्था के अनुसार अब साधारण बस का किराया 2 रुपये प्रति किलोमीटर होगा। पहले यह लगभग 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर था। साथ ही न्यूनतम किराया भी बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 7 रुपये था। किन बसों का कितना बढ़ा किराया? साधारण बस रात्रिकालीन बस सेवा (रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक) डीलक्स बस (नॉन-एसी) स्लीपर बस डीलक्स बस (एसी) सुपर लग्जरी एसी कोच ध्यान दें: डीलक्स, स्लीपर और लग्जरी बसों पर अलग से नाइट चार्ज नहीं लगेगा। वहीं एक्सप्रेस बस सेवाओं के लिए भी अतिरिक्त किराया नहीं लिया जाएगा। भोपाल से इंदौर का नया बस किराया यदि भोपाल से इंदौर (करीब 180 किलोमीटर) की यात्रा करते हैं, तो नई दरें इस प्रकार होंगी— बस ऑपरेटरों ने क्या कहा? बस संचालकों के संगठनों का कहना है कि यह निर्णय लंबे समय से लंबित था। उनका तर्क है कि वर्ष 2021 की तुलना में डीजल और संचालन खर्च काफी बढ़ चुके हैं, इसलिए किराया संशोधन जरूरी हो गया था। हालांकि, संगठनों का कहना है कि उनकी अन्य मांगों पर सरकार से बातचीत अभी जारी है। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से पहले बड़ा फैसला राज्य सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत निजी बसों को अनुबंध के आधार पर चिन्हित मार्गों पर संचालित किया जाएगा। इस व्यवस्था में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही किराया वसूली और संचालन की निगरानी सीसीटीवी तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की जाएगी। इसकी शुरुआत सबसे पहले इंदौर क्षेत्र से किए जाने की तैयारी है।

UPI पेमेंट रहेगा फ्री, लेकिन दुकानदारों पर लग सकता है MDR! संसद में पेश नए बिल से क्या बदल सकता है?

संसद में पेश पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स संशोधन बिल 2027 के बाद UPI और डिजिटल पेमेंट पर MDR लागू करने का रास्ता खुल सकता है। जानिए ग्राहकों और कारोबारियों पर इसका क्या असर होगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। संसद में पेश किए गए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (संशोधन) बिल, 2027 के बाद भविष्य में UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट्स पर शुल्क तय करने का अधिकार सरकार के पास होगा। फिलहाल आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले UPI ट्रांसफर पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। हालांकि, सरकार भविष्य में व्यापारियों से लिए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर फैसला कर सकती है। दरअसल, पिछले कुछ समय से बैंक और डिजिटल पेमेंट कंपनियां लगातार यह मांग कर रही थीं कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए किसी न किसी रूप में राजस्व का स्रोत होना चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में यह संशोधन बिल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या है नया संशोधन बिल? वित्त मंत्रालय ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (अमेंडमेंट) बिल, 2027 पेश किया है। इस बिल के जरिए सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह भविष्य में तय कर सके कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू होगा और किन पर नहीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिल पेश होने का मतलब यह नहीं है कि अभी से कोई शुल्क लागू हो गया है। वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। MDR क्या होता है? मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह प्रोसेसिंग शुल्क होता है जिसे दुकानदार या व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं। जनवरी 2020 से सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो MDR लागू किया था, ताकि देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके। आम ग्राहकों पर क्या असर होगा? सबसे राहत की बात यह है कि फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान में कोई बदलाव नहीं होगा। ग्राहकों के लिए अहम बातें कारोबारियों पर कैसे पड़ सकता है असर? यदि भविष्य में सरकार MDR लागू करती है तो उसका असर मुख्य रूप से व्यापारियों और दुकानदारों पर पड़ सकता है। बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अधिक राशि वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कितना हो सकता है MDR? अभी किसी दर की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, विभिन्न चर्चाओं में अनुमान लगाया जा रहा है कि— नोट: यह केवल संभावित अनुमान हैं। अंतिम निर्णय सरकार और RBI की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा। सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है? जनवरी 2020 में जीरो MDR लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। आज देश में हर महीने लगभग 23 अरब UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। इतने बड़े नेटवर्क को संचालित करने के लिए सर्वर, साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर और तकनीकी ढांचे पर लगातार निवेश की जरूरत पड़ती है। बैंक और पेमेंट कंपनियों का कहना है कि बिना किसी आय के इस व्यवस्था को लंबे समय तक चलाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। अनुमानों के मुताबिक यदि सीमित MDR लागू होता है तो डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को सालाना लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। आगे क्या होगा? अभी यह केवल संशोधन बिल के रूप में संसद में पेश किया गया है। आगे की प्रक्रिया इस प्रकार होगी—

Ratlam News: रतलाम में दिनदहाड़े खौफनाक वारदात: पत्नी की गला रेतकर हत्या, पति मौके से गिरफ्तार

Ratlam News: रतलाम के माणक चौक थाना क्षेत्र के सोनार बावड़ी में पति ने पत्नी की गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पति को मौके से हिरासत में लिया, मामले की जांच जारी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम शहर में रविवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। माणक चौक थाना क्षेत्र के सोनार बावड़ी इलाके में एक पति ने अपनी पत्नी की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी। घटना दिनदहाड़े होने से क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान 32 वर्षीय रुकैया के रूप में हुई है, जबकि पुलिस ने आरोपी पति 35 वर्षीय असगर अली को घटनास्थल से ही हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस हत्या के पीछे की वजह जानने में जुटी है। परिवार के सामने हुई इस दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों को भी स्तब्ध कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल टीम और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंच गए। भाई ने सुनी चीख, कमरे का नजारा देख रह गया सन्न जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 11 बजे रुकैया की चीख सुनकर उसका बड़ा भाई मुस्तफा पड़ोसियों के साथ घर के अंदर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कमरे में रुकैया बिस्तर पर लहूलुहान अवस्था में पड़ी थी। आरोप है कि उस समय असगर अली उसकी छाती पर बैठकर धारदार हथियार से लगातार गले पर वार कर रहा था। मौजूद लोगों ने आरोपी को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह उनकी ओर भी आक्रामक हो गया। इसके बाद लोगों ने तत्काल बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके से आरोपी को लिया हिरासत में सूचना मिलते ही माणक चौक थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और आरोपी पति को हिरासत में ले लिया। इसके बाद एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में हत्या के कारणों की जांच जारी है। दो छोटे बच्चों के सिर से उठा मां का साया इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रुकैया अपने पीछे दो वर्षीय पुत्र और सात वर्षीय पुत्री को छोड़ गई हैं। मासूम बच्चों की मौजूदगी में हुई इस वारदात ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। स्थानीय लोग और बोहरा समाज के सदस्य बड़ी संख्या में घटनास्थल पर एकत्रित हो गए। थाना प्रभारी ने क्या कहा? माणक चौक थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटा लिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ और जांच के बाद ही हत्या के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

LPG e-KYC की आखिरी तारीख नजदीक, 16 अगस्त के बाद लाखों उपभोक्ताओं को हो सकती है परेशानी

16 अगस्त तक LPG e-KYC नहीं कराने वाले लाखों गैस उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। जानिए क्या है पूरा मामला और e-KYC कराने का आसान तरीका। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG e-KYC: घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह समय बेहद अहम है। गैस कंपनियां लगातार ग्राहकों को e-KYC कराने के लिए एसएमएस भेज रही हैं। संदेश में 16 अगस्त तक आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करने की बात कही गई है। मध्य प्रदेश में अब भी करीब 39.84 लाख उपभोक्ताओं की LPG e-KYC बाकी है। ऐसे में अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ गैस एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है। कई जगहों से सिलेंडर डिलीवरी प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि घरेलू सिलेंडर नहीं मिलने या कमर्शियल दर पर सिलेंडर देने को लेकर गैस कंपनियों की ओर से कोई सार्वजनिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। फिलहाल एजेंसियों को मौखिक निर्देश मिलने की बात सामने आई है। LPG e-KYC क्यों बनी जरूरी? सरकार और तेल विपणन कंपनियां लंबे समय से एलपीजी कनेक्शन का आधार आधारित सत्यापन करा रही हैं। इसका उद्देश्य फर्जी कनेक्शन, डुप्लीकेट लाभार्थियों और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना है। e-KYC पूरी होने के बाद उपभोक्ता का गैस कनेक्शन आधार से सत्यापित हो जाता है, जिससे रिकॉर्ड अपडेट रहता है। क्या 947 रुपये का सिलेंडर 2935 रुपये में मिलेगा? सोशल मीडिया और कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि e-KYC नहीं कराने पर घरेलू उपभोक्ताओं को कमर्शियल सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। फिलहाल स्थिति क्या है? ऐसे में उपभोक्ताओं को अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय समय रहते e-KYC पूरी कर लेनी चाहिए। घर बैठे ऐसे कराएं LPG e-KYC e-KYC कराने के लिए तीन आसान विकल्प उपलब्ध हैं। 1. IndianOil ONE App यदि आपका कनेक्शन इंडियन ऑयल का है, तो आधिकारिक ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। 2. नजदीकी गैस एजेंसी आधार कार्ड और गैस कनेक्शन की जानकारी लेकर संबंधित एजेंसी पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जा सकता है। 3. सिलेंडर डिलीवरी के समय कई एजेंसियां डिलीवरी कर्मचारी के माध्यम से भी e-KYC की सुविधा दे रही हैं। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

Ratlam News: 12 साल पुराने यास्मीन शेरानी गोलीकांड में अदालत का फैसला, दो दोषियों को 10-10 साल की सजा

Ratlam News: रतलाम के चर्चित यास्मीन शेरानी गोलीकांड मामले में अदालत ने दो आरोपियों को 10-10 साल और एक आरोपी को आर्म्स एक्ट में 3 साल की सजा सुनाई, जबकि दो आरोपी बरी हुए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के बहुचर्चित यास्मीन शेरानी गोलीकांड में करीब 12 साल बाद अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जबकि दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने गोली चलाने वाले आरोपी और उसके सहयोगी को हत्या के प्रयास के अपराध में 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं एक अन्य आरोपी को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की सजा दी गई। यह मामला वर्ष 2014 में रतलाम शहर में हुए उन घटनाक्रमों में शामिल रहा, जिनके बाद पूरे शहर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। 27 सितंबर 2014 को नगर निगम परिसर में हुआ था हमला अपर लोक अभियोजक सौरभ सक्सेना के अनुसार, 27 सितंबर 2014 को दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच तत्कालीन नगर निगम नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेत्री यास्मीन शेरानी नगर निगम परिसर से अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान चेहरे पर कपड़ा बांधे एक युवक ने उन पर गोली चला दी। गोली उनकी गर्दन में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़ीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। डीएनए जांच ने खोला अहम राज वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बाइक पर सवार अपने साथी के साथ फरार हो गया। भागते समय उसने बाईजी का वास क्षेत्र में अपना हेलमेट फेंक दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान हेलमेट बरामद किया और उसमें मिले बालों का डीएनए परीक्षण कराया। जांच रिपोर्ट में डीएनए आरोपी चंदन शर्मा से मेल खा गया। अभियोजन पक्ष के लिए यह वैज्ञानिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ और अदालत ने इसे मामले के अहम सबूतों में शामिल माना। किन आरोपियों को कितनी सजा मिली? पुलिस ने इस मामले में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया था। अदालत का फैसला गोलीकांड के कुछ घंटे बाद हुई थी दूसरी सनसनीखेज वारदात यास्मीन शेरानी पर हमले के कुछ घंटे बाद ही रतलाम रोडवेज बस स्टैंड स्थित होटल संचालक कपिल राठौड़ की हत्या कर दी गई थी। एक ही दिन में हुई इन दो बड़ी घटनाओं के बाद शहर में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। हालात को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया था। उस समय यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना था। अभियोजन पक्ष की भूमिका अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक सौरभ सक्सेना ने अदालत में साक्ष्य और गवाहों के आधार पर पक्ष रखा। वैज्ञानिक जांच, डीएनए रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी माना।

Ratlam News: चार माह के जुड़वा बच्चों की हत्या मामले में अदालत का बड़ा फैसला, मां को दोहरा आजीवन कारावास

Ratlam News: रतलाम में चार माह के जुड़वा बच्चों की हत्या मामले में अदालत ने मां को दोहरा आजीवन कारावास और पति को साक्ष्य छिपाने के अपराध में तीन साल की सजा सुनाई। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के बहुचर्चित जुड़वा बच्चों की हत्या मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। चार माह के मासूम जुड़वा बच्चों हसन और फातिमा की पानी के ड्रम में डुबोकर हत्या करने की दोषी मां पम्मी उर्फ मुस्कान को न्यायालय ने दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को गंभीर मानते हुए जुर्माना भी लगाया। इसी मामले में आरोपी के पति आमिर कुरैशी को साक्ष्य छिपाने का दोषी मानते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह फैसला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सुनाया गया। करीब डेढ़ वर्ष पुराने इस मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। सुनवाई के दौरान कई गवाह मुकर गए, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। क्या था पूरा मामला? अभियोजन के अनुसार, पम्मी उर्फ मुस्कान अपने पति आमिर कुरैशी और चार माह के जुड़वा बच्चों हसन व फातिमा के साथ वेदव्यास कॉलोनी नंबर-4 में किराये के मकान में रहती थी। 20 नवंबर 2024 को दोपहर के समय घर से शोर सुनकर पड़ोसी छत पर पहुंचे। वहां दोनों मासूम बच्चे पानी से भरे प्लास्टिक के ड्रम में पड़े मिले। बाहर निकालने तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलने पर माणकचौक थाना पुलिस ने जांच शुरू की। बिना पोस्टमार्टम के कर दिया था अंतिम संस्कार जांच में सामने आया कि बच्चों के शवों को पुलिस को सूचना दिए बिना नूरानी कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। बाद में पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में कब्र खुदवाकर दोनों शव बाहर निकलवाए और पोस्टमार्टम कराया। मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दोनों बच्चों की मौत पानी में डूबने से हुई थी। पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी पुलिस जांच के दौरान आरोपी मां ने बताया कि घटना वाले दिन पति और सास रिश्तेदारी में गए थे। उसने पति से घर पर रुकने की बात कही थी क्योंकि वह अकेले दोनों बच्चों को संभालने में असमर्थ महसूस कर रही थी। अभियोजन के अनुसार, पति के जाने के बाद गुस्से में उसने पहले बेटे हसन को पानी के ड्रम में डुबोया और फिर बेटी फातिमा को भी उसी ड्रम में डाल दिया। घटना के बाद उसने पति को फोन कर इसकी जानकारी दी। 16 गवाह मुकर गए, फिर भी अदालत ने सुनाया दोषसिद्धि का फैसला मामले की सुनवाई अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाह पेश किए, जिनमें से 16 गवाह पक्षद्रोही हो गए। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों को पर्याप्त मानते हुए अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने क्या सजा सुनाई? अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान के अनुसार न्यायालय ने— अभियोजन पक्ष का पक्ष अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया कि पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया। कई गवाहों के मुकरने के बावजूद उपलब्ध प्रमाणों को न्यायालय ने विश्वसनीय माना।

Ratlam News: रतलाम PM आवास में नोटिस कार्रवाई के दौरान बवाल, महिला से मारपीट के आरोप; निगम टीम पर पथराव

Ratlam News: रतलाम के डोसीगांव PM आवास में नोटिस कार्रवाई के दौरान हिंसा, महिला से मारपीट और पथराव का मामला सामने आया। निगम ने 208 हितग्राहियों को अंतिम चेतावनी दी। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम शहर के डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के ईडब्ल्यूएस आवास परिसर में शुक्रवार को नगर निगम की कार्रवाई अचानक हिंसक झड़प में बदल गई। बकाया राशि के अंतिम नोटिस चस्पा करने पहुंची निगम टीम और स्थानीय रहवासियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई और पथराव की नौबत आ गई। घटना का पूरा वीडियो देखे घटना के दौरान एक महिला के साथ निगम कर्मचारियों द्वारा मारपीट किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और निगम कर्मचारियों पर पत्थर, गमले तथा लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस दौरान घटनास्थल की कवरेज कर रहे एक स्थानीय पत्रकार भी घायल हो गए। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि बकाया राशि जमा नहीं करने वाले हितग्राहियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध वसूली के आरोपों से बढ़ा विवाद स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम के उपयंत्री राजेश पाटीदार ने पहले उनसे अवैध रूप से राशि ली थी और भरोसा दिलाया था कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। जब शुक्रवार को निगम की टीम अंतिम नोटिस लेकर पहुंची तो इसी मुद्दे को लेकर लोगों ने विरोध जताया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। नोटिस देने पहुंची थी नगर निगम की टीम जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्र सिंह, इंजीनियरों और करीब 25 से 30 कर्मचारियों की टीम डोसीगांव स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में पहुंची थी। उद्देश्य बकायादार हितग्राहियों को अंतिम नोटिस देना और बकाया राशि जमा कराने के लिए समझाइश देना था। इसी दौरान कुछ लोगों से कहासुनी हुई और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। पथराव के बाद कर्मचारियों को भागकर बचानी पड़ी जान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद भीड़ ने निगम कर्मचारियों पर पथराव शुरू कर दिया। गमले फेंके गए और लाठी-डंडों से भी हमला किया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए मौके से भागना पड़ा। घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें अफरा-तफरी का माहौल दिखाई देता है। पत्रकार भी हुए घायल, बाद में पहुंची पुलिस हंगामे के दौरान कवरेज कर रहे एक स्थानीय पत्रकार भी हमले में घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम आयुक्त अनिल भाना, एसडीएम तरुण जैन, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, औद्योगिक थाना प्रभारी गायत्री सोनी सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। तब तक अधिकांश उपद्रवी वहां से जा चुके थे। पुलिस सुरक्षा में दोबारा हुई कार्रवाई स्थिति सामान्य होने के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने दोबारा कार्रवाई शुरू की। बकायादार हितग्राहियों के फ्लैटों पर अंतिम नोटिस चस्पा किए गए और कुछ मामलों में बिजली कनेक्शन भी काटे गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। 208 हितग्राहियों को अंतिम चेतावनी नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डोसीगांव के 208 हितग्राहियों को तीन दिन के भीतर करीब 1.80 लाख रुपये की बकाया राशि जमा करने का अंतिम नोटिस दिया है। यदि तय समय तक भुगतान नहीं किया गया तो 4 अगस्त 2026 से फ्लैट खाली कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकती है। निगम आयुक्त ने क्या कहा नगर निगम आयुक्त अनिल भाना ने कहा कि वर्ष 2019 में इन फ्लैटों की लागत करीब सात लाख रुपये थी, लेकिन पात्र हितग्राहियों को शासन की सहायता से लगभग दो लाख रुपये में आवास उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि निगम की टीम फ्लैट खाली कराने नहीं, बल्कि लोगों को बकाया राशि जमा कर रजिस्ट्री कराने के लिए समझाने पहुंची थी। कर्मचारियों पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कर रही वीडियो के आधार पर जांच सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के अनुसार, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी

MP News: छात्रों ने AI से लिखे उत्तर, कॉपी के आखिर में छोड़ गए ‘लिंक पर क्लिक करें’

MP News: सागर विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के दौरान ChatGPT से सामूहिक नकल का मामला सामने आया। जांच शुरू, संबंधित कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए गए हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मध्य प्रदेश के सागर से एक गंभीर मामला सामने आया है। डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान उत्तरपुस्तिकाओं में ऐसे संकेत मिले, जिनसे ChatGPT की मदद से सामूहिक नकल किए जाने का संदेह पैदा हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने छिंदवाड़ा जिले के सौंसर स्थित एक निजी कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि शुरुआती जांच में सामने आए संकेत सही साबित होते हैं तो यह विश्वविद्यालय परीक्षाओं में AI के कथित दुरुपयोग का प्रदेश के चर्चित मामलों में से एक माना जा सकता है। उत्तरपुस्तिका में मिला संदिग्ध संदेश, यहीं से शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मई में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 17 कॉलेजों में स्नातक द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित हुई थीं। केंद्रीय मूल्यांकन के दौरान अर्थशास्त्र विषय की एक उत्तरपुस्तिका में परीक्षक की नजर उत्तर के अंत में लिखे एक असामान्य संदेश पर पड़ी। उत्तर के नीचे “वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें” जैसा उल्लेख लिखा हुआ था। परीक्षा की उत्तरपुस्तिका में इस तरह का संदेश मिलने पर परीक्षक ने तत्काल परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी दी। तीन विषयों की कॉपियों में मिले एक जैसे उत्तर शुरुआती जांच के बाद संबंधित कॉलेज की अन्य उत्तरपुस्तिकाओं की भी जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के उत्तर काफी हद तक एक जैसे हैं। विश्वविद्यालय को प्राथमिक स्तर पर यह संदेह हुआ कि कई उत्तर ChatGPT या अन्य AI टूल की मदद से तैयार किए गए हो सकते हैं। यह समानता केवल एक विषय तक सीमित नहीं रही, बल्कि तीन अलग-अलग विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं में भी ऐसे संकेत मिले। पूरे कॉलेज के परीक्षा परिणाम पर लगी रोक मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सतपुड़ा कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन एंड बायोटेक्नोलॉजी, सौंसर (छिंदवाड़ा) के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध अन्य महाविद्यालयों के परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। जांच समिति करेगी अंतिम फैसला विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल के अनुसार, संबंधित कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद यह तय करेगी कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने सहित अन्य अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। एक नजर में पूरा मामला महत्वपूर्ण जानकारी

MP News: ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

MP News: ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनेगा। 500 करोड़ की केंद्रीय सहायता, 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार का रास्ता खुलेगा। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ)विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए मोबाइल, नेटवर्किंग उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स और भविष्य की 5जी-6जी तकनीकों के उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत-2047 के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब देश केवल टेलीकॉम सेवाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक दूरसंचार उपकरणों का वैश्विक निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार देगी 500 करोड़ रुपये की सहायता परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है। करीब 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर तैयार होगा, ताकि उद्योगों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में सुविधा मिल सके। एक ही परिसर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं इस एकीकृत औद्योगिक परिसर में दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं— इससे भारत में हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार सरकार के अनुसार इस परियोजना के माध्यम से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगभग 9 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होगा। इससे 10 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। पहले चरण में इन कंपनियों का निवेश परियोजना के पहले चरण में देश की प्रमुख कंपनियां निवेश करेंगी। इनमें शामिल हैं— इन कंपनियों की ओर से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया जाएगा, जिससे 4,500 से अधिक उच्च वेतन वाले रोजगारसृजित होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी संचालन परियोजना के संचालन और प्रबंधन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा। इसमें— यह मॉडल केंद्र और राज्य सरकार की साझा भागीदारी वाली महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल होगा। केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत को दूरसंचार क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए मजबूत स्वदेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। उनके अनुसार ग्वालियर का यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन भारत को दुनिया पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया को भारत पर निर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

MP News: MP के सरकारी स्कूलों के लिए नई सौगात, लगातार 3 साल 100% रिजल्ट पर मिलेगा ₹5 लाख का इनाम

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 साल लगातार 100% बोर्ड रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को ₹5 लाख और प्राचार्यों को ₹1 लाख पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि जो शासकीय विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में आयोजित महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व एवं अलंकरण समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर प्रदेश के पहले ‘गीता भवन’ का भी लोकार्पण हुआ, जिसका निर्माण लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को सम्मानित करना सरकार की प्राथमिकता है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा, नवाचार और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। 100% रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को मिलेगा 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो सरकारी विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार होगा और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में भी सुधार आएगा। राचार्यों को मिलेगा 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री ने लगातार तीन वर्षों तक उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों के लिए भी विशेष पुरस्कार की घोषणा की। ऐसे विद्यालयों के संस्था प्रमुखों को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती पूरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 10,000 नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाकर पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। ‘मिशन बुनियाद’ के तहत AI आधारित पढ़ाई प्रदेश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मिशन बुनियाद’ की शुरुआत की घोषणा भी की। इस योजना के तहत प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों (कक्षा 9वीं से 12वीं) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। उज्जैन में हुआ प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जयिनी ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की ऐतिहासिक भूमि है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि सांदीपनि की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया।

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